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स्तनपान शिशु का मौलिक अधिकार
amarujala
Updated Sun, 06 Aug 2017 01:09 AM IST
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- फोटो : demo
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ललितपुर।
सीएमओ कार्यालय के सभागार में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाने के लिए सीएमओ की अध्यक्षता में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें सीएमओ डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि स्तनपान सर्वोत्तम आहर और शिशु का मौलिक अधिकार है एवं मां के दूध में व्यापक विकास, शिशु को डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से बचाने और अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। अत: शिशु को प्रथम छह माह तक केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। बीएल गुप्ता सीडीपीओ ने स्तन पान से संबंधित भ्रांतियों के विषय में विस्तार पूर्वक बताया कि मां के दूध में पर्याप्त मात्रा में सभी पोषक तत्वों के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में पानी होता हैं, जो कि नवजात शिशु के भूख और प्यास दोनो की पूर्ति करता हैं। अत: अधिक गर्मी पड़ने पर पानी पिलाने की आवश्यकता नहीं हैं। साथ ही बच्चे को शहद, अन्य प्रकार का दूध, घुट्टी इत्यादि देना बच्चे को रोग देने के बराबर हैं। मानसी गुप्ता एचईओ ने बताया कि प्रदेश में एनएफएचएस 4 (2015-16) के अनुसार एक घंटे के अंदर स्तनपान की दर अभी भी मात्र 25.2 प्रतिशत है, जो कि काफी कम हैं। छह माह तक केवल स्तनपान की दर 41.6 प्रतिशत अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम हैं। अत: संपूर्ण स्तनपान के लिए और अधिक प्रयास किये जाने की आवश्यकता हैं। रजिया फिरोज डीएमएम ने स्तनपान के इस वर्ष 2017-18 की थीम ‘निरंतन स्तनपान एक साझा प्रयास’ के विषय में अवगत कराया और स्तनपान से मां एवं बच्चे को मानसिक रूप से संतुष्टि प्राप्त होती हैं। पर्याप्त मात्रा में स्तनपान प्राप्त बच्चे बड़े होकर आपराधिक प्रवृत्ति के नहीं होते हैं। उन बच्चों का बौद्धिक स्तर अच्छा होता हैं, यानि अधिक समय तक स्तन पान करने वाले बच्चों की बुद्धि उन बच्चो की अपेक्षा 03 प्वाइट अधिक होता हैं, जिन्हें मां का दूध कम समय के लिए प्राप्त होता हैं। परिवार और समाज के लिए संवेदनशील होते हैं। स्तनपान से मां को स्तन कैंसर होने की संभावना नहीं होती हैं। डॉ. मुकेश चंद्र दुबे अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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सीएमओ कार्यालय के सभागार में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाने के लिए सीएमओ की अध्यक्षता में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें सीएमओ डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि स्तनपान सर्वोत्तम आहर और शिशु का मौलिक अधिकार है एवं मां के दूध में व्यापक विकास, शिशु को डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से बचाने और अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। अत: शिशु को प्रथम छह माह तक केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। बीएल गुप्ता सीडीपीओ ने स्तन पान से संबंधित भ्रांतियों के विषय में विस्तार पूर्वक बताया कि मां के दूध में पर्याप्त मात्रा में सभी पोषक तत्वों के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में पानी होता हैं, जो कि नवजात शिशु के भूख और प्यास दोनो की पूर्ति करता हैं। अत: अधिक गर्मी पड़ने पर पानी पिलाने की आवश्यकता नहीं हैं। साथ ही बच्चे को शहद, अन्य प्रकार का दूध, घुट्टी इत्यादि देना बच्चे को रोग देने के बराबर हैं। मानसी गुप्ता एचईओ ने बताया कि प्रदेश में एनएफएचएस 4 (2015-16) के अनुसार एक घंटे के अंदर स्तनपान की दर अभी भी मात्र 25.2 प्रतिशत है, जो कि काफी कम हैं। छह माह तक केवल स्तनपान की दर 41.6 प्रतिशत अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम हैं। अत: संपूर्ण स्तनपान के लिए और अधिक प्रयास किये जाने की आवश्यकता हैं। रजिया फिरोज डीएमएम ने स्तनपान के इस वर्ष 2017-18 की थीम ‘निरंतन स्तनपान एक साझा प्रयास’ के विषय में अवगत कराया और स्तनपान से मां एवं बच्चे को मानसिक रूप से संतुष्टि प्राप्त होती हैं। पर्याप्त मात्रा में स्तनपान प्राप्त बच्चे बड़े होकर आपराधिक प्रवृत्ति के नहीं होते हैं। उन बच्चों का बौद्धिक स्तर अच्छा होता हैं, यानि अधिक समय तक स्तन पान करने वाले बच्चों की बुद्धि उन बच्चो की अपेक्षा 03 प्वाइट अधिक होता हैं, जिन्हें मां का दूध कम समय के लिए प्राप्त होता हैं। परिवार और समाज के लिए संवेदनशील होते हैं। स्तनपान से मां को स्तन कैंसर होने की संभावना नहीं होती हैं। डॉ. मुकेश चंद्र दुबे अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।