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फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट : भर्ती प्रक्रिया में अभिलेखों की जांच करने वाली टीम से होगी पूछताछ, पुलिस ने तैयारी की शुरू

Tue, 23 Dec 2025 12:17 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Dec 2025 12:17 AM IST
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Fake cardiologist: The team responsible for verifying documents during the recruitment process will be questioned; police have begun preparations.
एनएचएम की भर्ती में गड़बड़ी की आशंका, पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में कूटरचित शैक्षिक व चिकित्सकीय डिग्रियां लगाकर तीन वर्षों तक कार्डियोलॉजिस्ट के पद पर कार्य करने वाले आरोपी अभिनव सिंह के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब वर्ष 2022 में स्वास्थ्य विभाग में भर्ती के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच करने वाली टीम से भी पुलिस पूछताछ करेगी। इसके लिए पुलिस ने तैयारी शुरू कर दी है।
पुलिस अब एनएचएम के तहत स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में कार्डियोलॉजी विभाग की पूरी भर्ती प्रक्रिया को जांच के दायरे में लेने की तैयारी कर रही है। इस दौरान अभिलेखों की जांच करने वाली समिति में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। पुलिस टीम समिति में शामिल अधिकारियों का विवरण जुटाने में लगी हुई है।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि अभिनव सिंह के खिलाफ वर्ष 1999 में कस्टम विभाग द्वारा भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लंबे समय तक फरार रहा और अमेरिका में रह रहे अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की शैक्षिक व चिकित्सकीय डिग्रियों की कूटरचना कर मथुरा के एक मेडिकल कॉलेज में नौकरी करता रहा।
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वर्ष 2019 में सीबीआई ने उसे मथुरा से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। न्यायालय से 16 माह की सजा और आठ लाख रुपये अर्थदंड भुगतने के बाद वह जुलाई 2020 में जेल से रिहा हुआ था।
जेल से रिहा होने के बाद एनएचएम के तहत जिले के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में कार्डियोलॉजी विभाग में संविदा भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें अभिनव सिंह ने अपनी बहन के पति डॉ. राजीव गुप्ता के प्रपत्रों का इस्तेमाल करते हुए अपनी फोटो और पहचान पत्र लगाकर आवेदन किया। चयन के बाद उसे सीसीयू यूनिट जिला अस्पताल में स्पेशलिस्ट के पद पर नियुक्ति मिल गई।
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तीन साल तक करता रहा इलाज, फिर हुआ भंडाफोड़
तीन वर्षों तक फर्जी तरीके से नौकरी करने के बाद बहन की शिकायत पर अभिनव सिंह का भंडाफोड़ हुआ। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो मामले में लगातार नए खुलासे होते गए। इसी के चलते अब भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और दस्तावेजों की भी गहन जांच की जा रही है।

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वीआईपी ड्यूटी तक करता रहा फर्जी डॉक्टर
फर्जी पहचान के सहारे अभिनव सिंह अस्पताल में डॉ. राजीव गुप्ता, एमडी मेडिसिन (हृदय रोग विशेषज्ञ) का बोर्ड लगाकर मरीजों का इलाज करता रहा। चिकित्सा संबंधी समुचित ज्ञान न होने के बावजूद उसने सैकड़ों मरीजों का उपचार किया। इतना ही नहीं, जिले में आने वाले वीआईपी की चिकित्सकीय ड्यूटियों का भी निर्वहन करता रहा, लेकिन इस दौरान किसी को उस पर संदेह नहीं हुआ।
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