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ओवरलोड के कारण रात भर गुल रहती है बिजली
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बार/डोंगराखुर्द। कस्बा बार और नाराहट फीडर से जुड़े कई गांवों में बिजली की समस्या गंभीर हो गई है। दिन में तो बिजली पर्याप्त मिलती है, पर रात होते ही बिजली गुल हो जाती है। परेशान ग्रामीणों ने रात्रि कालीन बिजली कटौती बंद कराने की मांग की है।
कस्बा बार की बिजली पावर हाउस बांसी से जुड़ी है। बिजली जाने के बाद पावर हाउस बांसी फोन किया जाता है तो विद्युत विभाग के कर्मचारी ओवरलोड की बात कहकर फोन काट देते हैं। कोरोना महामारी फैली हुई है, अधिकतर लोग घरों में दुबके हैं, जिससे बिजली की खपत बढ़ गयी है। गर्मी का मौसम है। मच्छरों की तादात बढ़ गई है, इस कारण से बीमारियों का खतरा बढ़ गया हैं। जनप्रतिनिधि भी कस्बे की इस समस्या पर मौन हैं। आखिर कैसे बिना बिजली इस भीषण गर्मी का सामना किया जाए, अगर जल्द ही समस्या का निदान नहीं हुआ तो बीमारों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
उधर, नाराहट फीडर से जुडे़ दर्जनों गांवों में रात भर अंधेरा पसरा रहता है। इस फीडर से तीन दर्जन गांवों की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन रात्रि के समय विजली नहीं मिलने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली से चलने वाले उपकरण शोपीस बने हैं। लालटेन के सहारे ग्रामीणों को रात गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से रात्रिकालीन बिजली कटौती बंद कराए जाने की मांग की है।विद्युत सब स्टेशन बिरधा से नाराहट क्षेत्र की बिजली आपूर्ति के लिए बनाए गए नाराहट फीडर से जुडे गांवों के लोगों की समस्याएं कम होती नजर नहीं आ रहीं हैं। लगभग चालीस किलोमीटर लंबी जर्जर लाइन के सहारे 35 गांवों की आपूर्ति की जा रही है। इस फीडर से निकली लाइन के तार जर्जर हालत में हैं और जगह- जगह झूलते लटकते रहते हैं। वहीं, खंभे भी आडे तिरछी हालत में जरा सा हवा का झोंका लाइन को फाल्ट करने के लिए काफी हैं। गर्मियों एवं बरसात के मौसम में आंधी एवं बरसात के साथ चलने वाली हवाएं इस क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा बन जाती हैं।
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बीते सप्ताह चली आंधी के कारण बबीना क्षेत्र के 132 एवं 220 केवी के बिजली टावर टूटकर गिर गए थे। तभी से क्षेत्र को चालीस मेगावाट बिजली कम मिल रही है, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सैकड़ों गांव को एक सप्ताह से अधिक समय से रात्रि में बिजली नहीं मिल पा रही है, इस समस्या ने लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। नाराहट फीडर से जुडे 35 गांवों में 11 दिनों से रात में अंधेरा पसरा रहता है। गर्मी के कारण बच्चों का बुरा हाल है। ग्रामीणों ने जनहित में बिजली आपूर्ति करने की मांग की है।
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कस्बा बार की बिजली पावर हाउस बांसी से जुड़ी है। बिजली जाने के बाद पावर हाउस बांसी फोन किया जाता है तो विद्युत विभाग के कर्मचारी ओवरलोड की बात कहकर फोन काट देते हैं। कोरोना महामारी फैली हुई है, अधिकतर लोग घरों में दुबके हैं, जिससे बिजली की खपत बढ़ गयी है। गर्मी का मौसम है। मच्छरों की तादात बढ़ गई है, इस कारण से बीमारियों का खतरा बढ़ गया हैं। जनप्रतिनिधि भी कस्बे की इस समस्या पर मौन हैं। आखिर कैसे बिना बिजली इस भीषण गर्मी का सामना किया जाए, अगर जल्द ही समस्या का निदान नहीं हुआ तो बीमारों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
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उधर, नाराहट फीडर से जुडे़ दर्जनों गांवों में रात भर अंधेरा पसरा रहता है। इस फीडर से तीन दर्जन गांवों की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन रात्रि के समय विजली नहीं मिलने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली से चलने वाले उपकरण शोपीस बने हैं। लालटेन के सहारे ग्रामीणों को रात गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से रात्रिकालीन बिजली कटौती बंद कराए जाने की मांग की है।विद्युत सब स्टेशन बिरधा से नाराहट क्षेत्र की बिजली आपूर्ति के लिए बनाए गए नाराहट फीडर से जुडे गांवों के लोगों की समस्याएं कम होती नजर नहीं आ रहीं हैं। लगभग चालीस किलोमीटर लंबी जर्जर लाइन के सहारे 35 गांवों की आपूर्ति की जा रही है। इस फीडर से निकली लाइन के तार जर्जर हालत में हैं और जगह- जगह झूलते लटकते रहते हैं। वहीं, खंभे भी आडे तिरछी हालत में जरा सा हवा का झोंका लाइन को फाल्ट करने के लिए काफी हैं। गर्मियों एवं बरसात के मौसम में आंधी एवं बरसात के साथ चलने वाली हवाएं इस क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा बन जाती हैं।
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बीते सप्ताह चली आंधी के कारण बबीना क्षेत्र के 132 एवं 220 केवी के बिजली टावर टूटकर गिर गए थे। तभी से क्षेत्र को चालीस मेगावाट बिजली कम मिल रही है, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सैकड़ों गांव को एक सप्ताह से अधिक समय से रात्रि में बिजली नहीं मिल पा रही है, इस समस्या ने लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। नाराहट फीडर से जुडे 35 गांवों में 11 दिनों से रात में अंधेरा पसरा रहता है। गर्मी के कारण बच्चों का बुरा हाल है। ग्रामीणों ने जनहित में बिजली आपूर्ति करने की मांग की है।