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किसानों की आय बढ़ाएंगे बेर
lalitpur
Updated Fri, 03 Jun 2016 12:27 AM IST
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कृष्ाि
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। खेतों की मेड़ पर लगे जंगली बेर अब किसानों की आय का जरिया बनेंगे। उद्यान विभाग ने इसकी किस्म सुधारने की योजना को मूर्त रूप देना आरंभ कर दिया है। योजनांतर्गत मौजूदा वित्तीय वर्ष में 26 हजार पौधों की किस्म को सुधारा जाएगा, जिससे कृषकों की आमदनी 50 हजार रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
उद्यान विभाग ने कृषकों की माली हालत सुधारने के लिए बेर टॉप वर्किंग योजना शुरू की है, जिसमें खेतों की मेड़ व बंधी पर लगे जंगली बेर की बडिंग की जाएगी। एक पेड़ पर करीब 25 रुपये का खर्चा आएगा। इसके अलावा 75 रुपये प्रति पेड़ निवेश होगा, जिसमें नीम की फली व अन्य जैव उर्वरक डालने को दिए जाएंगे। नया पेड़ तैयार होने पर पहले वर्ष में 25 से 30 किलो बेर उगेंगे। यदि किसी किसान ने 50 पेड़ की बडिंग करा ली तो उसे करीब 50 हजार रुपये की आमदनी होगी। योजनांतर्गत जिल के 15 हजार किसानों को लाभान्वित किया जाएगा। जंगली बेर की जमीन से ऊंचाई छह इंच होनी चाहिए। ऐसे पेड़ों को सबसे पहले छांटा जाएगा। जब पेड़ पर नए किल्ले आएंगे, तब उसमें बेर की बट बांधी जाएगी। एक पेड़ पर दो या तीन बट बांधी जाएंगी। पेड़ों की नई किस्म तैयार करने का काम इसी माह से आरंभ हो जाएगा। फरवरी में जंगली बेर की जगह नई किस्म के बेर आने लगेंगे।
किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
पेड़ पर बट बांधने का प्रशिक्षण किसानों को दिया जाएगा। शुरुआत में विभाग का कर्मी पेड़ पर बट बांधने का काम करेगा।
डीबीटी से कृषक होंगे लाभान्वित
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनांतर्गत कृषकों को डीबीटी के माध्यम से लाभान्वित किया जाएगा। इसमें ड्रिप इरीगेशन पद्घति, पोर्टेबिल स्प्रिंकलर और लार्ज वाल्यूम योजना शामिल हैं। इसमें कृषकों को अनुदान प्रदान किया जाएगा। खास बात यह है कि कृषकों को योजना में शामिल होने से पहले आनलाइन पंजीयन कराना होगा। जिला उद्यान अधिकारी सुघर सिंह ने बताया कि आनलाइन पंजीयन के लिए कृषक के पास खतौनी, आधार कार्ड/वोटर कार्ड, बैंक खाते की छाया प्रति, लघु सीमांत कृषक के लिए 61 ख, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो होना आवश्यक है। पंजीयन में प्रथम आवक प्रथम पावक के सिद्धांत अपनाया जाएगा।
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उद्यान विभाग ने कृषकों की माली हालत सुधारने के लिए बेर टॉप वर्किंग योजना शुरू की है, जिसमें खेतों की मेड़ व बंधी पर लगे जंगली बेर की बडिंग की जाएगी। एक पेड़ पर करीब 25 रुपये का खर्चा आएगा। इसके अलावा 75 रुपये प्रति पेड़ निवेश होगा, जिसमें नीम की फली व अन्य जैव उर्वरक डालने को दिए जाएंगे। नया पेड़ तैयार होने पर पहले वर्ष में 25 से 30 किलो बेर उगेंगे। यदि किसी किसान ने 50 पेड़ की बडिंग करा ली तो उसे करीब 50 हजार रुपये की आमदनी होगी। योजनांतर्गत जिल के 15 हजार किसानों को लाभान्वित किया जाएगा। जंगली बेर की जमीन से ऊंचाई छह इंच होनी चाहिए। ऐसे पेड़ों को सबसे पहले छांटा जाएगा। जब पेड़ पर नए किल्ले आएंगे, तब उसमें बेर की बट बांधी जाएगी। एक पेड़ पर दो या तीन बट बांधी जाएंगी। पेड़ों की नई किस्म तैयार करने का काम इसी माह से आरंभ हो जाएगा। फरवरी में जंगली बेर की जगह नई किस्म के बेर आने लगेंगे।
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किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
पेड़ पर बट बांधने का प्रशिक्षण किसानों को दिया जाएगा। शुरुआत में विभाग का कर्मी पेड़ पर बट बांधने का काम करेगा।
डीबीटी से कृषक होंगे लाभान्वित
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनांतर्गत कृषकों को डीबीटी के माध्यम से लाभान्वित किया जाएगा। इसमें ड्रिप इरीगेशन पद्घति, पोर्टेबिल स्प्रिंकलर और लार्ज वाल्यूम योजना शामिल हैं। इसमें कृषकों को अनुदान प्रदान किया जाएगा। खास बात यह है कि कृषकों को योजना में शामिल होने से पहले आनलाइन पंजीयन कराना होगा। जिला उद्यान अधिकारी सुघर सिंह ने बताया कि आनलाइन पंजीयन के लिए कृषक के पास खतौनी, आधार कार्ड/वोटर कार्ड, बैंक खाते की छाया प्रति, लघु सीमांत कृषक के लिए 61 ख, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो होना आवश्यक है। पंजीयन में प्रथम आवक प्रथम पावक के सिद्धांत अपनाया जाएगा।
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