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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Go to Bandargudha, Devgarh, not Mussoorie or Shimla on New Year

Lalitpur News: नए साल पर मसूरी, शिमला नहीं बंदरगुढ़ा, देवगढ़ जाएं

Mon, 30 Dec 2024 12:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 30 Dec 2024 12:27 AM IST
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Go to Bandargudha, Devgarh, not Mussoorie or Shimla on New Year
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। नए साल पर घूमने के लिए अपने यहां भी कई पर्यटक स्थल हैं। आप वहां भी जा सकते हैं। अगर आप मसूरी, शिमला का प्लान बना रहे हैं तो रुकिए बंदरगुढ़ा और देवगढ़ आपका इंतजार कर रहा है। इसके अलावा प्रकृति का आनंद कराकरावल व कनकनद्दर में लिया जा सकता है। ऐतिहासिक इमारतों के शौकीनों के लिए किला भी मौजूद है। धार्मिक लोगों के लिए रणछोरधाम, देवामाता, पांडव वन पसंदीदा स्थल हैं। देवगढ़ में प्राचीन, प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक इमारतों का समागम है। मानव निर्मित पर्यटन में गोविंदसागर बांध, राजघाट व माताटीला बांध नए वर्ष में लोगों का स्वागत करेंगे। यहां सुंदर तालाब, कलकल करते झरनों के साथ सांस्कृतिक रंग और ऐतिहासिक धरोहरें किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। दशावतार मंदिर हो या जैन मंदिरों की शृंखला पर्यटकों को मोह लेती हैं।
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लुभाएगा देवगढ़ का सौंदर्य
देवगढ़ में दशावतार मंदिर, तथा यहीं पर पहाड़ी के ऊपर वराह मंदिर है। यहां पास में ही सिद्ध गुफा, नाहर घाटी, राजघाटी में लेख तथा कलात्मक शंख लिपी देखने योग्य है। देवगढ़ पहाड़ी के ऊपर विस्तृत जैन मंदिर समूह है, जिसमें शांतिनाथ भगवान की भव्य प्रतिमा प्रतिष्ठित है। पास में ही बौद्ध गुफा दर्शनीय है। ग्राम कुंचदों में कुरैयावीर नामक देवालय है। परिसर में एक बावड़ी और चारों ओर मूर्तियों के अवशेष भी हैं।
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गरुड़ पर विराजमान है भगवान विष्णु की प्रतिमा
धौजरी स्थित रणछोर धाम में प्रसिद्ध गरुड़ पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है। उमा-महेश की दूसरी प्रतिमा भी दर्शनीय है। पाली अंतर्गत पूर्वाभिमुख नीलकंठेश्वर मंदिर है, जिसके पास ही नंदी विराजमान हैं। ग्राम दूधई में तीन मंदिरों के भग्नावशेष हैं। यहां पर सैंड स्टोन की एक बड़ी चट्टान को काटकर बनाई गई हजारों वर्ष पुरानी 22 फीट ऊंची नरसिंह अवतार की विशाल प्रतिमा भी मौजूद है। ऐसी प्रतिमा शायद देश में कहीं नहीं है। ग्राम चांदपुर-जहाजपुर के अंतर्गत हजारिया महादेव मंदिर, वराह मंदिर, भंडारिया मंदिर, विष्णुई मंदिर, शांति नाथ जैन मंदिर, बेलमढ़ी जैसी पुरातात्विक धरोहरें इतिहास को संजोए हुए हैं। गौना के जंगलों में पांडवन द्वापर युग की याद दिलाता है, यहां महाभारत काल में पांडवों ने विश्राम किया था।
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1857 की क्रांति की याद दिलाता है किला
यहां ऐतिहासिक धरोहरें भी बेजोड़ हैं, जिसमें 1857 की क्रांति की याद तालबेहट मर्दनसिंह का किला दिलाता है। भारतगढ़ दुर्ग ने अंग्रेजी फौजों के तोपों से छूटे हुए गोलों का भार झेला है। इसके अलावा बानपुर, मड़ावरा, सौरई व बालाबेहट का किला भी वैभवशाली इतिहास को दोहराता है।
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बांध परियोजनाओं भी लुभाएंगी
बेतवा नदी पर राजघाट व माताटीला बांध परियोजनाएं भी इंसान की कारीगरी का बेजोड़ नमूना है। राजघाट बांध से बेतवा नदी मानो समुद्र की तरह दिखाई देती है। वहीं, बंदरगुढ़ा से नौकायन करते हुए विंध्याचल की पहाड़ियों को देखने का अपना अलग ही अनुभव है। गोविंदसागर बांध में निर्मित साइफन इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है, जिसमें हवा के प्रेशर से बांध के अतिरिक्त जल की निकासी हो जाती है। यह ऑटोमेटिक है, इसको संचालित करने की आवश्यकता नहीं होती।
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