{"_id":"8dae16fbf4d80f7896bf57900f83938b","slug":"farmer-in-trouble-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राहत राशि न मिलने से परेशान अन्नदाता ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राहत राशि न मिलने से परेशान अन्नदाता
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Mon, 29 Jun 2015 12:50 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तालबेहट (ललितपुर)। प्राकृतिक आपदा में बर्बाद हुए तहसील के अधिकांश
विज्ञापन
किसानों के पास अभी तक राहत राशि न पहुंच पाने से वह काफी परेशान हैं। इस
बार राहत राशि न मिलने से किसानों की फसल बुवाई भी प्रभावित हो सकती है।
अधिकांश किसानों का मानना है कि बैंकों और साहूकारों का कर्जा न भर पाने के
चलते इस बार उन्हें फसल की बुवाई के समय पैसा मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।
क्षेत्र का किसान पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक आपदा को झेलता आ रहा है। हर बार अच्छी फसल की उम्मीद में किसानाें ने बैंकों एवं साहूकारों से उधार पैसा लेकर खेती में व्यय किया। इस बार भी अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानाें की फसलाें को बर्बाद कर दिया। बर्बाद फसलों को देखकर कुछ किसानाें ने आत्महत्या जैस कदम उठाने प्रारंभ कर दिए। इसके बाद जागी सरकारों ने किसानों को राहत राशि देने की घोषणा की, जिससे किसानाें को कुछ राहत मिली। परंतु राहत राशि का पैसा कच्छप गति से आने और उसी गति से वितरित होने से किसान काफी परेशान हैं।
कुछ गांवाें में राहत राशि का पैसा वितरित हो जाने और कुछ गांवों को छोड़ दिए जाने से किसान कई तरह के कयास लगा रहा है। किसानों का मानना है कि यदि राहत राशि का यह पैसा उसे फसल बुवाई के समय नहीं मिला तो फिर यह पैसा किसान के लिए कारगर साबित नहीं होगा। उनके अनुसार इसी पैसे का उपयोग वह अपनी अगली फसल में कर लेतें तो उन्हें साहूकारों और बैंकों के चक्कर नहीं लगाना पड़तें।
क्षेत्र का किसान पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक आपदा को झेलता आ रहा है। हर बार अच्छी फसल की उम्मीद में किसानाें ने बैंकों एवं साहूकारों से उधार पैसा लेकर खेती में व्यय किया। इस बार भी अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानाें की फसलाें को बर्बाद कर दिया। बर्बाद फसलों को देखकर कुछ किसानाें ने आत्महत्या जैस कदम उठाने प्रारंभ कर दिए। इसके बाद जागी सरकारों ने किसानों को राहत राशि देने की घोषणा की, जिससे किसानाें को कुछ राहत मिली। परंतु राहत राशि का पैसा कच्छप गति से आने और उसी गति से वितरित होने से किसान काफी परेशान हैं।
कुछ गांवाें में राहत राशि का पैसा वितरित हो जाने और कुछ गांवों को छोड़ दिए जाने से किसान कई तरह के कयास लगा रहा है। किसानों का मानना है कि यदि राहत राशि का यह पैसा उसे फसल बुवाई के समय नहीं मिला तो फिर यह पैसा किसान के लिए कारगर साबित नहीं होगा। उनके अनुसार इसी पैसे का उपयोग वह अपनी अगली फसल में कर लेतें तो उन्हें साहूकारों और बैंकों के चक्कर नहीं लगाना पड़तें।