{"_id":"6aad7a8ade3006b88305c762","slug":"farmers-daughter-shows-pm-the-chip-that-controls-heartbeat-lalitpur-news-c-131-1-sjhs1012-163434-2026-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: किसान की बेटी ने पीएम को दिखाई दिल की धड़कन संभालने वाली चिप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: किसान की बेटी ने पीएम को दिखाई दिल की धड़कन संभालने वाली चिप
विज्ञापन
ललितपुर। महरौनी तहसील के गांव पड़वां की किसान अरविंद जैन की बेटी आकांक्षा जैन ने ''''सेमीकॉन इंडिया-2026'''' में पीएम नरेंद्र मोदी को दिल की धड़कन संभालने वाली सेमीकंडक्टर पेसमेकर चिप दिखाई। नई दिल्ली के यशोभूमि में आईआईटी इंदौर की टीम के साथ प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने पहुंचीं आकांक्षा से प्रधानमंत्री ने चिप की विशेषताओं और उसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी ली। देश के बड़े तकनीकी मंच तक पहुंची आकांक्षा की इस उपलब्धि से ललितपुर का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर सामने आया है।
17 से 19 सितंबर तक आयोजित सेमीकॉन इंडिया के पांचवें संस्करण में दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, कंपनियों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। आयोजन का विषय ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक, इकोसिस्टम का निर्माण’ रहा। यहां चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़ी नई तकनीकों को प्रदर्शित किया गया।
इसी प्रतिष्ठित मंच पर आईआईटी इंदौर की टीम के साथ आकांक्षा को अपने प्रोजेक्ट के प्रदर्शन का अवसर मिला। आकांक्षा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनकी टीम द्वारा तैयार की जा रही सेमीकंडक्टर इम्प्लांटेबल पेसमेकर चिप के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने ‘चिप टू स्टार्टअप’ के माध्यम से इस तरह की तकनीक को आगे बढ़ाने और देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।
विज्ञापन
गांव से निकलकर चिप डिजाइनिंग तक पहुंचीं
आकांक्षा की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी शुरुआती पढ़ाई किसी बड़े शहर में नहीं, बल्कि महरौनी में हुई। किसान परिवार से आने वाली आकांक्षा ने जवाहर नवोदय विद्यालय से कक्षा छह से 12वीं तक पढ़ाई की। वर्ष 2014 में इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे अंकों से पास करने के बाद उन्होंने भोपाल के ओरिएंटल कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में वर्ष 2018 में बीटेक किया।
इसके बाद उन्होंने गेट परीक्षा उत्तीर्ण की और एसजीएसआईटीएस से माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं वीएलएसआई डिजाइन में वर्ष 2023 में एमटेक किया। पढ़ाई के साथ उन्होंने यूट्यूब पर गणित पढ़ाया और प्रेस्टीज कॉलेज में अध्यापन भी किया। वर्तमान में आकांक्षा आईआईटी इंदौर से वीएलएसआई डिजाइनिंग में पीएचडी कर रही हैं। उनका शोध हार्डवेयर एक्सीलेरेटर पर केंद्रित है। वह सरकार के ‘चिप टू स्टार्टअप’ प्रोजेक्ट से भी जुड़ी हैं, जिसके तहत इम्प्लांटेबल पेसमेकर चिप पर काम किया जा रहा है।
छोटी सी चिप, दिल की धड़कनों पर नजर
आकांक्षा ने बताया कि इम्प्लांटेबल पेसमेकर एक छोटा, बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे सर्जरी के माध्यम से शरीर में लगाया जाता है। इसका उद्देश्य हृदय की धड़कन को नियंत्रित और सामान्य बनाए रखने में मदद करना है, खासकर उन स्थितियों में जब हृदय की गति बहुत धीमी या अनियमित हो जाती है। सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में इस तरह के उपकरणों के लिए चिप डिजाइनिंग पर काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री से संवाद ने बढ़ाया उत्साह
आकांक्षा के लिए प्रधानमंत्री के सामने अपने प्रोजेक्ट की विशेषताएं बताना उनके अब तक के सफर का यादगार पड़ाव रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करने और उनसे प्रोत्साहन मिलने से उन्हें इस क्षेत्र में आगे काम करने की प्रेरणा मिली है। वह सेमीकंडक्टर चिप के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपना योगदान देना चाहती हैं। उनका कहना है कि छोटे शहर और गांव से निकलने वाले युवाओं के लिए संसाधनों की सीमाएं मंजिल तय नहीं करतीं।
परिवार में खुशी, जिले के लिए गौरव
आकांक्षा की उपलब्धि से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनके पिता अरविंद जैन किसान हैं और मां विनीता जैन गृहिणी हैं। दो भाइयों राहुल और रोहित के बीच आकांक्षा सबसे छोटी हैं। परिवार की बेटी का देश के सबसे बड़े तकनीकी मंचों में शामिल एक आयोजन में प्रधानमंत्री के सामने प्रोजेक्ट प्रस्तुत करना पूरे परिवार के लिए गौरव का क्षण है।
विज्ञापन
17 से 19 सितंबर तक आयोजित सेमीकॉन इंडिया के पांचवें संस्करण में दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, कंपनियों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। आयोजन का विषय ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक, इकोसिस्टम का निर्माण’ रहा। यहां चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़ी नई तकनीकों को प्रदर्शित किया गया।
विज्ञापन
इसी प्रतिष्ठित मंच पर आईआईटी इंदौर की टीम के साथ आकांक्षा को अपने प्रोजेक्ट के प्रदर्शन का अवसर मिला। आकांक्षा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनकी टीम द्वारा तैयार की जा रही सेमीकंडक्टर इम्प्लांटेबल पेसमेकर चिप के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने ‘चिप टू स्टार्टअप’ के माध्यम से इस तरह की तकनीक को आगे बढ़ाने और देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।
विज्ञापन
गांव से निकलकर चिप डिजाइनिंग तक पहुंचीं
आकांक्षा की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी शुरुआती पढ़ाई किसी बड़े शहर में नहीं, बल्कि महरौनी में हुई। किसान परिवार से आने वाली आकांक्षा ने जवाहर नवोदय विद्यालय से कक्षा छह से 12वीं तक पढ़ाई की। वर्ष 2014 में इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे अंकों से पास करने के बाद उन्होंने भोपाल के ओरिएंटल कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में वर्ष 2018 में बीटेक किया।
इसके बाद उन्होंने गेट परीक्षा उत्तीर्ण की और एसजीएसआईटीएस से माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं वीएलएसआई डिजाइन में वर्ष 2023 में एमटेक किया। पढ़ाई के साथ उन्होंने यूट्यूब पर गणित पढ़ाया और प्रेस्टीज कॉलेज में अध्यापन भी किया। वर्तमान में आकांक्षा आईआईटी इंदौर से वीएलएसआई डिजाइनिंग में पीएचडी कर रही हैं। उनका शोध हार्डवेयर एक्सीलेरेटर पर केंद्रित है। वह सरकार के ‘चिप टू स्टार्टअप’ प्रोजेक्ट से भी जुड़ी हैं, जिसके तहत इम्प्लांटेबल पेसमेकर चिप पर काम किया जा रहा है।
छोटी सी चिप, दिल की धड़कनों पर नजर
आकांक्षा ने बताया कि इम्प्लांटेबल पेसमेकर एक छोटा, बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे सर्जरी के माध्यम से शरीर में लगाया जाता है। इसका उद्देश्य हृदय की धड़कन को नियंत्रित और सामान्य बनाए रखने में मदद करना है, खासकर उन स्थितियों में जब हृदय की गति बहुत धीमी या अनियमित हो जाती है। सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में इस तरह के उपकरणों के लिए चिप डिजाइनिंग पर काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री से संवाद ने बढ़ाया उत्साह
आकांक्षा के लिए प्रधानमंत्री के सामने अपने प्रोजेक्ट की विशेषताएं बताना उनके अब तक के सफर का यादगार पड़ाव रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करने और उनसे प्रोत्साहन मिलने से उन्हें इस क्षेत्र में आगे काम करने की प्रेरणा मिली है। वह सेमीकंडक्टर चिप के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपना योगदान देना चाहती हैं। उनका कहना है कि छोटे शहर और गांव से निकलने वाले युवाओं के लिए संसाधनों की सीमाएं मंजिल तय नहीं करतीं।
परिवार में खुशी, जिले के लिए गौरव
आकांक्षा की उपलब्धि से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनके पिता अरविंद जैन किसान हैं और मां विनीता जैन गृहिणी हैं। दो भाइयों राहुल और रोहित के बीच आकांक्षा सबसे छोटी हैं। परिवार की बेटी का देश के सबसे बड़े तकनीकी मंचों में शामिल एक आयोजन में प्रधानमंत्री के सामने प्रोजेक्ट प्रस्तुत करना पूरे परिवार के लिए गौरव का क्षण है।