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जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं ठप, बिन इलाज तड़पे मरीज

Sat, 10 Sep 2016 01:37 AM IST
Lalitpur
Lalitpur Updated Sat, 10 Sep 2016 01:37 AM IST
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District hospital health services stalled , bin Tdpe patient treatment
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं ठप, बिन इलाज तड़पे मरीज - फोटो : Amar Ujala
ललितपुर। जिला पुरुष एवं महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं। प्रसूताओं को झांसी रिफर किया जा रहा है तो भर्ती शिशुओं की छुट्टी कर दी गई है। दरअसल उप्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले संविदा कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर पांच सितंबर से हड़ताल पर चले गए हैं। पांचवें दिन शुक्रवार को जनपद की नर्स, फार्मासिस्ट, स्वास्थ्य कर्मचारी, आशा बहुएं एवं आशा संगिनियां और संविदा एएनएम संघ हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इससे शहरी व ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाएं डगमगा गई हैं। शुक्रवार को पहले से भर्ती मरीज इलाज के लिए तड़पते रहे। वहीं, उपचार कराने आए नए मरीजों को टरका दिया गया। इससे तीमारदार मरीजों को लेकर भटकते रहे। जिला अस्पताल के सीएमएस ने सेवाएं सुचारू करने के लिए सीएमओ को पत्र लिखकर नर्स क ा कार्य करने के लिए एएनएम की सेवाएं मांगी हैं।
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एसएनसीयू वार्ड बंद, प्रसव केस झांसी रेफर  
महिला जिला अस्पताल में 17 पदों के सापेक्ष केवल चार ही स्टाफ नर्स हैं, इनमें से दो नर्सों को प्रभारी सिस्टर बना दिया गया है। रिक्त पदों के सापेक्ष 13 संविदा स्टाफ नर्स तैनात हैं, जो अब हड़ताल पर चली गई हैं। चौबीस घंटों की सेवा में कर्मचारियों की तीन शिफ्टों में ड्यूटी होती है। इस दौरान तैनात रहने वाली चौदह नर्सों में सिर्फ  दो नर्स ही स्थाई हैं। बाकी संविदा नर्स हड़ताल पर चली गई हैं। इससे प्रसव सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। महिला चिकित्सक प्रसव कराने से कतरा रही हैं। गंभीर केसों को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। वहीं, एसएनसीयू वार्ड में तैनात सभी आठ नर्स संविदा पर हैं। उनके हड़ताल पर जाने से सेवाएं ठप हो गई हैं। शुक्रवार तक एसएनसीयू में नौ शिशुओं का इलाज चल रहा था। अब उनकी छुट्टी कर परिजनों को सौंप दिया गया है।
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जिला अस्पताल की अन्य सेवाएं भी पड़ी ठप
हड़ताल का असर जिला अस्पताल पुरुष की विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है। वहीं, ब्लड बैंक में भी केवल आपातकालीन सुविधाएं ही मुहैया कराई जा रही हैं। जिला अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए पांच वार्ड हैं। इन वार्डों में तीन शिफ्टों में ड्यूटी के लिए कम से कम पंद्रह स्टाफ नर्सों में अब सिर्फ  चार स्थाई नर्स ही बची हैं। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी असर पड़ा है। मरीजों को समय से उपचार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं, एनसीडी सेल की पूरी सेवाएं संविदा कर्मियों के भरोसे होने पर यहां भी ताला पड़ गया है। इससे मरीजों को फिजियोथेरिपी, शुगर की जांच व अन्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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वर्जन
स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू करने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। सीएमओ को पत्र भेजकर स्टाफ नर्स का कार्य करने के लिए कुछ एएनएम से सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
- डॉ. एसके वासवानी सीएमएस, जिला अस्पताल



संविदा कर्मी बोले, हमें चाहिए जॉब सिक्योरिटी
विगत पांच सितंबर से जिला मुख्यालय पर स्थित सीएमओ कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे समस्त संविदा कर्मचारियों की छह सूत्रीय मांगें हैं। सबसे महत्वपूर्ण मांग जॉब सिक्योरिटी की है। इसमें उन्होंने नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति होने के उपरांत कार्यरत संविदा कर्मी को निकाला न जाए। नियमित नियुक्तियों में संविदा कर्मचारियों को वरीयता पर नियमित करना तथा जो पद सृजित नहीं हैं उन्हेें सृजित कर समायोजित किया जाए। अगस्त 2013 में प्रदेश शासन द्वारा घोषित रिजवी कमेटी की संस्तुतियों को जल्द लागू किया जाए। आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त कर्मियों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित करना एवं भविष्य में आउट सोर्सिंग भर्ती पर रोक लगाना। आशा बहुओं को निश्चित मानेदय व राज्य कर्मचारियों का दर्जा देना और एक्सरे टेक्नीशियन एवं एमपीडब्लू कर्मचारियों की सेवाएं बहाली की मांग शामिल है। प्रदर्शन के दौरान मंडल महामंत्री नीरज दुबे, डॉ. रोहित सहाय, नितिन जैन, आशा यादव, जेके सिंह, संतोष निरंजन, लक्ष्मीप्रसाद यादव, शिवनारायण वर्मा, हरीश तिवारी, सीताराम निरंजन, प्रियंका तिवारी, ऋजु दुवे, प्रियंका आनंद, सौरभ देवलिया, अमित तिवारी, मनीष पटवारी, प्रमोद शर्मा, दीपक जैन, पवन कुमार, अंजना चौबे, धर्मेंद्र राठौर आदि उपस्थित रहे।


डॉक्टरों ने कहा प्रसव नहीं हो सकता
अपने साले विनोद की पत्नी विनीता का प्रसव कराने आया था, लेकिन डाक्टरों ने उसका बिना उपचार किए मेडिकल कॉलेज झांसी रिफर कर दिया है। डॉक्टर ने कहा कि स्टाफ नहीं हैं और मरीज में रक्त की कमी है, इसलिए प्रसव नहीं हो सकता है।

ओमप्रकाश, तीमारदार, निवासी मुहल्ला चौबयाना

भर्ती करने से हाथ खड़े किए
पत्नी सपना का प्रसव कराने आया था, लेकिन डॉक्टर यह कहकर झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है कि अस्पताल में स्टाफ की कमी है और पहला प्रसव होने के कारण यहां प्रसव नहीं हो सकता है।
- राजकुुमार, निवासी ग्राम आलापुर
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