{"_id":"494e209df8dff1787dd6941adb0b85d6","slug":"electronic-meters-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"काले मीटर के साथ बदले जा रहे इलेक्ट्रानिक मीटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काले मीटर के साथ बदले जा रहे इलेक्ट्रानिक मीटर
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Tue, 14 Jul 2015 12:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। विद्युत विभाग द्वारा शहर में पुराने खराब मीटर बदलने के नाम पर
विज्ञापन
घरों से बाहर लगे रनिंग विद्युत मीटर भी बदले जा रहे हैं। यही नहीं,
विद्युत मीटर बदलने पर बिना रसीद के चार्ज वसूला जा रहा है। ऐसे में दलाल
प्रवृति के लोगों का मीटर की आड़ में कमाई का जरिया बन गया है।
विद्युत विभाग द्वारा शहर में नए विद्युत संयोजनों और पुराने कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं के मीटर बदलने का कार्य कार्पोरेशन के निर्देश पर कार्यदाई संस्था व मीटर विभाग द्वारा कराया जा रहा है। शहर में नये संयोजनों पर करीब दो हजार नए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए जाने हैं, जबकि पुराने काले मीटरों के स्थान पर करीब 4,700 नए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए जाने हैं। मीटर नहीं बदले जाने के कारण विभाग को हर माह लाखों रुपये के राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही है। मीटर खराब होने या फिर मीटर नहीं लगे होने की स्थिति में विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को फिक्स्ड 155 यूनिट के बिल थमाये जा रहे हैं, जिससे कम खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अधिक धनराशि के बिल का भुगतान करना पड़ रहा है, जबकि अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं की खूब मौज है और उन्हें कम पैसे का भुगतान करना पड़ रहा है। इसके लिए विभाग ने सख्ती से मीटर लगाए जाने का निर्णय तो लिया है, लेकिन उपभोक्ताओं को मीटर लगाने के नाम पर खूब परेशान भी किया जा रहा है। जिन उपभोक्ताओं के मीटर सही हैं और हर माह मीटर रीडर द्वारा उनके घरों से बाहर लगे इन इलेक्ट्रॉनिक मीटरों से रीडिंग ली जा रही है, इसके बावजूद विभाग द्वारा ऐसे उपभोक्ताओं के मीटर बदलने का कार्य किया जा रहा है।
बहुत से उपभोक्ता तो ऐसे हैं, जिनके मीटर मुश्किल से आठ से 10 माह पूर्व ही बदले गए थे, उनके भी मीटर बदले जा रहे हैं। खास बात यह है कि मीटर बदलने के बाद उपभोक्ताओं को विभाग से मीटर बदलने का सीलिंग सर्टीफिकेट लेेने को महीनों भटकना पड़ता है। यहां तक कि मीटर बदलने वाले कर्मियों के पास विभाग द्वारा दिया गया कोई पहचान पत्र या फिर अन्य आईडी प्रूफ भी नहीं होता। साथ ही पुराने खराब मीटर बदलने के नाम पर बिना कोई रसीद के मीटर चार्ज भी वसूला जा रहा है। इसकी शिकायत तो कई बार उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत अधिकारियों से भी की गई, लेकिन कोई खास कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं।
बहुत से मीटर लगाने वालों ने तो अपने साथ दलाल किस्म के लोग भी साथ रख लिए हैं, जो उपभोक्ताओं के साथ खूब ठगी कर रहे हैं। इसके लिए विभाग को मीटर बदलने में पारदर्शिता बरतने के साथ विभागीय अधिकारियों की देखरेख में कार्य का जिम्मा सौंपना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं का मीटर बदलने के नाम पर शोषण न किया जा सके, लेकिन विभाग का ध्यान इस ओर नहीं है।
बहुत से स्थानों से रनिंग में चल रहे मीटरों को भी बदलने की शिकायतें मिली हैं, लेकिन जानकारी करने पर ऐसे स्थानों पर पूर्व में सेमी इलेक्ट्रानिक मीटर अथवा चाइना मीटर लगाए गए थे, जिनके स्थान पर अब वहां नए पूर्ण इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए जा रहे हैं। पूर्व में लगाए सेमी इलेक्ट्रॉनिक मीटर में काले मीटरों जैसी घिर्रियां लगी होती हैं, जिस वजह से यह मीटर बदले जा रहे हैं।
- अखिलेश कुमार वर्मा,
उपखंड अधिकारी, विद्युत वितरण खंड ललितपुर।
विद्युत विभाग द्वारा शहर में नए विद्युत संयोजनों और पुराने कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं के मीटर बदलने का कार्य कार्पोरेशन के निर्देश पर कार्यदाई संस्था व मीटर विभाग द्वारा कराया जा रहा है। शहर में नये संयोजनों पर करीब दो हजार नए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए जाने हैं, जबकि पुराने काले मीटरों के स्थान पर करीब 4,700 नए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए जाने हैं। मीटर नहीं बदले जाने के कारण विभाग को हर माह लाखों रुपये के राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही है। मीटर खराब होने या फिर मीटर नहीं लगे होने की स्थिति में विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को फिक्स्ड 155 यूनिट के बिल थमाये जा रहे हैं, जिससे कम खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अधिक धनराशि के बिल का भुगतान करना पड़ रहा है, जबकि अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं की खूब मौज है और उन्हें कम पैसे का भुगतान करना पड़ रहा है। इसके लिए विभाग ने सख्ती से मीटर लगाए जाने का निर्णय तो लिया है, लेकिन उपभोक्ताओं को मीटर लगाने के नाम पर खूब परेशान भी किया जा रहा है। जिन उपभोक्ताओं के मीटर सही हैं और हर माह मीटर रीडर द्वारा उनके घरों से बाहर लगे इन इलेक्ट्रॉनिक मीटरों से रीडिंग ली जा रही है, इसके बावजूद विभाग द्वारा ऐसे उपभोक्ताओं के मीटर बदलने का कार्य किया जा रहा है।
बहुत से उपभोक्ता तो ऐसे हैं, जिनके मीटर मुश्किल से आठ से 10 माह पूर्व ही बदले गए थे, उनके भी मीटर बदले जा रहे हैं। खास बात यह है कि मीटर बदलने के बाद उपभोक्ताओं को विभाग से मीटर बदलने का सीलिंग सर्टीफिकेट लेेने को महीनों भटकना पड़ता है। यहां तक कि मीटर बदलने वाले कर्मियों के पास विभाग द्वारा दिया गया कोई पहचान पत्र या फिर अन्य आईडी प्रूफ भी नहीं होता। साथ ही पुराने खराब मीटर बदलने के नाम पर बिना कोई रसीद के मीटर चार्ज भी वसूला जा रहा है। इसकी शिकायत तो कई बार उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत अधिकारियों से भी की गई, लेकिन कोई खास कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं।
बहुत से मीटर लगाने वालों ने तो अपने साथ दलाल किस्म के लोग भी साथ रख लिए हैं, जो उपभोक्ताओं के साथ खूब ठगी कर रहे हैं। इसके लिए विभाग को मीटर बदलने में पारदर्शिता बरतने के साथ विभागीय अधिकारियों की देखरेख में कार्य का जिम्मा सौंपना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं का मीटर बदलने के नाम पर शोषण न किया जा सके, लेकिन विभाग का ध्यान इस ओर नहीं है।
बहुत से स्थानों से रनिंग में चल रहे मीटरों को भी बदलने की शिकायतें मिली हैं, लेकिन जानकारी करने पर ऐसे स्थानों पर पूर्व में सेमी इलेक्ट्रानिक मीटर अथवा चाइना मीटर लगाए गए थे, जिनके स्थान पर अब वहां नए पूर्ण इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए जा रहे हैं। पूर्व में लगाए सेमी इलेक्ट्रॉनिक मीटर में काले मीटरों जैसी घिर्रियां लगी होती हैं, जिस वजह से यह मीटर बदले जा रहे हैं।
- अखिलेश कुमार वर्मा,
उपखंड अधिकारी, विद्युत वितरण खंड ललितपुर।