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खौफ में रोजी-रोटी की जुगाड़ कर रहे आदिवासी
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
Updated Fri, 21 Oct 2016 01:17 AM IST
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murder, lalaitpur news
- फोटो : demo
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पाली (ललितपुर)। मंगलवार को थाना पाली के जंगलों में आदिवासी महिला की हत्या के बाद क्षेत्र में दहशत है। इस घटना के बाद से आदिवासी महिलाएं और बच्चे जंगल की ओर जाने से कतरा रहे है और जो जा भी रहें हैं वो समूह के साथ जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की निर्ममता पूर्वक हत्या की पुष्टी हुई है। इससे भी आदिवासी महिलाओं में दहशत है। बताते चले कि आदिवासी महिला की हत्या के बाद उसकी आंखें भी निकाल ली गई थी।
ग्राम डुंगरिया में हुई वारदात के बाद जब यहां के लोगों से बात की गयी तो कई बातें सामने आई, जिनसे लगा की महिला की हत्या के राज भी इन्हीं सबूतों के सहारे खुल सकते हैं। सबसे पहले मृतका के पीड़ित परिवार से बात की गई। इसमें उन्होंने बताया की गांव में रंजिश तो किसी से नहीं है। बकरियों को चुराने के चक्कर में मेरी मां की हत्या की गई। पास खड़े गांव वाले भी बोले अगर ऐसा नहीं होता तो बकरी कब की घर आ गयी होती। क्योंकि बकरी हर रोज इसी जंगल में जाती थी।
इसके साथ ही लोगों ने आर्थिक तंगी से जूझ रहे पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता दिलाये जाने की मांग की है। और कहा की कहीं आदिवासी महिला की हत्या सिर्फ एक राज बनकर न रह जाए। इसके लिए जल्द पर्दाफाश होना चाहिए।
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डुंगरिया से पांच भैंसें अभी भी लापता
इस सप्ताह में गांव के दो लोगों की भैंसें, जो पास के जंगल में चरने गई थी अब तक घर नहीं लौटी है। जिनकी खोजबीन भी की जा रही है। इसमें मुलायम की एक भैंस व शिवचरण की चार भैंसे लापता है।
लोगों ने देखा चार संदिग्धों को डुगरिया से एक सप्ताह पूर्व दो लोगों की भैंसें लापता हो गयी थी । ग्रामीण जब अपनी भैंसें इसी जंगल में तलाश रहे थे। तो वहां चार लोग संदिग्ध अवस्था में घूम रहे थे। जिनमें एक मोटर साइकिल भी थी। थोड़े आगे जाकर लापता भैंसें तो मिल गयी। लेकिन एक भैंस के पांव लाल रंग की चौकड़ी लूंगी से बंधे थे। तो दूसरी भैंस की मोरी की रस्सी भी इसी भैंस के सींगों से बंधी थी। ग्रामीणों ने यह भी बताया की उक्त लूंगी का फटा कपड़ा एक ग्रामीण के पास है अगर वह सुरक्षित होगा तो शायद यह पाली पुलिस के बड़े काम आ सकता है ।
पाली में है पांच नग लावारिश भैंसे
बीते बुधवार की रात 10 बजे के करीब पाली मुख्य बस स्टैंड चौराहे के पास बने कारस देव मंदिर के पास पांच नग भैंसें लावारिस घूम रही थी । लोगों ने जब देखा तो सभी नग जिनमें तीन भैंसें, एक पड़ा, एक पड़िया है जो बसस्टेंड निवासी दलीप बुनकर को सौंप दी और इसकी सूचना पाली पुलिस को देदी गयी है । इससे भैंसे उनके स्वामियों तक पहुंच सके ।
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ग्राम डुंगरिया में हुई वारदात के बाद जब यहां के लोगों से बात की गयी तो कई बातें सामने आई, जिनसे लगा की महिला की हत्या के राज भी इन्हीं सबूतों के सहारे खुल सकते हैं। सबसे पहले मृतका के पीड़ित परिवार से बात की गई। इसमें उन्होंने बताया की गांव में रंजिश तो किसी से नहीं है। बकरियों को चुराने के चक्कर में मेरी मां की हत्या की गई। पास खड़े गांव वाले भी बोले अगर ऐसा नहीं होता तो बकरी कब की घर आ गयी होती। क्योंकि बकरी हर रोज इसी जंगल में जाती थी।
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इसके साथ ही लोगों ने आर्थिक तंगी से जूझ रहे पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता दिलाये जाने की मांग की है। और कहा की कहीं आदिवासी महिला की हत्या सिर्फ एक राज बनकर न रह जाए। इसके लिए जल्द पर्दाफाश होना चाहिए।
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डुंगरिया से पांच भैंसें अभी भी लापता
इस सप्ताह में गांव के दो लोगों की भैंसें, जो पास के जंगल में चरने गई थी अब तक घर नहीं लौटी है। जिनकी खोजबीन भी की जा रही है। इसमें मुलायम की एक भैंस व शिवचरण की चार भैंसे लापता है।
लोगों ने देखा चार संदिग्धों को डुगरिया से एक सप्ताह पूर्व दो लोगों की भैंसें लापता हो गयी थी । ग्रामीण जब अपनी भैंसें इसी जंगल में तलाश रहे थे। तो वहां चार लोग संदिग्ध अवस्था में घूम रहे थे। जिनमें एक मोटर साइकिल भी थी। थोड़े आगे जाकर लापता भैंसें तो मिल गयी। लेकिन एक भैंस के पांव लाल रंग की चौकड़ी लूंगी से बंधे थे। तो दूसरी भैंस की मोरी की रस्सी भी इसी भैंस के सींगों से बंधी थी। ग्रामीणों ने यह भी बताया की उक्त लूंगी का फटा कपड़ा एक ग्रामीण के पास है अगर वह सुरक्षित होगा तो शायद यह पाली पुलिस के बड़े काम आ सकता है ।
पाली में है पांच नग लावारिश भैंसे
बीते बुधवार की रात 10 बजे के करीब पाली मुख्य बस स्टैंड चौराहे के पास बने कारस देव मंदिर के पास पांच नग भैंसें लावारिस घूम रही थी । लोगों ने जब देखा तो सभी नग जिनमें तीन भैंसें, एक पड़ा, एक पड़िया है जो बसस्टेंड निवासी दलीप बुनकर को सौंप दी और इसकी सूचना पाली पुलिस को देदी गयी है । इससे भैंसे उनके स्वामियों तक पहुंच सके ।