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अतिवृष्टि का पैसा नहीं मिलने से अन्नदाताओं में मायूसी
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कलौथरा/बिरधा(ललितपुर)। दैवीय आपदा की मार झेल चुके किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने से दिक्कतें बढ़ रही हैं। अब रबी सीजन की बुवाई के लिए किसान परेशान हैं।
दैवीय आपदा से किसान उबर नहीं पा रहा है। इस बार खरीफ सीजन में किसानों की उड़द और मूंग की फसल नष्ट हो गई थी। किसानों ने कई बार शासन और प्रशासन से मुआवजे की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। जगह-जगह आयोजित किए गए किसान मेलों में किसानों को जनप्रतिनिधि झूठे आश्वासन देते रहे। पिछले महीने ब्लॉक बिरधा में आयोजित किसान मेले में प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ ने कहा था कि किसानों के अतिवृष्टि का पैसा 31 अक्तूबर तक किसानों के खाते में पहुंच जाएगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब किसान खेती के लिए लागत न होने के कारण गांव छोड़कर बाहर मजदूरी कर परिवार का भरणपोषण करने के लिये मजबूर हैं। किसानों पर डीएपी, खाद, बीज और डीजल के लिये पैसे नहीं हैं। ऐसे में किसानों की दिक्कत बढ़ रही है। किसानों को न तो पिछली साल का बीमा मिला है और न इस वर्ष का ऐसे में किसान दयनीय हालत में हैं।
जिला प्रशासन द्वारा किसानो को झूठे आश्वासन दिये जा रहे हैं। सरकार किसानों के प्रति गंभीर नहीं नजर आ रही है। पिछला 83 करोड़ रुपया जिला प्रशासन द्वारा शासन को वापस भेज दिया गया था और इस वर्ष किसानों का 80% नुकसान हुआ था, जिसका मुआवजा नहीं मिला हैं, जिससे किसानों में मायूसी छाई हुयी है।
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रंजीत सिंह यादव, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत
खेत में फसल की बुवाई करने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उर्द पूरी तरह से नस्ट हो चुके थे। फसल का सर्वे हुये 1 माह हो चुका है। मुझे फसल के नुकसान का पैसा मिल जाता तो बुवाई शुरू हो जाती।
प्रेमनारायण, किसान, सिंगेपुर
वर्तमान सरकार किसानों के साथ आंख मिचौली खेल रही है। अगर समय पर किसानों को पैसा मिल जाता तो खाद बीज के लिए परेशान नहीं होना पड़ता और समय से बुवाई हो जाती। किसान खाद बीज के लिए इधर उधर भटक रहे हैं।
मुरारीलाल सतौरा स्थानीय किसान
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दैवीय आपदा से किसान उबर नहीं पा रहा है। इस बार खरीफ सीजन में किसानों की उड़द और मूंग की फसल नष्ट हो गई थी। किसानों ने कई बार शासन और प्रशासन से मुआवजे की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। जगह-जगह आयोजित किए गए किसान मेलों में किसानों को जनप्रतिनिधि झूठे आश्वासन देते रहे। पिछले महीने ब्लॉक बिरधा में आयोजित किसान मेले में प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ ने कहा था कि किसानों के अतिवृष्टि का पैसा 31 अक्तूबर तक किसानों के खाते में पहुंच जाएगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब किसान खेती के लिए लागत न होने के कारण गांव छोड़कर बाहर मजदूरी कर परिवार का भरणपोषण करने के लिये मजबूर हैं। किसानों पर डीएपी, खाद, बीज और डीजल के लिये पैसे नहीं हैं। ऐसे में किसानों की दिक्कत बढ़ रही है। किसानों को न तो पिछली साल का बीमा मिला है और न इस वर्ष का ऐसे में किसान दयनीय हालत में हैं।
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जिला प्रशासन द्वारा किसानो को झूठे आश्वासन दिये जा रहे हैं। सरकार किसानों के प्रति गंभीर नहीं नजर आ रही है। पिछला 83 करोड़ रुपया जिला प्रशासन द्वारा शासन को वापस भेज दिया गया था और इस वर्ष किसानों का 80% नुकसान हुआ था, जिसका मुआवजा नहीं मिला हैं, जिससे किसानों में मायूसी छाई हुयी है।
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रंजीत सिंह यादव, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत
खेत में फसल की बुवाई करने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उर्द पूरी तरह से नस्ट हो चुके थे। फसल का सर्वे हुये 1 माह हो चुका है। मुझे फसल के नुकसान का पैसा मिल जाता तो बुवाई शुरू हो जाती।
प्रेमनारायण, किसान, सिंगेपुर
वर्तमान सरकार किसानों के साथ आंख मिचौली खेल रही है। अगर समय पर किसानों को पैसा मिल जाता तो खाद बीज के लिए परेशान नहीं होना पड़ता और समय से बुवाई हो जाती। किसान खाद बीज के लिए इधर उधर भटक रहे हैं।
मुरारीलाल सतौरा स्थानीय किसान