{"_id":"5bccce39bdec2269612ac269","slug":"devgar-mandir-pride-of-india","type":"story","status":"publish","title_hn":"सांस्कृतिक परंपरा की अनूठी, बेमिसाल धरोहर है देवगढ़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांस्कृतिक परंपरा की अनूठी, बेमिसाल धरोहर है देवगढ़
lalitpur
Updated Mon, 22 Oct 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
devgarh mandir
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनपद में पुरातत्व धरोहरों और पर्यटन महत्व के स्थानों को जानने, समझने के लिए हर रोज सैकड़ों लोग देवगढ़, दूधई, पंडवन, च्यवन आश्रम, चांदपुर, जहाजपुर, तालबेहट, बालाबेहट का किला, आदि स्थानों पर पहुंच रहे हैं। रविवार को भी कुछ ऐसे ही सैलानी देवगढ़ पहुंचे और यहां के पुरातत्व महत्व को जानने व समझने का प्रयास किया। प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से जाना और बौद्ध गुफाओं में ध्यान योग आदि की बारीकियों को समझते हुए सैकड़ों वर्ष पुराने रहस्यों को करीब से देखा।
देवगढ़ भ्रमण के दौरान सैलानियों ने बताया कि प्रदेश में ललितपुर का नाम हर क्षेत्र में अग्रणी रहता है, चाहे बांधों की बात करें या फिर प्राकृतिक स्थलों की। जनपद प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध एक शहर है, जहां पुरातत्व व प्राकृतिक सौंदर्य की अकूत संपदाएं मौजूद हैं। बेतवा नदी के दाएं तट पर बसा पर्यटन क्षेत्र देवगढ़ ललितपुर जिले का एक लोकप्रिय और ऐतिहासिक नगर है, जो मुख्यालय से मात्र 33 किलोमीटर दूरी पर है। देवगढ़ में करीब सात किलोमीटर की दूरी पर बौद्ध गुफाओं के लिए यहां नाव से जाया जा सकता है या पैदल मार्ग से होते हुए व पहाड़ से होते हुए बेतवा नदी की तलहटी में यह जगह 6वीं सदी में समृद्धशाली होने का प्रतीक है। जनपद के प्राकृतिक सौंदर्य की खोज में एक टीम प्रत्येक रविवार को प्राकृतिक स्थलों की खोज में चल रही है। टीम के सदस्य संजय सेन बताते हैं कि सैकड़ों फीट नीचे बेतवा की तलहटी में आज ये बौद्ध गुफाएं मौन क्यों हैं, घूमते हुए बंद आंखों से महसूस करो कैसे इन्हें सैकड़ों वर्ष पूर्व गढ़ा गया होगा, बौद्ध धर्मगुरु आम जनमानस से दूर सुंदर प्रकृति की गोद में ध्यान मग्न है, विचार करो तो उस समय की संस्कृति पूरे क्षेत्र को गुंजायमान करती महसूस सी होती है। उन्होंने बताया कि जब गुफा के अंदर बैठकर ध्यान लगाते हैं तो महसूस होता है कि बौद्ध धर्मगुरुओं ने यहां पर ध्यान लगाकर सत्य की खोज अवश्य की होगी। यह बेतवा नदी का सुरम्य तट मानों ऐसा लगता है कि पृथ्वी का स्वर्ग यहीं पर हो। शिक्षक पुष्पेंद्र जैन बताते हैं कि जहां विंध्य पर्वत माला पर 41 जैन मंदिर गौरवशाली इतिहास के जीते-जागते प्रमाण हैं, वहीं प्रख्यात दशावतार मंदिर अपने अनूठे शिल्प की दास्तान कहता है। पर्वतमाला के दक्षिण में सिद्ध की गुफा, राजघाटी, बौद्ध गुफा, जैन गुफा आदि बेतवा नदी के किनारे स्थित सुंदर प्राकृतिक तथा पुरातत्व स्थल है। यहां महत्वपूर्ण अभिलेख, प्रशस्तियों का खजाना है। पुरातत्व की दृष्टि से देवगढ़ विश्व प्रसिद्ध है, जैन धर्म का आस्था का केंद्र भी है। यहां पर मूलनायक भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा बड़ी ही अतिशयकारी है। यहां खंडित बिखरी हुई मूर्तियों को संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। देवगढ़ पुरातत्वविदों का एक महत्वपूर्ण कला केंद्र है। देवगढ़ पुरातत्व संपदा से सम्पन्न है। इसे बेतवा नदी का आइसलैंड कहा जाता है। ऋतुराज विश्वकर्मा ने बताया कि पर्यटन मानव की नीरसता भरी जिंदगी में नवीनता ज्ञान व मनोरंजन लाता है। पर्यटन वर्तमान समय में भी नूतन स्फूर्ति का संचार करता है। पर्यटन हमारे अंतसमन में नई सकारात्मकता के भाव जगाता है। वह अपने साथियों के साथ जनपद के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करजिले की अकूत वैभव संपदा को खोजने शामिल रहेंगे। इस दौरान पुष्पेंद्र जैन, संजय सेन, ऋतुराज विश्वकर्मा, राहुल सेन, स्वामीजी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
देवगढ़ भ्रमण के दौरान सैलानियों ने बताया कि प्रदेश में ललितपुर का नाम हर क्षेत्र में अग्रणी रहता है, चाहे बांधों की बात करें या फिर प्राकृतिक स्थलों की। जनपद प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध एक शहर है, जहां पुरातत्व व प्राकृतिक सौंदर्य की अकूत संपदाएं मौजूद हैं। बेतवा नदी के दाएं तट पर बसा पर्यटन क्षेत्र देवगढ़ ललितपुर जिले का एक लोकप्रिय और ऐतिहासिक नगर है, जो मुख्यालय से मात्र 33 किलोमीटर दूरी पर है। देवगढ़ में करीब सात किलोमीटर की दूरी पर बौद्ध गुफाओं के लिए यहां नाव से जाया जा सकता है या पैदल मार्ग से होते हुए व पहाड़ से होते हुए बेतवा नदी की तलहटी में यह जगह 6वीं सदी में समृद्धशाली होने का प्रतीक है। जनपद के प्राकृतिक सौंदर्य की खोज में एक टीम प्रत्येक रविवार को प्राकृतिक स्थलों की खोज में चल रही है। टीम के सदस्य संजय सेन बताते हैं कि सैकड़ों फीट नीचे बेतवा की तलहटी में आज ये बौद्ध गुफाएं मौन क्यों हैं, घूमते हुए बंद आंखों से महसूस करो कैसे इन्हें सैकड़ों वर्ष पूर्व गढ़ा गया होगा, बौद्ध धर्मगुरु आम जनमानस से दूर सुंदर प्रकृति की गोद में ध्यान मग्न है, विचार करो तो उस समय की संस्कृति पूरे क्षेत्र को गुंजायमान करती महसूस सी होती है। उन्होंने बताया कि जब गुफा के अंदर बैठकर ध्यान लगाते हैं तो महसूस होता है कि बौद्ध धर्मगुरुओं ने यहां पर ध्यान लगाकर सत्य की खोज अवश्य की होगी। यह बेतवा नदी का सुरम्य तट मानों ऐसा लगता है कि पृथ्वी का स्वर्ग यहीं पर हो। शिक्षक पुष्पेंद्र जैन बताते हैं कि जहां विंध्य पर्वत माला पर 41 जैन मंदिर गौरवशाली इतिहास के जीते-जागते प्रमाण हैं, वहीं प्रख्यात दशावतार मंदिर अपने अनूठे शिल्प की दास्तान कहता है। पर्वतमाला के दक्षिण में सिद्ध की गुफा, राजघाटी, बौद्ध गुफा, जैन गुफा आदि बेतवा नदी के किनारे स्थित सुंदर प्राकृतिक तथा पुरातत्व स्थल है। यहां महत्वपूर्ण अभिलेख, प्रशस्तियों का खजाना है। पुरातत्व की दृष्टि से देवगढ़ विश्व प्रसिद्ध है, जैन धर्म का आस्था का केंद्र भी है। यहां पर मूलनायक भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा बड़ी ही अतिशयकारी है। यहां खंडित बिखरी हुई मूर्तियों को संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। देवगढ़ पुरातत्वविदों का एक महत्वपूर्ण कला केंद्र है। देवगढ़ पुरातत्व संपदा से सम्पन्न है। इसे बेतवा नदी का आइसलैंड कहा जाता है। ऋतुराज विश्वकर्मा ने बताया कि पर्यटन मानव की नीरसता भरी जिंदगी में नवीनता ज्ञान व मनोरंजन लाता है। पर्यटन वर्तमान समय में भी नूतन स्फूर्ति का संचार करता है। पर्यटन हमारे अंतसमन में नई सकारात्मकता के भाव जगाता है। वह अपने साथियों के साथ जनपद के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करजिले की अकूत वैभव संपदा को खोजने शामिल रहेंगे। इस दौरान पुष्पेंद्र जैन, संजय सेन, ऋतुराज विश्वकर्मा, राहुल सेन, स्वामीजी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन