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Lalitpur News: कुत्ते दे रहे अब ज्यादा गहरे जख्म, एआरबी के साथ लगाई जा रही एआरएस वैक्सीन

Sun, 21 Sep 2025 01:55 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 01:55 AM IST
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Dogs are now inflicting deeper wounds, and the ARS vaccine is being administered alongside the ARB.
- तीन माह में लगे 46 लोगों को एआरएस, एक सेंटीमीटर से अधिक घाव वालों को लगाया जाता है यह इंजेक्शन
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कुत्तों के हमले अब खरोंच व दांत लगने तक सीमित नहीं है, वर्तमान में कुछ मामले ऐसे आए हैं, जहां पर काटकर मांस तक नोंच लिया है। ऐसे में अब एंटी रैबीज वैक्सीन के बजाय एंटी रैबीज सीरम की जरूरत बढ़ती जा रही है। शासन ने जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में एआरएस मुहैया कराई जा रही है। ताकि पीड़ितों को समय से लाभ मिल सके। पूर्व में जिले से इस वैक्सीन के लिए मरीजों को झांसी रेफर किया जाता था, साथ ही बाजार में इसकी कीमत करीब 15 से 18 हजार रुपये हैं। लेकिन अब मेडिकल कॉलेज में यह वैक्सीन लगना प्रारंभ हो गई है।
जिले में कुत्ते काटने की मरीजों की संख्या काफी अधिक है, जिला चिकित्सालय में प्रतिमाह करीब 40 से 45 मरीज आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश मरीज गंभीर घायल पहुंच रहे हैं। पूर्व में गंभीर मरीजों को झांसी रिफर किया जाता था, क्योंकि जिला मुख्यालय पर एआरएस लगाने की सुविधा नहीं थी। प्राइवेट में यह इंजेक्शन काफी महंगा पड़ता था। लेकिन अब यह सुविधा मेडिकल कॉलेज में प्रारंभ हो गई है, विगत जुलाई में 22 व अगस्त में 20 मरीजों को यह इंजेक्शन लगाया जा चुका है। इस माह में चार इंजेक्शन लगाए गए हैं। यह इंजेक्शन एक सेंटीमीटर से अधिक घाव होने पर लगाया जाता है। इसे कुत्ता काटने के 24 घंटे के भीतर लगाना होता है। इसके बाद एआरबी लगाए जाते हैं। इससे शरीर में विषाणु फैलने की संभावना न के बराबर हो जाती है। इसकी डोज वजन के हिसाब से लगाई जाती है।
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कुत्ता काटे तो इन बातों का रखें ध्यान
- साफ कपड़े से रक्तस्राव रोकने का प्रयास करें, तुरंत चिकित्सक मिलें।
- एआरबी या एआरएस लगाएं
- घरेलू उपचार लाल मिर्च, कच्चा दूध पीने आदि के चक्कर में न पड़ें, वैक्सीन ही इसका इलाज है।
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मेडिकल कॉलेज में एआएस इंजेक्शन मौजूद है, कुत्ते से गंभीर घायलों को यह लगाया जाता है। विगत तीन माह में 46 मरीजों को यह लगाए जा चुके हैं। इसकी डोज मरीज के वजन के हिसाब से होती है। आधी डोज घाव वाले स्थान पर आधी डोज कमर में लगाई जाती है। इसके बाद एआरबी की डोज लगाई जाती है।
डॉ. विशाल जैन, मीडिया प्रभारी मेडिकल कॉलेज
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