{"_id":"b6d65e1cd6ccc26e75f7d261f62db4e0","slug":"dso-office-sdm-raids-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएसओ कार्यालय में एसडीएम का छापा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएसओ कार्यालय में एसडीएम का छापा
ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2016 01:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद गड़बड़ियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन पत्र भी पैसे लेकर बांटे जा रहे हैं।
इसकी शिकायत मिलने पर डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने छापा मारा, जिसमें तमाम गड़बड़ियां उजागर हुईं। फार्म बांट रहा लिपिक मौके से भाग गया। एसडीएम ने रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू हो गया है। इसके तहत पात्रों को दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल कोटेदारों के माध्यम से बांटे जा रहे हैं। लेकिन, कार्ड बनाने में मनमानी बरती गई है, जिससे बहुत से लोगों के कार्ड नहीं बने हैं। स्थिति यह है कि 2.22 लाख राशन कार्ड धारकों की तुलना में महज 1.97 लाख लोगों के ही कार्ड बन पाए हैं। इससे लोग परेशान हैं।
विज्ञापन
बाकी लोगों के कार्ड बन जाएं, इसके लिए जिला पूर्ति कार्यालय से आवेदन पत्र बांटे जा रहे हैं। इसको लेकर सोमवार को कार्यालय से आवेदन पत्र लेने वालों की काफी भीड़ थी। आवेदन नि:शुल्क बांटे जाने चाहिए, लेकिन पैसे लेकर आवेदन बांटे जा रहे थे। कर्मचारियों का तर्क था कि आवेदन की फोटो कापी कराने में पैसा खर्च हो रहा है।
लेकिन, मामले की शिकायत डीएम डा. रूपेश कुमार से की गई। बड़ी संख्या में महिलाएं शिकायत लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में पहुंची। इस पर डीएम ने एसडीएम प्रियंका सिंह को जांच करने के निर्देश दिए। दिन में करीब डेढ़ बजे एसडीएम जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय पर पहुंची। वहां पर बड़ी संख्या में आवेदन लेने के लिए लोगों की भीड़ जमा थी। काउंटर पर बैठा कर्मचारी दस रुपये, किसी से पांच रुपये लेकर लोगों को आवेदन दे रहा था।
एसडीएम को देख कर वह लिपिक काउंटर छोड़कर भाग खड़ा हुआ। एस पर एसडीएम ने आवेदन ले रही महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने भी आवेदन के बदले पैसा लिए जाने की पुष्टि की। कार्यालय पर कहीं पर लिखा भी नहीं था कि आवेदन नि:शुल्क जमा किए जा रहे हैं। साथ ही लिपिक आवेदन पत्र जमा करने के बाद रिसीविंग भी नहीं दे रहा था। एसडीएम ने पूरे मामले की रिपोर्ट ली और मौके की फोटोग्राफी कराई। इसके बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है।
कमाई का कारोबार
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के आवेदन कमाई का कारोबार बन गए हैं। इसके लिए आवेदक को कम से कम 25 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। क्योंकि, पहले तो आवेदन पैसा खर्च कर खरीदना पड़ रहा है। इसके बाद महिलाएं ज्यादातर अनपढ़ होने के कारण आवेदन पत्र भरवाने के नाम पर उनका 20 रुपये खर्च हो रहा है। इसको लेकर अच्छी-खासी भीड़ लग रही है।
विज्ञापन
इसकी शिकायत मिलने पर डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने छापा मारा, जिसमें तमाम गड़बड़ियां उजागर हुईं। फार्म बांट रहा लिपिक मौके से भाग गया। एसडीएम ने रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है।
विज्ञापन
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू हो गया है। इसके तहत पात्रों को दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल कोटेदारों के माध्यम से बांटे जा रहे हैं। लेकिन, कार्ड बनाने में मनमानी बरती गई है, जिससे बहुत से लोगों के कार्ड नहीं बने हैं। स्थिति यह है कि 2.22 लाख राशन कार्ड धारकों की तुलना में महज 1.97 लाख लोगों के ही कार्ड बन पाए हैं। इससे लोग परेशान हैं।
विज्ञापन
बाकी लोगों के कार्ड बन जाएं, इसके लिए जिला पूर्ति कार्यालय से आवेदन पत्र बांटे जा रहे हैं। इसको लेकर सोमवार को कार्यालय से आवेदन पत्र लेने वालों की काफी भीड़ थी। आवेदन नि:शुल्क बांटे जाने चाहिए, लेकिन पैसे लेकर आवेदन बांटे जा रहे थे। कर्मचारियों का तर्क था कि आवेदन की फोटो कापी कराने में पैसा खर्च हो रहा है।
लेकिन, मामले की शिकायत डीएम डा. रूपेश कुमार से की गई। बड़ी संख्या में महिलाएं शिकायत लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में पहुंची। इस पर डीएम ने एसडीएम प्रियंका सिंह को जांच करने के निर्देश दिए। दिन में करीब डेढ़ बजे एसडीएम जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय पर पहुंची। वहां पर बड़ी संख्या में आवेदन लेने के लिए लोगों की भीड़ जमा थी। काउंटर पर बैठा कर्मचारी दस रुपये, किसी से पांच रुपये लेकर लोगों को आवेदन दे रहा था।
एसडीएम को देख कर वह लिपिक काउंटर छोड़कर भाग खड़ा हुआ। एस पर एसडीएम ने आवेदन ले रही महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने भी आवेदन के बदले पैसा लिए जाने की पुष्टि की। कार्यालय पर कहीं पर लिखा भी नहीं था कि आवेदन नि:शुल्क जमा किए जा रहे हैं। साथ ही लिपिक आवेदन पत्र जमा करने के बाद रिसीविंग भी नहीं दे रहा था। एसडीएम ने पूरे मामले की रिपोर्ट ली और मौके की फोटोग्राफी कराई। इसके बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है।
कमाई का कारोबार
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के आवेदन कमाई का कारोबार बन गए हैं। इसके लिए आवेदक को कम से कम 25 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। क्योंकि, पहले तो आवेदन पैसा खर्च कर खरीदना पड़ रहा है। इसके बाद महिलाएं ज्यादातर अनपढ़ होने के कारण आवेदन पत्र भरवाने के नाम पर उनका 20 रुपये खर्च हो रहा है। इसको लेकर अच्छी-खासी भीड़ लग रही है।