{"_id":"65d8f32cf306b502d00abab4","slug":"district-hospital-doctors-are-giving-consultation-on-prescriptionprescribing-medicines-from-outside-lalitpur-news-c-131-1-ltp1004-110817-2024-02-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल: डॉक्टर पर्चे पर दे रहे परामर्श...दवाएं लिख रहे बाहर की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल: डॉक्टर पर्चे पर दे रहे परामर्श...दवाएं लिख रहे बाहर की
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मरीजों को एक रुपये के पर्चे पर परामर्श भले ही मिल रहा हो, लेकिन उन्हें 500 से 1000 रुपये तक की दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। चिकित्सक एलर्जी, पेट दर्द, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य सामान्य रोग की दवाएं भी बाहर से लिख रहे हैं। मरीजों का कहना है कि कुछ चिकित्सक पर्चे के साथ एक छोटी पर्ची पकड़ा रहे हैं तो कुछ सरकारी पर्चा पर ही दवाइयां लिख रहे हैं। कई निर्धन मरीज बिना दवाइयों के ही वापस हो रहे हैं।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) से संबद्ध जिला अस्पताल में लगभग 700 से 800 मरीज प्रतिदिन आते हैं। इनमें अधिकांश निर्धन तबके के होते हैं। ये मरीज किसी तरह भाड़े का इंतजाम कर अस्पताल तो आ जाते हैं, लेकिन उन्हें चिकित्सक बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। कुछ चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवाइयां खरीदने के लिए कहते हैं। जब मरीज अस्पताल में मौजूद दवाइयां व जेनरिक दवाएं लिखने की बात करते हैं तो असरदार नहीं होने का हवाला देकर टाल देते हैं, और कहते हैं कि जल्द स्वस्थ होने के लिए बाहर की दवाइयां ही ठीक हैं। ये दवाइयां अंदर नहीं आती हैं। ऐसे में निर्धन तबके के कई मरीजों के हाथ केवल परामर्श ही आता है।
-- -
कई बार खिड़की पर हो जाती कहासुनी
मरीज चिकित्सक की लिखी दवाइयां लेने के लिए अंदर परिसर में दवा वितरण कक्ष पर पहुंचता है, तो यहां कुछ दवाइयां ही मिल पाती हैं। ऐसे में अन्य दवाइयों की जानकारी करते हैं तो कर्मचारियों से उनकी बहस तक हो जाती है। कई बार तो विवाद की स्थिति बन जाती है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं देते।
विज्ञापन
-- -
अस्पताल में भाई को दिखाने के लिए आए थे, चिकित्सक की लिखी दवाइयों में दो अंदर से मिलीं, अन्य दवाइयां बाहर से लेने को कहा। अब घर से रुपये लाकर दवाइयां ले पाऊंगा।-राजकुमार, तीमारदार
-- -
चिकित्सक ने दवाइयां लिखीं, इसके साथ एक छोटी पर्ची थमा दी। ये दवाइयां अंदर नहीं मिल पा रही हैं। अब बाहर से ही खरीदनी होगी।- प्रहलाद तिवारी, बम्हौरी
-- -
बच्चे को पेट में दिक्कत थी, डॉक्टर ने जो दवाएं लिखीं, उन्हें बाहर से खरीदना पड़ रहा है। पूरे पैसे न होने से कुछ दवाइयां बाद में खरीदेंगे।-लालसिंह भरतपुरा
-- -
दाढ़ में दर्द होने पर अस्पताल में दिखाने के लिए आए थे। यहां चिकित्सक ने एक छोटी पर्ची थमा दी, पता नहीं अब बाहर कितने की दवा आएगी।-रानी राजा
--
सभी चिकित्सकों को बाहर की दवा न लिखने के निर्देश हैं। बाहर की दवाइयां लिखने वाले चिकित्सकों को चेतावनी दी जा रही है। इसके बाद भी लिखी जाती हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
विज्ञापन
ललितपुर। मरीजों को एक रुपये के पर्चे पर परामर्श भले ही मिल रहा हो, लेकिन उन्हें 500 से 1000 रुपये तक की दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। चिकित्सक एलर्जी, पेट दर्द, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य सामान्य रोग की दवाएं भी बाहर से लिख रहे हैं। मरीजों का कहना है कि कुछ चिकित्सक पर्चे के साथ एक छोटी पर्ची पकड़ा रहे हैं तो कुछ सरकारी पर्चा पर ही दवाइयां लिख रहे हैं। कई निर्धन मरीज बिना दवाइयों के ही वापस हो रहे हैं।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) से संबद्ध जिला अस्पताल में लगभग 700 से 800 मरीज प्रतिदिन आते हैं। इनमें अधिकांश निर्धन तबके के होते हैं। ये मरीज किसी तरह भाड़े का इंतजाम कर अस्पताल तो आ जाते हैं, लेकिन उन्हें चिकित्सक बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। कुछ चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवाइयां खरीदने के लिए कहते हैं। जब मरीज अस्पताल में मौजूद दवाइयां व जेनरिक दवाएं लिखने की बात करते हैं तो असरदार नहीं होने का हवाला देकर टाल देते हैं, और कहते हैं कि जल्द स्वस्थ होने के लिए बाहर की दवाइयां ही ठीक हैं। ये दवाइयां अंदर नहीं आती हैं। ऐसे में निर्धन तबके के कई मरीजों के हाथ केवल परामर्श ही आता है।
विज्ञापन
कई बार खिड़की पर हो जाती कहासुनी
मरीज चिकित्सक की लिखी दवाइयां लेने के लिए अंदर परिसर में दवा वितरण कक्ष पर पहुंचता है, तो यहां कुछ दवाइयां ही मिल पाती हैं। ऐसे में अन्य दवाइयों की जानकारी करते हैं तो कर्मचारियों से उनकी बहस तक हो जाती है। कई बार तो विवाद की स्थिति बन जाती है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं देते।
विज्ञापन
अस्पताल में भाई को दिखाने के लिए आए थे, चिकित्सक की लिखी दवाइयों में दो अंदर से मिलीं, अन्य दवाइयां बाहर से लेने को कहा। अब घर से रुपये लाकर दवाइयां ले पाऊंगा।-राजकुमार, तीमारदार
चिकित्सक ने दवाइयां लिखीं, इसके साथ एक छोटी पर्ची थमा दी। ये दवाइयां अंदर नहीं मिल पा रही हैं। अब बाहर से ही खरीदनी होगी।- प्रहलाद तिवारी, बम्हौरी
बच्चे को पेट में दिक्कत थी, डॉक्टर ने जो दवाएं लिखीं, उन्हें बाहर से खरीदना पड़ रहा है। पूरे पैसे न होने से कुछ दवाइयां बाद में खरीदेंगे।-लालसिंह भरतपुरा
दाढ़ में दर्द होने पर अस्पताल में दिखाने के लिए आए थे। यहां चिकित्सक ने एक छोटी पर्ची थमा दी, पता नहीं अब बाहर कितने की दवा आएगी।-रानी राजा
सभी चिकित्सकों को बाहर की दवा न लिखने के निर्देश हैं। बाहर की दवाइयां लिखने वाले चिकित्सकों को चेतावनी दी जा रही है। इसके बाद भी लिखी जाती हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल