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स्वतंत्रता सेनानी मोतीलाल ने जिले में जगाई थी शिक्षा की अलख
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ललितपुर। उप्र एवं मप्र में स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाने वाले मोतीलाल अवस्थी ने जिले में शिक्षा की अलख जगाने का काम किया। उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय इंटर कॉलेज गुढा की स्थापना की और प्रथम प्रधानाचार्य भी बने। समूचा जनपद उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।
मोतीलाल अवस्थी का जन्म 11 जुलाई सन 1923 ई. को ग्राम गुढा में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए टीकमगढ़ चले गये। यहां पर स्वतंत्रता के लिए चल आंदोलन का असर उन पर पड़ा। महात्मा गांधी की प्रेरणा से वह मात्र 16 वर्ष की उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। सन 1939 ई. में थाना लुहारी आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। उस समय के आंदोलनकारियों में वह सबसे कम उम्र के थे। सन 1941 ई.में सबसे पहली बार जेल गए। स्वतंत्रता के विंध्य प्रदेश में ओरछा राज्य के अंतर्गत (वर्तमान मध्य प्रदेश) शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर पदस्थ हो गये। धीरे -धीरे पदोन्नति पाकर प्राचार्य पद पर टीकमगढ़ में कार्यरत रहे। उन्होंने सन 1957 में पैतृक ग्राम गुढा में शिक्षा की ज्योति जलाने के उद्देश्य से श्री मदन मोहन मालवीय जी के नाम से शिक्षण संस्था की स्थापना की। 16 जुलाई 1957 को स्वयं प्रथम प्रधानाचार्य के पद पर पदस्थ हुए। उनका सहयोग जानकी प्रसाद खरे ने किया था। इस संस्था को सन 1964 ई. में वित्तीय सहायता करवाया। सन 1966 ई. में हाईस्कूल की मान्यता कराई। वर्तमान में श्री मदन मोहन मालवीय इंटर कालेज गुढा का नाम जिले के साथ झांसी मंडल में उच्च कोटि की शिक्षण संस्था में गिना जाने लगा। 25 जनवरी 1968 को बुंदेलखंड की महान विभूति सदा- सदा के लिए धरती मां की गोद में सो गई। ग्राम गुढ़ा इंटर कॉलेज में उन्हें श्रद्धाजंलि देने वालों में प्रधानाचार्य मुकेश कुमार राय हरिश्चंद्र अवस्थी, प्रताप सिंह परिहार, लखन लाल गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
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मोतीलाल अवस्थी का जन्म 11 जुलाई सन 1923 ई. को ग्राम गुढा में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए टीकमगढ़ चले गये। यहां पर स्वतंत्रता के लिए चल आंदोलन का असर उन पर पड़ा। महात्मा गांधी की प्रेरणा से वह मात्र 16 वर्ष की उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। सन 1939 ई. में थाना लुहारी आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। उस समय के आंदोलनकारियों में वह सबसे कम उम्र के थे। सन 1941 ई.में सबसे पहली बार जेल गए। स्वतंत्रता के विंध्य प्रदेश में ओरछा राज्य के अंतर्गत (वर्तमान मध्य प्रदेश) शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर पदस्थ हो गये। धीरे -धीरे पदोन्नति पाकर प्राचार्य पद पर टीकमगढ़ में कार्यरत रहे। उन्होंने सन 1957 में पैतृक ग्राम गुढा में शिक्षा की ज्योति जलाने के उद्देश्य से श्री मदन मोहन मालवीय जी के नाम से शिक्षण संस्था की स्थापना की। 16 जुलाई 1957 को स्वयं प्रथम प्रधानाचार्य के पद पर पदस्थ हुए। उनका सहयोग जानकी प्रसाद खरे ने किया था। इस संस्था को सन 1964 ई. में वित्तीय सहायता करवाया। सन 1966 ई. में हाईस्कूल की मान्यता कराई। वर्तमान में श्री मदन मोहन मालवीय इंटर कालेज गुढा का नाम जिले के साथ झांसी मंडल में उच्च कोटि की शिक्षण संस्था में गिना जाने लगा। 25 जनवरी 1968 को बुंदेलखंड की महान विभूति सदा- सदा के लिए धरती मां की गोद में सो गई। ग्राम गुढ़ा इंटर कॉलेज में उन्हें श्रद्धाजंलि देने वालों में प्रधानाचार्य मुकेश कुमार राय हरिश्चंद्र अवस्थी, प्रताप सिंह परिहार, लखन लाल गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
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