{"_id":"6a4436e0043301f26a0c5018","slug":"demolition-could-not-be-carried-out-for-47-out-of-52-dilapidated-council-schools-lalitpur-news-c-131-1-ltp1017-158873-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: जर्जर परिषदीय विद्यालय 52 में 47 का नहीं हो सका ध्वस्तीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: जर्जर परिषदीय विद्यालय 52 में 47 का नहीं हो सका ध्वस्तीकरण
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन। विकास खंड महरौनी में जर्जर एवं अत्यंत खतरनाक घोषित विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार ध्वस्तीकरण के लिए चिह्नित 52 विद्यालय भवनों में से अब तक महज 5 भवनों का ही ध्वस्तीकरण हो सका है, जबकि 47 जर्जर भवन आज भी खड़े हैं। इन भवनों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की जान जोखिम में बनी हुई है।
विकास खंड महरौनी में कुल 187 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 37 कंपोजिट विद्यालय, 44 जूनियर हाईस्कूल और 106 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें से 52 विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में हैं, जिन्हें शासन स्तर से ध्वस्त किए जाने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। बरसात का मौसम शुरू होते ही इन भवनों की स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। कई विद्यालयों की छतों से प्लास्टर झड़ रहा है, दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और छज्जों के गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। इसके बावजूद इन विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई जारी है। किसी विद्यालय में बच्चे बरामदे में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं तो कहीं सभी कक्षाओं के नौनिहाल एक ही कमरे में बैठने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान शिक्षक भी लगातार खतरे की आशंका के बीच कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी समय दीवार या छत गिरने से गंभीर दुर्घटना हो सकती है। यदि समय रहते इन भवनों का ध्वस्तीकरण कर नए भवनों का निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
0000000
वर्जन
जर्जर हो चुके विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। 52 में से 5 विद्यालय भवनों का ध्वस्तीकरण कराया जा चुका है। शेष भवनों का भी जल्द से जल्द ध्वस्तीकरण कराया जाएगा।-राजकुमार पुरोहित, खंड शिक्षा अधिकारी महरौनी
विज्ञापन
विज्ञापन
सिलावन। विकास खंड महरौनी में जर्जर एवं अत्यंत खतरनाक घोषित विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार ध्वस्तीकरण के लिए चिह्नित 52 विद्यालय भवनों में से अब तक महज 5 भवनों का ही ध्वस्तीकरण हो सका है, जबकि 47 जर्जर भवन आज भी खड़े हैं। इन भवनों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की जान जोखिम में बनी हुई है।
विकास खंड महरौनी में कुल 187 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 37 कंपोजिट विद्यालय, 44 जूनियर हाईस्कूल और 106 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें से 52 विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में हैं, जिन्हें शासन स्तर से ध्वस्त किए जाने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। बरसात का मौसम शुरू होते ही इन भवनों की स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। कई विद्यालयों की छतों से प्लास्टर झड़ रहा है, दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और छज्जों के गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। इसके बावजूद इन विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई जारी है। किसी विद्यालय में बच्चे बरामदे में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं तो कहीं सभी कक्षाओं के नौनिहाल एक ही कमरे में बैठने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान शिक्षक भी लगातार खतरे की आशंका के बीच कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी समय दीवार या छत गिरने से गंभीर दुर्घटना हो सकती है। यदि समय रहते इन भवनों का ध्वस्तीकरण कर नए भवनों का निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
विज्ञापन
0000000
वर्जन
जर्जर हो चुके विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। 52 में से 5 विद्यालय भवनों का ध्वस्तीकरण कराया जा चुका है। शेष भवनों का भी जल्द से जल्द ध्वस्तीकरण कराया जाएगा।-राजकुमार पुरोहित, खंड शिक्षा अधिकारी महरौनी
विज्ञापन