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डीएम ने जीआईसी प्रधानाचार्य व परीक्षा प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की
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- फोटो : gov office.jpg
ललितपुर। राजकीय इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट के 877 छात्रों की अंकतालिकाओं में अंकों का डाटा बोर्ड को न भेजने के मामले में प्रधानाचार्य व परीक्षा प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
कोरोना संक्रमण के चलते इस साल हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षाएं नहीं हो पाई थीं। बोर्ड ने परीक्षा परिणाम जारी करने से पहले सभी कॉलेजों से परीक्षार्थियों के हाईस्कूल व कक्षा 11 के अंकतालिकाओं का डाटा मांगा था, जिससे औसत निकाल कर परिणाम घोषित किया जा सके। आरोप है कि जीआईसी से यह डाटा फीड नहीं किया गया, इसी वजह से कॉलेज के छात्रों का परीक्षा परिणाम तो आया लेकिन अंकतालिकाओं में नंबर दर्ज नहीं हो सके। नतीजतन स्नातक कक्षाओं में प्रवेश न हो पाने से परेशान छात्रों ने कॉलेज प्रधानाचार्य से लेकर अफसरों तक ज्ञापन के माध्यम से गुहार लगाई लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसी मामले को लेकर पिछले हफ्ते खूब बवाल भी हुआ था।
छात्र इसके लिए कॉलेज स्टाफ की चूक बता रहे हैं, उनका कहना है कि यदि उन लोगों की पूर्व में हुई परीक्षाओं का डाटा बोर्ड को भेज दिया गया होता तो आज यह दिक्कत नहीं आती। इस मामले को डीएम ने भी गंभीरता से लिया है। रविवार को पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाह के सामने जब यह मामला उठा तो वहां मौजूद डीएम अन्नावि दिनेश कुमार ने कहा कि इस मामले में कॉलेज प्रधानाचार्य व परीक्षा प्रभारी की लापरवाही सामने आने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही दोनों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
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कोरोना संक्रमण के चलते इस साल हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षाएं नहीं हो पाई थीं। बोर्ड ने परीक्षा परिणाम जारी करने से पहले सभी कॉलेजों से परीक्षार्थियों के हाईस्कूल व कक्षा 11 के अंकतालिकाओं का डाटा मांगा था, जिससे औसत निकाल कर परिणाम घोषित किया जा सके। आरोप है कि जीआईसी से यह डाटा फीड नहीं किया गया, इसी वजह से कॉलेज के छात्रों का परीक्षा परिणाम तो आया लेकिन अंकतालिकाओं में नंबर दर्ज नहीं हो सके। नतीजतन स्नातक कक्षाओं में प्रवेश न हो पाने से परेशान छात्रों ने कॉलेज प्रधानाचार्य से लेकर अफसरों तक ज्ञापन के माध्यम से गुहार लगाई लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसी मामले को लेकर पिछले हफ्ते खूब बवाल भी हुआ था।
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छात्र इसके लिए कॉलेज स्टाफ की चूक बता रहे हैं, उनका कहना है कि यदि उन लोगों की पूर्व में हुई परीक्षाओं का डाटा बोर्ड को भेज दिया गया होता तो आज यह दिक्कत नहीं आती। इस मामले को डीएम ने भी गंभीरता से लिया है। रविवार को पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाह के सामने जब यह मामला उठा तो वहां मौजूद डीएम अन्नावि दिनेश कुमार ने कहा कि इस मामले में कॉलेज प्रधानाचार्य व परीक्षा प्रभारी की लापरवाही सामने आने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही दोनों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
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