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पहले लाठियों से युद्ध करते हैं, फिर खेलते हैं होली

Wed, 04 Mar 2020 12:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2020 12:36 AM IST
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First of all fighting from lathi after that playing holi
ललितपुर। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से आई कबूतरा जाति जनपद में लट्ठमार होली खेलती है। यदि किसी को खून भी निकल गया तो कोई इससे दुश्मनी नहीं मानता। लेकिन, धीरे-धीरे शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ी तो उन्होंने लट्ठमार होली खेलना कम कर दिया। अब अस्सी प्रतिशत लोग होली पर शराब भी नहीं पीते हैं जो अपने आप में एक बड़ी मिसाल है। होलिका दहन करने से पहले पूजन की परंपरा है। पूजन में 55 प्रकार की मिठाई रखी जाती है। होली दहन के बाद गाना व बजाना होता है। इन गानों में राजस्थानी पुट रहता है।
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महाराणा प्रताप की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाली कबूतरा जाति अब गुमनामी की जिंदगी जीवनयापन कर रही है। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते कबूतरा जाति को रहने के लिए ग्राम चीरा व मऊमाफी में जमीन उपलब्ध कराई गई थी। वर्षों तक कबूतरा जाति ने अपने डेरे में पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया। इसमें लट्ठमार होली भी शामिल रही। ब्लाक जखौरा अंतर्गत ग्राम चीरा में होली पर्व पर लट्ठमार होली खेलते हैं। कुछ लोग हाथ में बांस की लाठी तो कुछ लोग बचाव के लिए ढाल हाथ में पहने रहते हैं। इस तरह स्े आपस में लाठियों से युद्ध करते हैं। जब तक खून न निकल आए, तब तक होली नहीं खेलते हैं।
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होली के दौरान यदि किसी को खून आ गया तो वे इसे दुश्मनी के रूप में नहीं लेते। यह परंपरा वर्षो से जीवित है।
लोगों में बैर भाव पनपने लगता है। इस वजह कई परंपराएं अब टूटने लगी हैं। पहले गांव में चौराहे पर रंग भरी टंकियां रखी जाती हैं, जो भी निकलता था, उस पर रंग डाला जाता था। अब रंग- गुलाल ही लोगों को लगाते हैं।
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- पुरुषोत्तम
आज से बीस- पच्चीस साल पहले होली पर्व पर शराब पीते थे, लेकिन अब शराब को हाथ भी नहीं लगाते हैं। गांव में अस्सी प्रतिशत लोग शराब नहीं पीते हैं। गोबर व कीचड़ की होली भी खेलना कम हो गया है।
- राजपाल
होली के मध्य में पताका बांधी जाती है। ऐसी मान्यता है कि होलिका दहन के दौरान जिस ओर पताका गिर जाती है, उस तरफ की फसल अच्छी होती है। डीजे की धुन पर नाच-गाना होता है।

- मुन्ना
होली दहन से पहले पूजा गांव के भुमिया (मुखिया) करते हैं या फिर पुरोहित द्वारा पूजा की जाती है। होली के दूसरे दिन भाई दूज मनाई जाती है। होली रंग पंचमी तक खेली जाती है।
- जैन सिंह
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