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विद्युत सब स्टेशन पर चार वर्ष से नहीं भरे गए अग्निशमन यंत्र
lalitpur
Updated Wed, 07 Dec 2016 12:49 AM IST
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अाग निराोध्ाक
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। विद्युत सब स्टेशनों में आग से बचाव के लिए विद्युत विभाग गंभीर नहीं है। अधिकांश विद्युत सब स्टेेशनों में खाली अग्निशमन यंत्र शोपीस बनकर रखे हुए हैं। शहर के ही विद्युत सब स्टेशन में चार वर्ष से खाली पड़े फायर एक्सटिंग्यूसर यंत्रों को नहीं भरवाया जा सका है। सब स्टेशन पर आग से बचाव को पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने से गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
जनपद में स्थापित 12 विद्युत सब स्टेशनों के माध्यम से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को विद्युत आपूर्ति प्रदान की जाती है। सभी विद्युत सब स्टेशनों को रोंड़ा व महरौनी 132 केवी सब स्टेशनों से 33 केवी की हाइटेंशन विद्युत लाइन से जोड़ा गया है और इन सब स्टेशनों में जनपद को बिजली आपूर्ति करने के लिए विभिन्न पांच, आठ व दस एमवीए तक की उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर भी स्थापित किए गए हैं। सब स्टेशनों के यार्ड में स्थापित इन विद्युत ट्रांसफार्मरों में सैकड़ों लीटर तेल भरा रहता है। कभी भी सब स्टेशनों में हाइटेंशन लाइनों, ट्रांसफार्मर व ओसीबी या वीसीबी मशीनों में फाल्ट के चलते आए दिन आग लगने की संभावना बनी रहती है। जबकि कई बार सब स्टेशनों पर स्थापित ट्रांसफार्मरों, मशीनों व अन्य उपकरणों की आग लगने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। सब स्टेशनों पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा निर्धारित नियमों के तहत आग से बचाव के लिए बजरी से भी पर्याप्त मात्रा में बाल्टियां व अग्निशमन यंत्र व अन्य प्रकार के साधन उपलब्ध होने चाहिए।
लेकिन जनपद में अधिकांश विद्युत सब स्टेशनों पर अग्निशमन यंत्र तो हैं, लेकिन या तो खाली हैं या फिर उन्हें कभी चलाने का अभ्यास भी नहीं किया जाता है। गल्ला मंडी विद्युत सब स्टेशन स्थित वर्कशॉप में चार वर्ष पूर्व आठ जून 2012 को लग गई थी, जिसके चलते यहां दर्जनों ड्रम तेल व पुराने ट्रांसफार्मर जलकर खाक हो गए थे। आग बुझाने में उस समय सब स्टेशन व स्टोर में रखे सभी अग्निशमन यंत्र खाली हो गए थे। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड की भी कई गाड़ियां को आग बुझाने में घंटों लग गए थे। ऐसे में वर्कशॉप में लाखों रुपये का सामान जल गया था। इसके बाद भी सब स्टेशन में आए दिन फाल्ट आदि के कारण निकली चिंगारियों से आग लगने का खतरा बना रहता है। जबकि कई बार ओसीबी मशीनों में भी आग लग चुकी है। इस सब के बाद भी विद्युत विभाग द्वारा सबक नहीं लिया और चार वर्ष पूर्व आग बुझाने में खाली हुए फायर एक्सटिंग्यूसर यह यंत्र अब तक तक नहीं भरवाए जा सके हैं। इसी प्रकार अन्य कई विद्युत सब स्टेशनों पर फायर एक्सटिंग्यूसर यंत्र खाली रखे हुए हैं या फिर यदि भरे भी रखे हैं, तो विद्युत कर्मियों को इन यंत्रों को चलाना तक नहीं आता है। सब स्टेशनों पर कई घटनाएं होने के बाद भी विद्युत विभाग सुरक्षा उपायों के प्रति गंभीर नजर नहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
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सब स्टेेशनों का इंचार्ज अवर अभियंता होते हैं। यदि कहीं अग्निशमन यंत्र खाली हैं तो इंचार्ज द्वारा डिमांड करने पर भरवाए जाएंगे और सब स्टेशनों पर अधिकांश सब स्टेशन ऑपरेशन पूर्व सैनिक हैं, जो यह यंत्र चलाने में प्रशिक्षित हैं।
गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत।
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जनपद में स्थापित 12 विद्युत सब स्टेशनों के माध्यम से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को विद्युत आपूर्ति प्रदान की जाती है। सभी विद्युत सब स्टेशनों को रोंड़ा व महरौनी 132 केवी सब स्टेशनों से 33 केवी की हाइटेंशन विद्युत लाइन से जोड़ा गया है और इन सब स्टेशनों में जनपद को बिजली आपूर्ति करने के लिए विभिन्न पांच, आठ व दस एमवीए तक की उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर भी स्थापित किए गए हैं। सब स्टेशनों के यार्ड में स्थापित इन विद्युत ट्रांसफार्मरों में सैकड़ों लीटर तेल भरा रहता है। कभी भी सब स्टेशनों में हाइटेंशन लाइनों, ट्रांसफार्मर व ओसीबी या वीसीबी मशीनों में फाल्ट के चलते आए दिन आग लगने की संभावना बनी रहती है। जबकि कई बार सब स्टेशनों पर स्थापित ट्रांसफार्मरों, मशीनों व अन्य उपकरणों की आग लगने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। सब स्टेशनों पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा निर्धारित नियमों के तहत आग से बचाव के लिए बजरी से भी पर्याप्त मात्रा में बाल्टियां व अग्निशमन यंत्र व अन्य प्रकार के साधन उपलब्ध होने चाहिए।
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लेकिन जनपद में अधिकांश विद्युत सब स्टेशनों पर अग्निशमन यंत्र तो हैं, लेकिन या तो खाली हैं या फिर उन्हें कभी चलाने का अभ्यास भी नहीं किया जाता है। गल्ला मंडी विद्युत सब स्टेशन स्थित वर्कशॉप में चार वर्ष पूर्व आठ जून 2012 को लग गई थी, जिसके चलते यहां दर्जनों ड्रम तेल व पुराने ट्रांसफार्मर जलकर खाक हो गए थे। आग बुझाने में उस समय सब स्टेशन व स्टोर में रखे सभी अग्निशमन यंत्र खाली हो गए थे। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड की भी कई गाड़ियां को आग बुझाने में घंटों लग गए थे। ऐसे में वर्कशॉप में लाखों रुपये का सामान जल गया था। इसके बाद भी सब स्टेशन में आए दिन फाल्ट आदि के कारण निकली चिंगारियों से आग लगने का खतरा बना रहता है। जबकि कई बार ओसीबी मशीनों में भी आग लग चुकी है। इस सब के बाद भी विद्युत विभाग द्वारा सबक नहीं लिया और चार वर्ष पूर्व आग बुझाने में खाली हुए फायर एक्सटिंग्यूसर यह यंत्र अब तक तक नहीं भरवाए जा सके हैं। इसी प्रकार अन्य कई विद्युत सब स्टेशनों पर फायर एक्सटिंग्यूसर यंत्र खाली रखे हुए हैं या फिर यदि भरे भी रखे हैं, तो विद्युत कर्मियों को इन यंत्रों को चलाना तक नहीं आता है। सब स्टेशनों पर कई घटनाएं होने के बाद भी विद्युत विभाग सुरक्षा उपायों के प्रति गंभीर नजर नहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
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सब स्टेेशनों का इंचार्ज अवर अभियंता होते हैं। यदि कहीं अग्निशमन यंत्र खाली हैं तो इंचार्ज द्वारा डिमांड करने पर भरवाए जाएंगे और सब स्टेशनों पर अधिकांश सब स्टेशन ऑपरेशन पूर्व सैनिक हैं, जो यह यंत्र चलाने में प्रशिक्षित हैं।
गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत।