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जिला पंचायत अध्यक्ष की पत्नी व पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष समेत चार पर धोखाधड़ी का मुकदमा

Fri, 08 Oct 2021 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 01:27 AM IST
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Four including the wife of the District Panchayat President and the former Municipal President, a case of fraud
ललितपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग में जमीन अधिग्रहीत करने के बाद भी उसे बेच दिया गया। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने जिला पंचायत अध्यक्ष की पत्नी व पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष समेत चार पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है।
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण झांसी के कार्यालय सहायक हेमंत राजपूत ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर बताया कि गायत्री प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा झांसी से ललितपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 बनाने, रखरखाव एवं संरक्षण के लिए नियुक्त किया गया है। इस राजमार्ग के लिए 10 मई 2005, एक मई 2006 एवं 20 नवंबर 2006 को आराजी संख्या 5415/4 का रकबा 0.142 हेक्टेयर स्थित जमीन बाहर हद व अंदर हद का अधिग्रहण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पक्ष में किया जा चुका है, जिसकी प्रतिकर राशि एक लाख 92 हजार 907 रुपये सभी सह काश्तकार हर सिंह पुत्र स्योलाल, मन्नूलाल पुत्र छत्ते, संतोष पुत्र छत्ते, प्रशांत नाबा पुत्र उद्देत द्वारा संरक्षिका रामदुलारी को वर्ष 2008 में ही दी जा चुकी है।
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इस प्रकार उक्त संपत्ति भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं भारत सरकार की है। इस जमीन को न तो कोई बेच सकता है और न कोई इस पर कब्जा कर सकता है। इसके बाद भी 21 अप्रैल 2010 को शहर के रैदासपुरा निवासी हर सिंह पुत्र स्योलाल, प्रीतम पुत्र छत्ते ने अन्य आराजी संख्या 5415/1 का रकबा 0.170 हेक्टेयर का भाग मोहल्ला नदीपुरा निवासी रमेश खटीक को रजिस्टर्ड बैनामा किया। इसके बाद रमेश खटीक ने उक्त जमीन को ग्राम मिर्चवारा निवासी रसरानी पत्नी कैलाश नारायण कुर्मी को बेच दी लेकिन उक्त दोनों रजिस्ट्री का दाखिल खारिज नहीं हुआ। इस अवैध रूप से क्रय-विक्रय की जांच जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी और उप निबंधक से कराई जिसमें स्पष्ट कहा गया कि उक्त आराजी संख्या 5415/1 का रकबा 0.170 हेक्टेयर में से 0.142 हेक्टेयर रकबा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के माध्यम से अधिग्रहीत किया जा चुका था। इसके बाद आराजी में से मात्र 0.028 हेक्टेयर रकबा ही शेष था, लेकिन रमेश खटीक द्वारा 0.028 हेक्टेयर के स्थान पर 0.042 हेक्टेयर आराजी का क्रय करना और विक्रेता हर सिंह व प्रीतम सिंह द्वारा विक्रय करना जालसाजी है। इसी प्रकार रसरानी द्वारा खातेदार में निहित वास्तविक रकबे से अधिक रकबे का अपने पक्ष में बैनामा कराना भी घोर आपराधिक कृत्य है। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने तहरीर के आधार पर चारों आरोपियों पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष रमेश खटीक, जिला पंचायत अध्यक्ष की पत्नी रसरानी, हर सिंह एवं प्रीतम के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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इस मामले में नेशनल हाईवे के अफसरों ने दो साल बाद दाखिल खारिज कराया था। जब जमीन खरीदी तब दाखिल खारिज नहीं हुआ था। इसी कारण अधिग्रहण का पता नहीं चल सका। इसमें मुख्य गलती हर सिंह की है जिसने अधिग्रहण के बारे में जानकारी नहीं दी। इस मामले में उनकी पत्नी की गलती नहीं है। वह इस मामले में कोर्ट में अपने साक्ष्य पेश करेंगे।- कैलाश नारायण निरंजन, अध्यक्ष जिला पंचायत
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