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हत्यारे चचेरे भाई को आजीवन कारावास
ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2016 01:40 AM IST
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ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश हरकेश कुमार की अदालत ने हत्यारे चचेरे भाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। उक्त मामले में मृतक के अभियुक्त चाचा की मुकदमा के दौरान मृत्य हो चुकी है।
महरौनी कोतवाली अंतर्गत मुहल्ला लुहरयाना निवासी लट्टू घोषी ने नौ वर्ष पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 22 मार्च 2007 को दिन में तीन बजे उसकी पत्नी हीराबाई व पुत्र जीतू उर्फ जितेंद्र घर के सामने बैठे थे। तभी उसका सगा भाई रघुराज सिंह लोधी और उसका पुत्र साहब सिंह आए और गाली-गलौज करते हुए कहने लगे कि घर खाली कर दो।
उनके मना करने पर दोनों पिता-पुत्र ने उसके पुत्र पर लाठी-डंडों के साथ मारपीट शुरू कर दी। यह देख उसकी पत्नी ने बीच बचाव किया तो दोनों ने पत्नी को भी मारा-पीटा, जिससे उन्हें चोटें आईं थी। हमले में पुत्र जीतू उर्फ जितेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया था।
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मुहल्लेवासियों की मदद से गंभीर घायल जीतू को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था, जहां से उसे झांसी मेडिकल रेफर कर दिया था, वहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु उसी दिन हो गई थी। लट्टू घोषी की तहरीर पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ मारपीट करने, गालीगलौज देने, जान से मारने की धमकी देने और जानलेवा हमला में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
लेकिन, जीतू की मृत्यु हो जाने पर मामला गैर इरादतन हत्या की धाराओं में तरमीम कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। न्यायालय में सुनवाई के दौरान पीड़ित पिता और मां ने बेटे की हत्या का आरोप लगाया।
न्यायाधीश ने मंगलवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों, साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त साहब सिंह को हत्या के अपराध में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। उक्त मामले में मुख्य अभियुक्त मृतक के चाचा रघुराज सिंह की दौरान मुकदमा 30 जनवरी 2010 को मृत्यु हो चुकी है।
बकरियां थी हत्या का कारण
ललितपुर। महरौनी निवासी लट्टू घोषी और रघुराज के बीच जमीन के विवाद में कई दिनों से मनमुटाव चल रहा था। वहीं, 22 मार्च 2007 को एक भाई की बकरियां दूसरे भाई के चबूतरे पर पहुंच गईं, जिससे दोनों भाइयों के परिवारों में कहा सुनी हो गई थी और मामले ने मारपीट का रूप धारण कर लिया। मामला इतना बढ़ा कि लाठी-डंडों से लैस होकर मारपीट की जाने लगी, जिससे जितेंद्र की मृत्यु तक हो गई थी।
फरार होने पर हुई थी हत्यारे की कुर्की
ललितपुर। महरौनी में हुए उक्त हत्याकांड में लिप्त चचेरे भाई के हत्यारे आरोपी के फरार होने पर न्यायालय ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद भी जब आरोपी न्यायालय में पेश नहीं हुआ तो पुलिस ने सात मई 2015 को फरार साहब सिंह के घर की कुर्की की थी। इसके बाद आरोपी 22 जुलाई 2015 को न्यायालय में प्रस्तुत हुआ, जिसके बाद से जेल में निरुद्ध चल रहा है।
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महरौनी कोतवाली अंतर्गत मुहल्ला लुहरयाना निवासी लट्टू घोषी ने नौ वर्ष पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 22 मार्च 2007 को दिन में तीन बजे उसकी पत्नी हीराबाई व पुत्र जीतू उर्फ जितेंद्र घर के सामने बैठे थे। तभी उसका सगा भाई रघुराज सिंह लोधी और उसका पुत्र साहब सिंह आए और गाली-गलौज करते हुए कहने लगे कि घर खाली कर दो।
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उनके मना करने पर दोनों पिता-पुत्र ने उसके पुत्र पर लाठी-डंडों के साथ मारपीट शुरू कर दी। यह देख उसकी पत्नी ने बीच बचाव किया तो दोनों ने पत्नी को भी मारा-पीटा, जिससे उन्हें चोटें आईं थी। हमले में पुत्र जीतू उर्फ जितेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया था।
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मुहल्लेवासियों की मदद से गंभीर घायल जीतू को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था, जहां से उसे झांसी मेडिकल रेफर कर दिया था, वहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु उसी दिन हो गई थी। लट्टू घोषी की तहरीर पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ मारपीट करने, गालीगलौज देने, जान से मारने की धमकी देने और जानलेवा हमला में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
लेकिन, जीतू की मृत्यु हो जाने पर मामला गैर इरादतन हत्या की धाराओं में तरमीम कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। न्यायालय में सुनवाई के दौरान पीड़ित पिता और मां ने बेटे की हत्या का आरोप लगाया।
न्यायाधीश ने मंगलवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों, साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त साहब सिंह को हत्या के अपराध में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। उक्त मामले में मुख्य अभियुक्त मृतक के चाचा रघुराज सिंह की दौरान मुकदमा 30 जनवरी 2010 को मृत्यु हो चुकी है।
बकरियां थी हत्या का कारण
ललितपुर। महरौनी निवासी लट्टू घोषी और रघुराज के बीच जमीन के विवाद में कई दिनों से मनमुटाव चल रहा था। वहीं, 22 मार्च 2007 को एक भाई की बकरियां दूसरे भाई के चबूतरे पर पहुंच गईं, जिससे दोनों भाइयों के परिवारों में कहा सुनी हो गई थी और मामले ने मारपीट का रूप धारण कर लिया। मामला इतना बढ़ा कि लाठी-डंडों से लैस होकर मारपीट की जाने लगी, जिससे जितेंद्र की मृत्यु तक हो गई थी।
फरार होने पर हुई थी हत्यारे की कुर्की
ललितपुर। महरौनी में हुए उक्त हत्याकांड में लिप्त चचेरे भाई के हत्यारे आरोपी के फरार होने पर न्यायालय ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद भी जब आरोपी न्यायालय में पेश नहीं हुआ तो पुलिस ने सात मई 2015 को फरार साहब सिंह के घर की कुर्की की थी। इसके बाद आरोपी 22 जुलाई 2015 को न्यायालय में प्रस्तुत हुआ, जिसके बाद से जेल में निरुद्ध चल रहा है।