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आत्महत्या को उकसाने में तीन को दस-दस वर्ष की सजा
Updated Sun, 25 Nov 2018 02:28 AM IST
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आत्महत्या को उकसाने में तीन पर दस वर्ष की सजा
न्यायालय ने दस-दस हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूूरो
ललितपुर। ग्यारह वर्ष पूर्व चोरी के विवाद में एक युवक की मौत के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अजय पाल सिंह की अदालत ने नेहरुनगर निवासी तीन सगे भाइयों को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाते हुए दस-दस वर्ष की सजा और दस-दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि शहर के मुहल्ला नेहरु नगर निवासी विंद्रावन अहिरवार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि एक जुलाई 2007 को करीब साढ़े तीन बजे भोलानाथ अहिरवार की किराने की दुकान जो उसके मकान के पास है। भोलानाथ के पुत्र देवसिंह ने उसके पुत्र रामेश्वर को यह कहकर दुकान पर बैठा दिया कि वह पानी पीने जा रहा है। तब तक वह दुकान पर बैठे। भोलानाथ के पुत्र मानसिंह ने बाजार से लौटकर उसके पुत्र रामेश्वर पर चोरी का आरोप लगाते हुए अपने दोनों भाइयों देव सिंह व मूलचंद को बुला लिया और रामेश्वर पर चोरी का आरोप लगाकर उसकी निर्दयता पूर्वक मारपीट कर दी। उसका पुत्र किसी प्रकार अपनी जान बचाकर भागा तो उक्त तीनों लोग उसे खदेड़ते हुए पीछा करते हुए भागे। रामेश्वर को रेलवे लाइन की बी केबिन के पास पकड़ लिया और वह फिर से भागने का प्रयास कर रहा तो चलती ट्रेन की चपेट में आ गया। ट्रेन की चपेट में आकर रामेश्वर की मौत हो चुकी थी। इसके बाद उसके पुत्र के शव का दो जुलाई 2007 को पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया था। पुलिस ने पीड़ित पिता की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में हत्या के मामले में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। शनिवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए तीनों अभियुक्तों मानसिंह, देवसिंह व मूलचंद को आत्महत्या को उकसाने के मामले में दोषी पाते हुए तीनों भाइयों को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास और दस-दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। सजा सुनाए जाने के बाद उक्त तीनों अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।
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न्यायालय ने दस-दस हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूूरो
ललितपुर। ग्यारह वर्ष पूर्व चोरी के विवाद में एक युवक की मौत के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अजय पाल सिंह की अदालत ने नेहरुनगर निवासी तीन सगे भाइयों को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाते हुए दस-दस वर्ष की सजा और दस-दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि शहर के मुहल्ला नेहरु नगर निवासी विंद्रावन अहिरवार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि एक जुलाई 2007 को करीब साढ़े तीन बजे भोलानाथ अहिरवार की किराने की दुकान जो उसके मकान के पास है। भोलानाथ के पुत्र देवसिंह ने उसके पुत्र रामेश्वर को यह कहकर दुकान पर बैठा दिया कि वह पानी पीने जा रहा है। तब तक वह दुकान पर बैठे। भोलानाथ के पुत्र मानसिंह ने बाजार से लौटकर उसके पुत्र रामेश्वर पर चोरी का आरोप लगाते हुए अपने दोनों भाइयों देव सिंह व मूलचंद को बुला लिया और रामेश्वर पर चोरी का आरोप लगाकर उसकी निर्दयता पूर्वक मारपीट कर दी। उसका पुत्र किसी प्रकार अपनी जान बचाकर भागा तो उक्त तीनों लोग उसे खदेड़ते हुए पीछा करते हुए भागे। रामेश्वर को रेलवे लाइन की बी केबिन के पास पकड़ लिया और वह फिर से भागने का प्रयास कर रहा तो चलती ट्रेन की चपेट में आ गया। ट्रेन की चपेट में आकर रामेश्वर की मौत हो चुकी थी। इसके बाद उसके पुत्र के शव का दो जुलाई 2007 को पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया था। पुलिस ने पीड़ित पिता की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में हत्या के मामले में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। शनिवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए तीनों अभियुक्तों मानसिंह, देवसिंह व मूलचंद को आत्महत्या को उकसाने के मामले में दोषी पाते हुए तीनों भाइयों को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास और दस-दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। सजा सुनाए जाने के बाद उक्त तीनों अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।
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