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आपत्तिजनक मेसेज पर दर्ज होगी एफआईआर
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Tue, 30 Jun 2015 02:30 AM IST
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ललितपुर। सोशल साइट्स पर सामाजिक और धार्मिक उन्माद फैलाने वालों पर कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। पुलिस अधीक्षक ने सभी सरकारी विभागाध्यक्षों को पत्र भेजकर अधीनस्थों से कर्मचारी आचरण नियमावली 1955 का पालन करने को कहा है, अन्यथा की स्थिति में संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने की चेतावनी दी गई है।
पत्र में कहा गया है कि विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी जाने - अनजाने में सोशल मीडिया पर अनावश्यक, पद की गरिमा के विपरीत, अनैतिक टिप्पणी, फोटो, मेसेज पोस्ट कर देते हैं, जिससे आम जनता में तीव्र प्रतिक्रियाएं होती हैं। इससे कानून व्यवस्था की स्थित खराब होने लगती है, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों और शासन- प्रशासन के समक्ष भी असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इन परिस्थितियों में स्पष्टीकरण देना भी कठिन होता है। जबकि, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी नियमावली प्रभावी है, जिसके तहत इस तरह के कृत्य पर पूरी तरह पाबंदी है। सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम 2000 के अंतर्गत दण्ड की व्यवस्था की गई है। संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया जा सकता है। इसलिए सभी लोकसेवकों को राष्ट्र हित व समाज हित में सामाजिक व धार्मिक एकता बनाए रखना जरूरी है, अत: आपत्तिजनक फोटो, मेसेज आदि को सोशल मीडिया में पोस्ट नहीं करें।
इनका कहना है -
जनपद में कानून व्यवस्था कायम रखने के उद्देश्य से उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सभी सरकारी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर कर्मचारी आचरण नियमावली का पालन करने को कहा गया है। सोशल साइट्स पर सामाजिक और धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले सामने आने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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प्रभाकर चौधरी
पुलिस अधीक्षक, ललितपुर।
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पत्र में कहा गया है कि विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी जाने - अनजाने में सोशल मीडिया पर अनावश्यक, पद की गरिमा के विपरीत, अनैतिक टिप्पणी, फोटो, मेसेज पोस्ट कर देते हैं, जिससे आम जनता में तीव्र प्रतिक्रियाएं होती हैं। इससे कानून व्यवस्था की स्थित खराब होने लगती है, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों और शासन- प्रशासन के समक्ष भी असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इन परिस्थितियों में स्पष्टीकरण देना भी कठिन होता है। जबकि, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी नियमावली प्रभावी है, जिसके तहत इस तरह के कृत्य पर पूरी तरह पाबंदी है। सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम 2000 के अंतर्गत दण्ड की व्यवस्था की गई है। संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया जा सकता है। इसलिए सभी लोकसेवकों को राष्ट्र हित व समाज हित में सामाजिक व धार्मिक एकता बनाए रखना जरूरी है, अत: आपत्तिजनक फोटो, मेसेज आदि को सोशल मीडिया में पोस्ट नहीं करें।
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इनका कहना है -
जनपद में कानून व्यवस्था कायम रखने के उद्देश्य से उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सभी सरकारी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर कर्मचारी आचरण नियमावली का पालन करने को कहा गया है। सोशल साइट्स पर सामाजिक और धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले सामने आने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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प्रभाकर चौधरी
पुलिस अधीक्षक, ललितपुर।