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ठेकेदार का भुगतान रोका, जांच में गड़बड़ी मिली तो होगा मुकदमा
lalitpur
Updated Thu, 21 Jul 2016 01:10 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। एक बार फिर अमर उजाला की खबर ने असर दिखाया है। बुधवार को प्रकाशित खबर राहत किट में तेल का खेल को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी डा रूपेश कुमार ने पूरे मामले में जांच बैठा दी है। उनके निर्देश पर एसडीएम सदर रमेश चंद्र ने राहत सामग्री गोदाम पर जांच की। तेल का नमूना ले लिया गया है। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जांच पूरी होने तक ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
ग्राम अमरपुर में निर्माणाधीन मंडी में बने गोदाम में छापा मारकर एसडीएम सदर ने ग्रामीणों को बांटी जा रही सूखा राहत सामग्री की जांच की। इस दौरान गोदाम में मौजूद तेल के पैकेटों को खुलवाया गया। तेल की बोतलों पर स्पष्ट लिखा है कि बोतल के अंदर राइस ब्राउन ऑयल है। दिलचस्प यह है कि किट में सरसों का तेल का बांटा जाना था, लेकिन बांटे जाने वाले तेल में सरसों का तेल इंग्रीडेंस के तौर पर 30 फीसदी की मात्रा में शामिल है। बोतल में मुख्य राइस ब्राउन ऑयल है। एसडीएम सदर ने तेल का सैंपल जब्त कर लिया है और इसके साथ ही एक राहत सामग्री को किट को जब्त किया है। जब्त किए गए तेल की जांच होगी, जिसके बाद ही ठेकेदार का भुगतान किया जाएगा। डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने क्षेत्र में बंटने वाले तेल को वापिस कराएं। तेल वापसी के बाद सरसों का तेल बांटने पर नजर रखी जाए। जिलाधिकारी ने जांच पूरी होने तक ठेकेदार के भुगतान को रोक दिया है। जांच के बाद तेल में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
बुंदेलखंड में सूखा पड़ने के बाद अन्त्योदय परिवारों को राहत सामग्री किट का वितरण किया जा रहा है। पिछले तीन महीनों में हर बार टेंडर प्रक्रिया के जरिये ठेकेदारों द्वारा राहत सामग्री किट का वितरण किया जा रहा है। वर्तमान में बांटी जा रही किट में गरीब लोगों को सरसों के तेल की जगह पर मिलावटी तेल बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है। राहत सामग्री किट में तय नियमों के मुताबिक पांच लीटर सरसों का तेल बांटा जाना है। ठेकेदार द्वारा सरसों के तेल की जगह पर राइस ब्राउन आयल दिया जा रहा है। सरसों के तेल के मुकाबले राइस ब्राउन आयल प्रति लीटर चालीस रुपये तक सस्ता है। 1 लाख 20 हजार तेल की बोतल बांटा जा रहा है। इस प्रकार से एक महीने में 48 लाख रुपये तक फायदा हो रहा है।
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सूखा राहत सामग्री किट में बांटे जा रहे तेल को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। गोदाम से तेल का सैंपल जब्त किया गया है। इसको जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधितों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। जांच होने तक ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
- डॉ. रुपेश कुमार, डीएम
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ग्राम अमरपुर में निर्माणाधीन मंडी में बने गोदाम में छापा मारकर एसडीएम सदर ने ग्रामीणों को बांटी जा रही सूखा राहत सामग्री की जांच की। इस दौरान गोदाम में मौजूद तेल के पैकेटों को खुलवाया गया। तेल की बोतलों पर स्पष्ट लिखा है कि बोतल के अंदर राइस ब्राउन ऑयल है। दिलचस्प यह है कि किट में सरसों का तेल का बांटा जाना था, लेकिन बांटे जाने वाले तेल में सरसों का तेल इंग्रीडेंस के तौर पर 30 फीसदी की मात्रा में शामिल है। बोतल में मुख्य राइस ब्राउन ऑयल है। एसडीएम सदर ने तेल का सैंपल जब्त कर लिया है और इसके साथ ही एक राहत सामग्री को किट को जब्त किया है। जब्त किए गए तेल की जांच होगी, जिसके बाद ही ठेकेदार का भुगतान किया जाएगा। डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने क्षेत्र में बंटने वाले तेल को वापिस कराएं। तेल वापसी के बाद सरसों का तेल बांटने पर नजर रखी जाए। जिलाधिकारी ने जांच पूरी होने तक ठेकेदार के भुगतान को रोक दिया है। जांच के बाद तेल में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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बुंदेलखंड में सूखा पड़ने के बाद अन्त्योदय परिवारों को राहत सामग्री किट का वितरण किया जा रहा है। पिछले तीन महीनों में हर बार टेंडर प्रक्रिया के जरिये ठेकेदारों द्वारा राहत सामग्री किट का वितरण किया जा रहा है। वर्तमान में बांटी जा रही किट में गरीब लोगों को सरसों के तेल की जगह पर मिलावटी तेल बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है। राहत सामग्री किट में तय नियमों के मुताबिक पांच लीटर सरसों का तेल बांटा जाना है। ठेकेदार द्वारा सरसों के तेल की जगह पर राइस ब्राउन आयल दिया जा रहा है। सरसों के तेल के मुकाबले राइस ब्राउन आयल प्रति लीटर चालीस रुपये तक सस्ता है। 1 लाख 20 हजार तेल की बोतल बांटा जा रहा है। इस प्रकार से एक महीने में 48 लाख रुपये तक फायदा हो रहा है।
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सूखा राहत सामग्री किट में बांटे जा रहे तेल को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। गोदाम से तेल का सैंपल जब्त किया गया है। इसको जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधितों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। जांच होने तक ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
- डॉ. रुपेश कुमार, डीएम