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दिल्ली से की जा सकेगी ग्राम सभा की जमीन की निगरानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Sep 2016 12:55 AM IST
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computer, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। अब दिल्ली में बैठे-बैठे जनपद की जमीन की निगरानी आसानी से की जा सकेगी। कहां कितनी जमीन दर्ज है, किसी ने इस पर कब्जा तो नहीं कर लिया, यह सब एक क्लिक करने पर पता चल जाएगा। केंद्र सरकार की ग्राम पंचायतों की जमीन को ऑनलाइन करने की योजना पर काम हो गया है। इसके तहत जमीन का फोटो समेत ब्योरा पंचायती राज मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इस प्रक्रिया को आम आदमी तक पहुंचाने और आसान बनाने के लिए मोबाइल एम-एसेट ऐप बनाया गया है। इसके जरिए कभी भी किसी भी गांव की जमीन की स्थिति देखी जा सकेगी।
ग्राम पंचायतों की काफी अचल संपत्ति होती है, लेकिन इसका बेहतर तरीके से उपयोग नहीं हो पाता है। गांव के अराजक तत्व जमीन पर कब्जा कर लेते हैं। केंद्र सरकार को भी योजनाओं के लिए जमीन के लिए फाइलें दौड़ानी पड़ती हैं। जमीन न मिलने के कारण कई योजनाएं समय पर धरातल पर नहीं उतर पाती हैं।
इन हालातों को देखते हुए केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने सभी ग्राम पंचायतों की अचल संपत्ति का ऑनलाइन डाटा बनाने की योजना तैयार की है। मोबाइल बेस्ड एसेट मैपिंग योजना के तहत इस डाटा को फोटो समेत एकत्रित करके मंत्रालय की साइट पर अपलोड किया जाएगा। ग्राम सभा की संपत्ति को देखने के लिए मोबाइल एम-एसेट ऐप भी बनाया गया है। इस मोबाइल ऐप से कहीं भी किसी भी ग्राम सभा की संपत्ति की जानकारी ली जा सकेगी।
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इस कार्य को पूरा करने के लिए हर जनपद में एक कर्मचारी की नियुक्ति की जाएगी, जो कि इस काम के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। प्रदेश में इस योजना के तहत काम को पूरा करने के लिए 30 सितंबर तक की समय सीमा तय की गई है। इस कार्य का नोडल अधिकारी जिला पंचायत राज अधिकारी को बनाया गया है।
ऑनलाइन निगरानी से रुकेंगे कब्जे
सभी ग्राम सभाओं की अचल संपत्ति के एम-एसेट पर अपलोड होने के बाद केंद्र सरकार किसी भी योजना के लिए योग्य जमीन का चयन आसानी से कर सकेगी। इसके साथ ही ग्राम सभा की जमीन पर होने वाले अवैध कब्जों पर रोक लगाने में भी यह योजना काफी कारगर साबित होगी। ग्राम सभा की चिह्नित जमीन पर किसी योजना के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी लेने के लिए एम-एसेट ऐप मदद कर सकेगा।
गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड होगा ऐप
एम-एसेट ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेगा। यह ऐप मोबाइल के ऑनलाइन व ऑफलाइन होने पर दोनों स्थितियों में काम करेगा। ऐप के जरिए आम लोग भी ग्राम सभा की संपत्ति के बारे में सटीक जानकारी जुटा सकेंगे।
एम-एसेट कार्यक्रम को लेकर काम शुरू कर दिया गया है। ग्राम सभा की अचल संपत्तियों का ब्योरा ऑनलाइन करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिवों को सौंपी गई है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 30 सितंबर की तिथि तय की गई है।
- डीआर कुशवाहा, जिला पंचायत राज अधिकारी
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ग्राम पंचायतों की काफी अचल संपत्ति होती है, लेकिन इसका बेहतर तरीके से उपयोग नहीं हो पाता है। गांव के अराजक तत्व जमीन पर कब्जा कर लेते हैं। केंद्र सरकार को भी योजनाओं के लिए जमीन के लिए फाइलें दौड़ानी पड़ती हैं। जमीन न मिलने के कारण कई योजनाएं समय पर धरातल पर नहीं उतर पाती हैं।
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इन हालातों को देखते हुए केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने सभी ग्राम पंचायतों की अचल संपत्ति का ऑनलाइन डाटा बनाने की योजना तैयार की है। मोबाइल बेस्ड एसेट मैपिंग योजना के तहत इस डाटा को फोटो समेत एकत्रित करके मंत्रालय की साइट पर अपलोड किया जाएगा। ग्राम सभा की संपत्ति को देखने के लिए मोबाइल एम-एसेट ऐप भी बनाया गया है। इस मोबाइल ऐप से कहीं भी किसी भी ग्राम सभा की संपत्ति की जानकारी ली जा सकेगी।
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इस कार्य को पूरा करने के लिए हर जनपद में एक कर्मचारी की नियुक्ति की जाएगी, जो कि इस काम के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। प्रदेश में इस योजना के तहत काम को पूरा करने के लिए 30 सितंबर तक की समय सीमा तय की गई है। इस कार्य का नोडल अधिकारी जिला पंचायत राज अधिकारी को बनाया गया है।
ऑनलाइन निगरानी से रुकेंगे कब्जे
सभी ग्राम सभाओं की अचल संपत्ति के एम-एसेट पर अपलोड होने के बाद केंद्र सरकार किसी भी योजना के लिए योग्य जमीन का चयन आसानी से कर सकेगी। इसके साथ ही ग्राम सभा की जमीन पर होने वाले अवैध कब्जों पर रोक लगाने में भी यह योजना काफी कारगर साबित होगी। ग्राम सभा की चिह्नित जमीन पर किसी योजना के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी लेने के लिए एम-एसेट ऐप मदद कर सकेगा।
गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड होगा ऐप
एम-एसेट ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेगा। यह ऐप मोबाइल के ऑनलाइन व ऑफलाइन होने पर दोनों स्थितियों में काम करेगा। ऐप के जरिए आम लोग भी ग्राम सभा की संपत्ति के बारे में सटीक जानकारी जुटा सकेंगे।
एम-एसेट कार्यक्रम को लेकर काम शुरू कर दिया गया है। ग्राम सभा की अचल संपत्तियों का ब्योरा ऑनलाइन करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिवों को सौंपी गई है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 30 सितंबर की तिथि तय की गई है।
- डीआर कुशवाहा, जिला पंचायत राज अधिकारी