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अदालत: गैर इरादतन हत्या मामले में दो को सात-सात साल की सजा
Updated Tue, 06 Feb 2018 01:28 AM IST
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गैर इरादतन हत्या मामले में पिता-पुत्र को सात-सात साल की सजा
ललितपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश भोपाल सिंह की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में पिता और पुत्र को सात-सात साल की सजा सुनाई है। पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की भी सजा सुनाई है। इस जुर्माने की आधी राशि मृतक की पत्नी को देने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में आरोपी बनाई गई एक महिला को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि छह जनवरी 2011 को मैलवारा खुर्द गांव निवासी गनेश पुत्र मंजू अहिरवार ने बताया कि पांच जनवरी को मेरे पिता मंजू पुत्र तिजू अहिरवार शाम करीब पांच बजे गांव के ही दौलत पुत्र ग्यासी अहिरवार के खेत पर बनी झोपड़ी में मछली व शराब की दावत खाने के लिए गए थे। दावत खाने के दौरान मेरे पिता का दौलत, उसकी पत्नी लछिया और पुत्र देवेंद्र से किसी बात पर विवाद होने लगा। उसी समय रात करीब दस बजे मैं अपनी मां ऊषा के साथ पिता को बुलाने दौलत की झोपड़ी में पहुंचा तो पिता ने डांटकर भगा दिया और थोड़ी देर में आने की बात कही। उसके बाद हमारे लौटने के बाद पूरी रात तक मेरे पिता घर वापस नहीं आए। सुबह अपनी मां के साथ जब फिर दौलत की झोपड़ी पर पहुंचा तो देखा कि मेरे पिता की मृत्यु हो चुकी है और तीनों लोग मौके से फरार हैं। मृतक के पुत्र ने बताया कि रात में विवाद के दौरान तीनों ने आवेश में आकर मेरे पिता को पत्थर मार दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश भोपाल सिंह की अदालत ने सजा सुनाते हुए दौलत अहिरवार और उसके पुत्र देवेंद्र अहिरवार को गैर इरादतन हत्या के मामले में सात-सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दौलत की पत्नी लछिया को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माने की भी सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में पांच-पांच महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा अदालत ने जुर्माने की आधी राशि मृतक की पत्नी को देने के निर्देश दिए हैं।
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ललितपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश भोपाल सिंह की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में पिता और पुत्र को सात-सात साल की सजा सुनाई है। पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की भी सजा सुनाई है। इस जुर्माने की आधी राशि मृतक की पत्नी को देने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में आरोपी बनाई गई एक महिला को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि छह जनवरी 2011 को मैलवारा खुर्द गांव निवासी गनेश पुत्र मंजू अहिरवार ने बताया कि पांच जनवरी को मेरे पिता मंजू पुत्र तिजू अहिरवार शाम करीब पांच बजे गांव के ही दौलत पुत्र ग्यासी अहिरवार के खेत पर बनी झोपड़ी में मछली व शराब की दावत खाने के लिए गए थे। दावत खाने के दौरान मेरे पिता का दौलत, उसकी पत्नी लछिया और पुत्र देवेंद्र से किसी बात पर विवाद होने लगा। उसी समय रात करीब दस बजे मैं अपनी मां ऊषा के साथ पिता को बुलाने दौलत की झोपड़ी में पहुंचा तो पिता ने डांटकर भगा दिया और थोड़ी देर में आने की बात कही। उसके बाद हमारे लौटने के बाद पूरी रात तक मेरे पिता घर वापस नहीं आए। सुबह अपनी मां के साथ जब फिर दौलत की झोपड़ी पर पहुंचा तो देखा कि मेरे पिता की मृत्यु हो चुकी है और तीनों लोग मौके से फरार हैं। मृतक के पुत्र ने बताया कि रात में विवाद के दौरान तीनों ने आवेश में आकर मेरे पिता को पत्थर मार दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश भोपाल सिंह की अदालत ने सजा सुनाते हुए दौलत अहिरवार और उसके पुत्र देवेंद्र अहिरवार को गैर इरादतन हत्या के मामले में सात-सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दौलत की पत्नी लछिया को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माने की भी सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में पांच-पांच महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा अदालत ने जुर्माने की आधी राशि मृतक की पत्नी को देने के निर्देश दिए हैं।
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