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अष्टमी और नवी पर लगता है भक्तों का तातां
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कैप्सन - मंदिर की मुख्य देवी
- फोटो : TALDEHATE
तालबेहट। बुंदेलखंड की भूमि धार्मिक पुरा अवशेेषों की खान हैं। क्षेत्र में कुछ धार्मिक स्थल ऐसे हैं, जिनकी क्षेत्र में काफी ख्याति हैं। एक ऐसा ही सिद्ध क्षेत्र देवा माता का मंदिर हैं।
झांसी ललितपुर राजमार्ग से लगभग 3 किलोमीटर दूर जंगल में बने इस सिद्ध पीठ का इतिहास भी बड़ा रोचक हैं। क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार पहले यहां दो विशाल पत्थर थे। इनके मध्य माता की छोटी सी प्रतिमा थी। जो स्पष्ट दिखाई नहीं देती थी। चरवाहे ही यहां आते जाते थे।
लगभग चार दर्शक पहले यहां फक्कड़ नामक एक बाबा आए। उन्होंने जंगल में बने इस स्थान को अपना ठिकाना बनाया। वह नियम से माता की अराधना करने लगें। कहा जाता है कि इसके बाद इन पत्थरों की दूरी आपस में बढ़ने लगी। जिसके बाद माता की प्रतिमा स्पष्ट दिखने लगी। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने जब इस चमत्कार को देखा तो उन्होंने मंदिर आना शुरू कर दिया। इसकी प्रसिद्ध के चलते मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह भी दर्शन करने आ चुके हैं। वर्तमान में यहां लगभग दो दर्जन से अधिक मंदिर एवं विशाल यज्ञशाला बनी हैं। यज्ञशाला में प्रतिवर्ष यज्ञ होता हैं।
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यहां नवरात्र की अष्टमी और नवी पर यहां भक्तों का मेला लगता हैं। क्षेत्र के अलावा बाहर से माता के भक्त नवरात्र की उपासना के बाद जवारे लेकर यहां आते हैं। वहीं मौन पड़वा पर यहां मौनीओं का मेला लगता हैं। विकास के लिए प्रशासन ने अभी तक कुछ नहीं किया। आज भी बाहर से आने वाले भक्तों को क्षतिग्रस्त सड़क से गुजरना पड़ता हैं।
सिद्ध क्षेत्र में जो भी हुआ हैं। वह मां की कृपा से हुआ हैं। जनता के सहयोग और माता रानी की कृपा से यहां हर पल धार्मिक कार्यक्रम चलते रहतें हैं।
देव पुत्र नागा बाबा, मंदिर पुजारी
प्रशासनिक उपेक्षा का दंश यह सिद्ध क्षेत्र झेल रहा हैं। प्रशासन अपने स्तर से यहां के विकास के लिए कोई योजना बना दे तो यहा आने वाले भक्तों की संख्या कई गुना हो जाएगी।
-- बलवीर यादव, धमकना
मंदिर की क्षेत्र में काफी ख्याति हैं। हर समय बाहर से श्रृद्धालु दर्शनों के लिए आते रहते हैं। माता भक्तों की मुराद भी पूरी करती हैं।
बृजेश पस्तोर, ककड़ारी
पहले यहां जंगल था। दिन में जाने से लोग कतराते थे। माता के चमत्कार से आज यहां हर समय लोगों का आना जाना बना रहता हैं।
- रामदयाल साहू, तेरई फाटक
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झांसी ललितपुर राजमार्ग से लगभग 3 किलोमीटर दूर जंगल में बने इस सिद्ध पीठ का इतिहास भी बड़ा रोचक हैं। क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार पहले यहां दो विशाल पत्थर थे। इनके मध्य माता की छोटी सी प्रतिमा थी। जो स्पष्ट दिखाई नहीं देती थी। चरवाहे ही यहां आते जाते थे।
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लगभग चार दर्शक पहले यहां फक्कड़ नामक एक बाबा आए। उन्होंने जंगल में बने इस स्थान को अपना ठिकाना बनाया। वह नियम से माता की अराधना करने लगें। कहा जाता है कि इसके बाद इन पत्थरों की दूरी आपस में बढ़ने लगी। जिसके बाद माता की प्रतिमा स्पष्ट दिखने लगी। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने जब इस चमत्कार को देखा तो उन्होंने मंदिर आना शुरू कर दिया। इसकी प्रसिद्ध के चलते मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह भी दर्शन करने आ चुके हैं। वर्तमान में यहां लगभग दो दर्जन से अधिक मंदिर एवं विशाल यज्ञशाला बनी हैं। यज्ञशाला में प्रतिवर्ष यज्ञ होता हैं।
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यहां नवरात्र की अष्टमी और नवी पर यहां भक्तों का मेला लगता हैं। क्षेत्र के अलावा बाहर से माता के भक्त नवरात्र की उपासना के बाद जवारे लेकर यहां आते हैं। वहीं मौन पड़वा पर यहां मौनीओं का मेला लगता हैं। विकास के लिए प्रशासन ने अभी तक कुछ नहीं किया। आज भी बाहर से आने वाले भक्तों को क्षतिग्रस्त सड़क से गुजरना पड़ता हैं।
सिद्ध क्षेत्र में जो भी हुआ हैं। वह मां की कृपा से हुआ हैं। जनता के सहयोग और माता रानी की कृपा से यहां हर पल धार्मिक कार्यक्रम चलते रहतें हैं।
देव पुत्र नागा बाबा, मंदिर पुजारी
प्रशासनिक उपेक्षा का दंश यह सिद्ध क्षेत्र झेल रहा हैं। प्रशासन अपने स्तर से यहां के विकास के लिए कोई योजना बना दे तो यहा आने वाले भक्तों की संख्या कई गुना हो जाएगी।
-- बलवीर यादव, धमकना
मंदिर की क्षेत्र में काफी ख्याति हैं। हर समय बाहर से श्रृद्धालु दर्शनों के लिए आते रहते हैं। माता भक्तों की मुराद भी पूरी करती हैं।
बृजेश पस्तोर, ककड़ारी
पहले यहां जंगल था। दिन में जाने से लोग कतराते थे। माता के चमत्कार से आज यहां हर समय लोगों का आना जाना बना रहता हैं।
- रामदयाल साहू, तेरई फाटक

कैप्सन - मंदिर का मुख्य द्वार- फोटो : TALDEHATE

कैप्सन - यज्ञ शाला- फोटो : TALDEHATE