सपा नेता का दर्द छलका: तिलक यादव ने राजनीति से लिया संन्यास, बोले- आज की पार्टी के बारे में कुछ नहीं कहना
जेल से छूटने के बाद तिलक यादव ने कहा कि आज से सभी तरह के राजनैतिक कार्यों से अपने आपको मुक्त कर रहे हैं। वह किसी भी स्तर पर राजनैतिक कार्य नहीं करना चाहेंगे। वह समाजवादी पार्टी की सदस्यता से भी त्यागपत्र दे रहे हैं।
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सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फंसे सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष तिलक यादव शनिवार को जेल से छूटने के बाद पार्टी से आहत नजर आए, घर पहुंचने पर उनका दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने खून पसीने से मजबूत किया था, लेकिन आज पार्टी की जो स्थिति, गतिविधियां व नीतियां हैं उसके बारे में कुछ कहना नहीं चाहते हैं। वह अपने परिवार सहित राजनीति से संन्यास ले रहे हैं। जेल में रहने के दौरान आचार्य विद्यासागर के प्रवचनों से प्रेरित होकर वह सबसे क्षमा और सबको क्षमा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज से सभी तरह के राजनैतिक कार्यों से अपने आपको मुक्त कर रहा हूं। वह किसी भी स्तर पर राजनैतिक कार्य नहीं करना चाहेंगे। वह समाजवादी पार्टी की सदस्यता से भी त्यागपत्र दे रहे हैं। आज से वह पूरी तरह से गैर राजनैतिक व्यक्ति होकर समाज व अन्य लोगों से मिलते रहेंगे और उनके दुख-सुख में शामिल होंगे। उन्होंने साफ कहा कि वह अपने इंद्रप्रस्त परिवार को राजनीति से अलग करते हैं। मेरे शुभचिंतकों व अन्य को दुख होगा, लेकिन मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अब अधिक उम्र हो गई है। उन्होंने ब्राह्मण वर्ग से कहा कि उनकी बातों को गलत तरीके से सोशल मीडिया पर प्रचारित किया गया, यदि उनकी किसी बात पर उन्हें दुख पहुंचा हो तो उसके लिए वह क्षमा चाहते हैं।
पांच महीने पहले किशोरी ने सामूहिक दुष्कर्म की दर्ज कराई थी रिपोर्ट
गौरतलब है कि करीब पांच महीने पहले तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव व उनके भाईयों के अलावा बसपा जिलाध्यक्ष दीपक अहिरवार समेत 28 लोगों के खिलाफ किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस आरोप में सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष तिलक यादव, बसपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष दीपक अहिरवार सहित 16 लोग जेल में निरुद्ध थे। जमानत पर शनिवार को जेल से छूटने के बाद वह तिलक यादव ने जिले के अधिकारियों, न्यायालय पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह अपना बयान सोशल मीडिया पर लाइव किया था।