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उत्पीड़न मामले की जांच से कन्नी काट रहे अफसर
lalitpur
Updated Mon, 26 Dec 2016 01:37 AM IST
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राजकीय इंटर कालेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य के उत्पीड़न मामले की जांच से अफसर कन्नी काट रहे हैं। अफसरों ने इस जांच को फुटबाल बनाकर रख दिया है। इससे एससी, एसटी आयोग वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं हो पा रहा है।
राजकीय इंटर कालेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य और जीव विज्ञान के प्रवक्ता आलोक प्रकाश सिंह ने 60 पन्नों में उत्पीड़न की शिकायत उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग में की है। इसमें वर्तमान प्रभारी प्रधानाचार्य से लेकर विभाग के कई अफसरों की कार्यशैली को संदेह के कठघरे में खड़ा किया गया है। इससे अफसर इस जांच को करने से कतरा रहे हैं। अफसरों को भय है कि जांच के उपरांत उन्हें भी आरोपों के घेरे में लिया जा सकता है। इस वजह से कोई भी इसमें हाथ नहीं डाल रहा है। आयोग का पत्र आए एक माह से ज्यादा का समय गुजर गया है। लेकिन, जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। शुरुआत में जिला विद्यालय निरीक्षक डा. आरपी वर्मा ने प्रधानाचार्यों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसकी जांच पर शिकायतकर्ता ने सवाल खड़े कर दिए। जिस पर डीआईओएस ने कमेटी भंग करते हुए जांच बीएसए को दे दी। बीएसए ने जांच दो खंड शिक्षा अधिकारियों के हवाले कर दी। शिक्षा अफसरों आरोपों का अध्ययन किया तो इसमें कई उच्चस्थ अफसरों पर आरोप लगे थे। इसके बाद उन्होंने जांच करने की जगह हाथ खड़े कर दिए। बीएसए भी हाथ डालने से कन्नी काट रहे हैं। यही हाल डीआईओएस का है। वह भी आरोपों में नहीं घिरना चाहते हैं। तत्कालीन प्रभारी डीआईओएस चंद्रचूड़ दुबे ने नई कमेटी का प्रस्ताव डीएम के समक्ष रखा था। इस पर भी कोई निर्णय नहीं हो सका। इससे शिकायतकर्ता में अफसरों के प्रति असंतोष पनप रहा है।
पदोन्नति की जांच भी अधर में
मंडलायुक्त झांसी ने एससी, एसटी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की पदोन्नति मामले की शिकायत पर जांच बैठा रखी है। इसमें सीडीओ, जिला सेवायोजन अधिकारी व डीआईओएस को शामिल किया गया है। यह जांच भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है।
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राजकीय इंटर कालेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य और जीव विज्ञान के प्रवक्ता आलोक प्रकाश सिंह ने 60 पन्नों में उत्पीड़न की शिकायत उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग में की है। इसमें वर्तमान प्रभारी प्रधानाचार्य से लेकर विभाग के कई अफसरों की कार्यशैली को संदेह के कठघरे में खड़ा किया गया है। इससे अफसर इस जांच को करने से कतरा रहे हैं। अफसरों को भय है कि जांच के उपरांत उन्हें भी आरोपों के घेरे में लिया जा सकता है। इस वजह से कोई भी इसमें हाथ नहीं डाल रहा है। आयोग का पत्र आए एक माह से ज्यादा का समय गुजर गया है। लेकिन, जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। शुरुआत में जिला विद्यालय निरीक्षक डा. आरपी वर्मा ने प्रधानाचार्यों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसकी जांच पर शिकायतकर्ता ने सवाल खड़े कर दिए। जिस पर डीआईओएस ने कमेटी भंग करते हुए जांच बीएसए को दे दी। बीएसए ने जांच दो खंड शिक्षा अधिकारियों के हवाले कर दी। शिक्षा अफसरों आरोपों का अध्ययन किया तो इसमें कई उच्चस्थ अफसरों पर आरोप लगे थे। इसके बाद उन्होंने जांच करने की जगह हाथ खड़े कर दिए। बीएसए भी हाथ डालने से कन्नी काट रहे हैं। यही हाल डीआईओएस का है। वह भी आरोपों में नहीं घिरना चाहते हैं। तत्कालीन प्रभारी डीआईओएस चंद्रचूड़ दुबे ने नई कमेटी का प्रस्ताव डीएम के समक्ष रखा था। इस पर भी कोई निर्णय नहीं हो सका। इससे शिकायतकर्ता में अफसरों के प्रति असंतोष पनप रहा है।
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पदोन्नति की जांच भी अधर में
मंडलायुक्त झांसी ने एससी, एसटी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की पदोन्नति मामले की शिकायत पर जांच बैठा रखी है। इसमें सीडीओ, जिला सेवायोजन अधिकारी व डीआईओएस को शामिल किया गया है। यह जांच भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है।
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