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Lalitpur News: आयुष भवन के पास जमा कचरा हटा, दुर्गंध से मिली राहत
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) में आयुष भवन के पास लंबे समय से पड़े कचरा का उठान होने से दुर्गंध से राहत मिल गई है। साथ ही कचरा घर में घुस रहे जानवरों की रोकथाम के लिए गेट भी बंद कर दिया गया है।
अस्पताल परिसर स्थित आयुष भवन में होम्योपैथी, आयुर्वेदिक व योग और हेल्थ एटीएम समेत क्षय रोगियों को दवाइयां वितरित की जाती हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 250 लोगों की आवाजाही होती है। इस भवन के बाहर सदनशाह की ओर कचरा घर भी बना है, जहां अस्पताल का सूखा कचरा डाला जाता है। लेकिन, लंबे समय से कचरा का उठान होने से ढेर लग गया था। हालत यह थी कि सदनशाह से महिला अस्पताल मार्ग के फुटपाथ तक कचरा पहुंच गया था। वहीं, अस्पताल परिसर में अंदर आयुष भवन के द्वार तक आ गया था। इसका उठान न होने से दुर्गंध उठ रही थी। परेशान होकर होम्योपैथिक चिकित्सकों ने कक्ष परिवर्तन कर लिया था। मरीज भी आने जाने को लेकर परेशान थे। कई तो दुर्गंध के चलते आने तक से कतरा रहे थे। अमर उजाला ने 14 मई को पेज नंबर दो पर ''कचरा से घिरा आयुष भवन...उठ रही दुर्गंध '' शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नगर पालिका को पत्र लिखकर कचरा का उठान कराया। सफाई कर्मियों को कचरा नियत स्थान पर ही डालने के निर्देश दिए हैं।
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दो विभागों के बीच फंसा था पेच
कचरा उठान का मामला दो विभागों के बीच फंसा था। मेडिकल कॉलेज प्रशासन कचरा घर से उठान कराने पर अड़ा था। वहीं, नगर पालिका अंदर से कचरा उठान करने के लिए उदासीन बना था। पालिका कहना था कि अंदर से कचरा का उठान नहीं किया जाएगा। बताया था कि उठान करने वाली मशीन गली में नहीं चल सकेगी।
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अस्पाल परिसर के कचरा घर के साथ आसपास पड़े कचरे का उठान करा दिया गया है। बाहर से आने वाले जानवरों की रोकथाम के लिए ताला लगाया गया है।-डॉ. डी नाथ, प्राचार्य, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल) में आयुष भवन के पास लंबे समय से पड़े कचरा का उठान होने से दुर्गंध से राहत मिल गई है। साथ ही कचरा घर में घुस रहे जानवरों की रोकथाम के लिए गेट भी बंद कर दिया गया है।
अस्पताल परिसर स्थित आयुष भवन में होम्योपैथी, आयुर्वेदिक व योग और हेल्थ एटीएम समेत क्षय रोगियों को दवाइयां वितरित की जाती हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 250 लोगों की आवाजाही होती है। इस भवन के बाहर सदनशाह की ओर कचरा घर भी बना है, जहां अस्पताल का सूखा कचरा डाला जाता है। लेकिन, लंबे समय से कचरा का उठान होने से ढेर लग गया था। हालत यह थी कि सदनशाह से महिला अस्पताल मार्ग के फुटपाथ तक कचरा पहुंच गया था। वहीं, अस्पताल परिसर में अंदर आयुष भवन के द्वार तक आ गया था। इसका उठान न होने से दुर्गंध उठ रही थी। परेशान होकर होम्योपैथिक चिकित्सकों ने कक्ष परिवर्तन कर लिया था। मरीज भी आने जाने को लेकर परेशान थे। कई तो दुर्गंध के चलते आने तक से कतरा रहे थे। अमर उजाला ने 14 मई को पेज नंबर दो पर ''कचरा से घिरा आयुष भवन...उठ रही दुर्गंध '' शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नगर पालिका को पत्र लिखकर कचरा का उठान कराया। सफाई कर्मियों को कचरा नियत स्थान पर ही डालने के निर्देश दिए हैं।
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दो विभागों के बीच फंसा था पेच
कचरा उठान का मामला दो विभागों के बीच फंसा था। मेडिकल कॉलेज प्रशासन कचरा घर से उठान कराने पर अड़ा था। वहीं, नगर पालिका अंदर से कचरा उठान करने के लिए उदासीन बना था। पालिका कहना था कि अंदर से कचरा का उठान नहीं किया जाएगा। बताया था कि उठान करने वाली मशीन गली में नहीं चल सकेगी।
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अस्पाल परिसर के कचरा घर के साथ आसपास पड़े कचरे का उठान करा दिया गया है। बाहर से आने वाले जानवरों की रोकथाम के लिए ताला लगाया गया है।-डॉ. डी नाथ, प्राचार्य, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय