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बंदियों को भी हैं सामान्य नागरिकों के समान अधिकार
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मानव अधिकार दिवस कार्यक्रम में जिला कारागार में मौजूद बंदी
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। बृहस्पतिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष/ जिला जज मोहम्मद रियाज के निर्देशन में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन जिला कारागार में किया गया।
शिविर की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव सूरज मिश्रा ने मानवाधिकार के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा चार्टर पास किया गया था। तब से प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बंदियों को जानकारी दी कि बंदी होने के दौरान भी उनके मानवाधिकार सामान्य नागरिकों के समान सुरक्षित हैं। केवल स्वतंत्र भ्रमण को छोड़कर, बंदियों और सामान्य नागरिकों को चिकित्सा का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, नि:शुल्क विधिक सेवा का अधिकार मानवाधिकार के अंतर्गत आते हैं। साथ ही बताया कि आमजनों का शिक्षित होना आवश्यक है, क्योंकि शिक्षा द्वारा ही हम अपने मानवाधिकार को समझकर सुरक्षित रख सकते हैं। साथ ही नशा जैसी कुरीतियों से दूर रखा जा सकता है। मौजूद कैदियों ने बताया कि जेल मैनुअल के अनुसार ही बंदियों को जेल के अंदर सुविधाएं आमजन की तरह ही उपलब्ध कराई जाती हैं। शिविर के अंत में उपस्थित बंदियों से उनकी समस्याओं के संबंध में जानकारी ली और उनका निराकरण करने के लिए अधीक्षक, जिला कारागार एवं जिला कारागार चिकित्सक को निर्देशित किया।
इस दौरान क्षेत्राधिकारी केशव नाथ, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा डीके गर्ग, प्रभारी कारापाल सुरेश कुमार, अधीक्षक कारागार उदय प्रताप मिश्र, भोलनाथ अंबेडकर, चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार द्विवेदी, प्रियंका, रागिनी, वंदना पाल, सुमित कुमार, फार्मासिस्ट कमलदीप, विनोद कुमार जैन, अभिषेक गोस्वामी, पंकज कुमार, महेश प्रसाद गंगेले व कैदी आदि मौजूद रहे। संचालन अधिवक्ता केहर सिंह ने किया।
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शिविर की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव सूरज मिश्रा ने मानवाधिकार के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा चार्टर पास किया गया था। तब से प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बंदियों को जानकारी दी कि बंदी होने के दौरान भी उनके मानवाधिकार सामान्य नागरिकों के समान सुरक्षित हैं। केवल स्वतंत्र भ्रमण को छोड़कर, बंदियों और सामान्य नागरिकों को चिकित्सा का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, नि:शुल्क विधिक सेवा का अधिकार मानवाधिकार के अंतर्गत आते हैं। साथ ही बताया कि आमजनों का शिक्षित होना आवश्यक है, क्योंकि शिक्षा द्वारा ही हम अपने मानवाधिकार को समझकर सुरक्षित रख सकते हैं। साथ ही नशा जैसी कुरीतियों से दूर रखा जा सकता है। मौजूद कैदियों ने बताया कि जेल मैनुअल के अनुसार ही बंदियों को जेल के अंदर सुविधाएं आमजन की तरह ही उपलब्ध कराई जाती हैं। शिविर के अंत में उपस्थित बंदियों से उनकी समस्याओं के संबंध में जानकारी ली और उनका निराकरण करने के लिए अधीक्षक, जिला कारागार एवं जिला कारागार चिकित्सक को निर्देशित किया।
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इस दौरान क्षेत्राधिकारी केशव नाथ, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा डीके गर्ग, प्रभारी कारापाल सुरेश कुमार, अधीक्षक कारागार उदय प्रताप मिश्र, भोलनाथ अंबेडकर, चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार द्विवेदी, प्रियंका, रागिनी, वंदना पाल, सुमित कुमार, फार्मासिस्ट कमलदीप, विनोद कुमार जैन, अभिषेक गोस्वामी, पंकज कुमार, महेश प्रसाद गंगेले व कैदी आदि मौजूद रहे। संचालन अधिवक्ता केहर सिंह ने किया।

मानव अधिकार दिवस पर जिला कारागार में बंदियों को संबोधित करते पुलिस अधिकारी- फोटो : LALITPUR
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