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दिव्यांगों को नहीं मिल पा रही है शिक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Sep 2016 01:03 AM IST
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school, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। शारीरिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से संचालित समेकित शिक्षा एक शिक्षिका के भरोसे होकर रह गई है, जिससे कार्यक्रम को गति नहीं मिल पा रही है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान अंतर्गत दृष्टिबाधित एवं श्रवणबाधित विद्यार्थियों के लिए समेकित शिक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत चिह्नित छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ नि:शुल्क यूनिफार्म, पुस्तकें, स्टेशनरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मेडिकल कैंप का आयोजन किया जाता है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में करीब 85 विद्यार्थी नामांकित हैं। राजकीय बालिका इंटर कालेज में दो दृष्टिबाधित एवं छह श्रवणबाधित छात्राएं चिह्नित हुई हैं।
इधर, कार्यक्रम प्रभारी रितु गुप्ता ने बताया कि इसमें सभी दिव्यांगों को लाभान्वित करने के लिए आवश्यक सूचनाएं निर्धारित प्रारूप पर एकत्रित की जा रही हैं। इन छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजुकेटर की व्यवस्था की गई है। एजुकेटर रोहिणी मिश्रा को श्रवणबाधित छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की जिम्मेदारी दी गई है जबकि दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के लिए कोई स्पेशल एजुकेटर तैनात नहीं हैं।
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बीते महीनों में ब्लाक तालबेहट में एक शिक्षिका की तैनाती हुई थी लेकिन, वह भी वेतन के अभाव में नौकरी छोड़ चुकी हैं, जिससे दूरदराज के विद्यालयों में अध्ययनरत दृष्टि एवं श्रवणबाधित विद्यार्थियों की शिक्षा भगवान भरोसे हो गई है। उधर, स्पेशल एजुकेटर रोहणी मिश्रा का कहना है कि नगर के विद्यालय ही कवर कर पाते हैं। इस स्थिति में समेकित शिक्षा के क्रियान्वयन का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
मालूम हो कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत समेकित शिक्षा संचालित हैं, जिसमें कक्षा आठ तक के बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती है। खास बात यह है कि यहां समेकित शिक्षा में न केवल आवासीय कैंप आयोजित किया जाता है बल्कि दृष्टिबाधित एवं श्रवणबाधित के कई शिक्षक तैनात हैं। जबकि माध्यमिक शिक्षा में ऐसा नहीं किया गया है। यही कारण है कि समेकित शिक्षा हिचकोले खा रही हैं।
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राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान अंतर्गत दृष्टिबाधित एवं श्रवणबाधित विद्यार्थियों के लिए समेकित शिक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत चिह्नित छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ नि:शुल्क यूनिफार्म, पुस्तकें, स्टेशनरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मेडिकल कैंप का आयोजन किया जाता है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में करीब 85 विद्यार्थी नामांकित हैं। राजकीय बालिका इंटर कालेज में दो दृष्टिबाधित एवं छह श्रवणबाधित छात्राएं चिह्नित हुई हैं।
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इधर, कार्यक्रम प्रभारी रितु गुप्ता ने बताया कि इसमें सभी दिव्यांगों को लाभान्वित करने के लिए आवश्यक सूचनाएं निर्धारित प्रारूप पर एकत्रित की जा रही हैं। इन छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजुकेटर की व्यवस्था की गई है। एजुकेटर रोहिणी मिश्रा को श्रवणबाधित छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की जिम्मेदारी दी गई है जबकि दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के लिए कोई स्पेशल एजुकेटर तैनात नहीं हैं।
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बीते महीनों में ब्लाक तालबेहट में एक शिक्षिका की तैनाती हुई थी लेकिन, वह भी वेतन के अभाव में नौकरी छोड़ चुकी हैं, जिससे दूरदराज के विद्यालयों में अध्ययनरत दृष्टि एवं श्रवणबाधित विद्यार्थियों की शिक्षा भगवान भरोसे हो गई है। उधर, स्पेशल एजुकेटर रोहणी मिश्रा का कहना है कि नगर के विद्यालय ही कवर कर पाते हैं। इस स्थिति में समेकित शिक्षा के क्रियान्वयन का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
मालूम हो कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत समेकित शिक्षा संचालित हैं, जिसमें कक्षा आठ तक के बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती है। खास बात यह है कि यहां समेकित शिक्षा में न केवल आवासीय कैंप आयोजित किया जाता है बल्कि दृष्टिबाधित एवं श्रवणबाधित के कई शिक्षक तैनात हैं। जबकि माध्यमिक शिक्षा में ऐसा नहीं किया गया है। यही कारण है कि समेकित शिक्षा हिचकोले खा रही हैं।