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साहब खेतों में ही सड़ गई उड़द और मूंग की फसल, लागत निकालना भी हो गया मुश्किल
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सिलावन के खेत में खराब पड़ी फसल
- फोटो : LALITPUR
सिलावन/ललितपुर। इस वर्ष लगातार हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया और उड़द व मूंग की फसल खेतों में ही सड़ गई। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। परेशान किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर खराब हुई फसल का मुआयना करवाकर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
किसानों ने इस वर्ष अच्छे उत्पादन की आस में अपने खेतों में अत्यधिक लागत लगाकर मूंग, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि खरीफ फसलों की बुवाई की। लेकिन क्षेत्र में विगत कुछ दिनों पूर्व लगातार हुई बारिश से उसकी आस टूटती दिखाई दे रही है। किसानों का कहना हैं कि मूसलाधार बारिश से खेतों में पानी भर गया, जिसके चलते पौधे गलकर सड़ गए। सबसे अधिक नुकसान मूंग, उड़द और तिल को हुआ है। किसान बताते हैं कि खरीफ की फसल की बुवाई के बाद जून, जुलाई में कम वर्षा से पहले फसल प्रभावित हुईं इसके बाद अगस्त माह में लगातार हुई बारिश से खेतों मे पानी भर गया और मूंग, उड़द व तिल की फसल खेतों में ही नष्ट हो गई। बजर्रा, भडरऊ, कारीसा, सिलावन, जरया सहित अनेक गांवों में खरीफ की फसल प्रभावित हुई हैं।
किसान बोले-आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा
किसानों का कहना एक बार फिर फसल नष्ट होने से जहां उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है, वहीं, कर्ज चुकाने की चिंता भी सताने लगी है। इतना ही नहीं किसान इससे रबी की फसल की बुवाई भी प्रभावित होने की बात कह रहे हैं। किसान बताते हैं कि जैसे-तैसे बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेकर अत्यधिक लागत लगाकर खरीफ की फसल की बुवाई की थी, लेकिन सब नष्ट हो गई। इससे किसान एक बार फिर बर्बादी की कगार पर आ पहुंचा हैं। उसे साहूकारों और बैंकों लिए कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है।
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15 एकड़ में मंहगे दामों पर उर्द और मूंग का बीज लेकर बुआई की थी जिसमें खरपतवार नाशक और दवाइयों का छिड़काव भी किया था लेकिन बारिश से संपूर्ण फसल नष्ट हो गई हैं। इससे आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।
- महेन्द्र सिंह यादव, बजर्रा
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बीते माह हुई लगातार बारिश से उड़द, मूूंग और तिल की फसल खेतों में पानी भरने से नष्ट हो गई है। इससे आर्थिक क्षति हुई है। कर्ज का बोझ और बढ़ गया है।
- देशराज, सिलावन
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खरीफ की फसल नष्ट होने से अगली रबी की फसल के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। हम लोगों को मुआवजा मिलना चाहिए।
- भगवत प्रसाद
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मैंने कर्ज लेकर 5 एकड़ जमीन पर खरीफ की फसल की बुआई की थी लेकिन लागत निकलने की भी उम्मीद नहीं है। अब तो कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
- देवेन्द्र, जरया
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विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी खरीफ की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई है। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- कमतू
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किसानों ने इस वर्ष अच्छे उत्पादन की आस में अपने खेतों में अत्यधिक लागत लगाकर मूंग, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि खरीफ फसलों की बुवाई की। लेकिन क्षेत्र में विगत कुछ दिनों पूर्व लगातार हुई बारिश से उसकी आस टूटती दिखाई दे रही है। किसानों का कहना हैं कि मूसलाधार बारिश से खेतों में पानी भर गया, जिसके चलते पौधे गलकर सड़ गए। सबसे अधिक नुकसान मूंग, उड़द और तिल को हुआ है। किसान बताते हैं कि खरीफ की फसल की बुवाई के बाद जून, जुलाई में कम वर्षा से पहले फसल प्रभावित हुईं इसके बाद अगस्त माह में लगातार हुई बारिश से खेतों मे पानी भर गया और मूंग, उड़द व तिल की फसल खेतों में ही नष्ट हो गई। बजर्रा, भडरऊ, कारीसा, सिलावन, जरया सहित अनेक गांवों में खरीफ की फसल प्रभावित हुई हैं।
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किसान बोले-आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा
किसानों का कहना एक बार फिर फसल नष्ट होने से जहां उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है, वहीं, कर्ज चुकाने की चिंता भी सताने लगी है। इतना ही नहीं किसान इससे रबी की फसल की बुवाई भी प्रभावित होने की बात कह रहे हैं। किसान बताते हैं कि जैसे-तैसे बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेकर अत्यधिक लागत लगाकर खरीफ की फसल की बुवाई की थी, लेकिन सब नष्ट हो गई। इससे किसान एक बार फिर बर्बादी की कगार पर आ पहुंचा हैं। उसे साहूकारों और बैंकों लिए कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है।
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15 एकड़ में मंहगे दामों पर उर्द और मूंग का बीज लेकर बुआई की थी जिसमें खरपतवार नाशक और दवाइयों का छिड़काव भी किया था लेकिन बारिश से संपूर्ण फसल नष्ट हो गई हैं। इससे आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।
- महेन्द्र सिंह यादव, बजर्रा
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बीते माह हुई लगातार बारिश से उड़द, मूूंग और तिल की फसल खेतों में पानी भरने से नष्ट हो गई है। इससे आर्थिक क्षति हुई है। कर्ज का बोझ और बढ़ गया है।
- देशराज, सिलावन
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खरीफ की फसल नष्ट होने से अगली रबी की फसल के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। हम लोगों को मुआवजा मिलना चाहिए।
- भगवत प्रसाद
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मैंने कर्ज लेकर 5 एकड़ जमीन पर खरीफ की फसल की बुआई की थी लेकिन लागत निकलने की भी उम्मीद नहीं है। अब तो कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
- देवेन्द्र, जरया
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विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी खरीफ की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई है। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- कमतू
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