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वर्ष 2010 के बाद हुई परिषदीय शिक्षकों की नियुक्तियों की होगी जांच

Wed, 25 Jul 2018 01:48 AM IST
Updated Wed, 25 Jul 2018 01:48 AM IST
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वर्ष 2010 के बाद हुई परिषदीय शिक्षकों की नियुक्तियों की होगी जांच
वर्ष 2010 के बाद हुई नियुक्तियों की होगी जांच
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परिषदीय शिक्षकों की तैनाती का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जनपद में वर्ष 2010 के बाद अब तक परिषदीय शिक्षकों की जो भी नियुक्तियां हुई हैं, उनकी जांच होगी। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश जारी करके, जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को सौंप दी है।
उत्तरप्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव डा.प्रभात कुमार ने जिलाधिकारी को जारी किए पत्र में बताया कि जनपद में वर्ष 2010 के बाद हुई परिषदीय शिक्षकों की नियुक्तियां जांच के घेरे में हैं। इन नियुक्तियों में हुई फर्जीबाड़े को पकड़ने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित होगी। इसमें जनपद के अपर जिला मजिस्ट्रेट को अध्यक्ष नामित किया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक और सहायक मंडलीय शिक्षा निदेशक बेसिक यह दोनों इसके सदस्य होंगे। जिलाधिकारी अपनी निगरानी में यह जांच कराएंगे। गौरतलब है कि बीते दिनों प्रदेश के जनपद मथुरा में परिषदीय शिक्षकों की नियुक्ति में हुए फर्जीबाड़े का खुलासा हुआ है। इसके बाद शासन ने प्रदेश के सात अन्य जनपदों आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद, हाथरस, मुरादाबाद, फतेहपुर एवं हरदोई में भी शिक्षक भर्ती की जांच की शुरुआत हुई थी। अब सरकार ने प्रदेश के सभी जनपदों में वर्ष 2010 के बाद हुई सभी परिषदीय शिक्षक नियुक्ति की जांच शुरु कर दी है। इस मामले में जनपद में अभी जांच प्रक्रिया तो शुरू नहीं हुई है। लेकिन, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मायाराम ने वर्ष 2010 के बाद हुई नियुक्तियों का ब्योरा इकठ्ठा करना शुरु कर दिया है। जांच के लिए शासन द्वारा कई बिंदु भी निर्धारित किए गए हैं। यदि जांच में कोई फर्जी नियुक्ति पाई जाती है तो संबंधित शिक्षक के अलावा संबंधित पटल सहायकों, अधिकारियों व दलालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जांच के बिंदु भी हैं निर्धारित
जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में फर्जी नियुक्तियों को पकड़ने के लिए जांच के कई बिंदु भी निर्धारित किए गए हैं। वर्तमान में जो शिक्षक विद्यालय में पढ़ा रहे हैं, वह वहीं है जिनके नाम का चयन हुआ है। इसको प्रकाशित मेरिट सूची से मिलाया जाएगा। कोषागार में वेतन सूची प्राप्त कर यह भी जांच की जाएगी कि जो शिक्षक अभी कार्यरत है, क्या वे वहीं चयनित शिक्षक हैं जिनके नाम चयन वर्ष की मेरिट सूची में थे। देखा जाएगा कि जिन शिक्षकों का नाम चयन सूची में था, उन्होंने इसके लिए कोई आवेदन किया था या नहीं। इस संदर्भ में विज्ञान, आवेदन पत्र, चयनित अभ्यर्थी की आवश्यकता योग्यता की जांच भी होगी। इसके अलावा शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन भी कराया जाएगा, जो शैक्षिक प्रमाणपत्र अभ्यर्थी ने लगाए हैं, उनका असली धारक वहीं अभ्यर्थी है। प्रमाणपत्र का संबंधित बोर्ड से सत्यापन कराया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति, जनजाति, तथा अन्य आरक्षित वर्ग के प्रमाणपत्रों का फिर से सत्यापन कराया जाएगा।
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सीधे नियुक्ति पत्र पाने वाले संदेह के घेरे में
शासन को ऐसी शिकायतें मिली हैं, इसमें अभ्यर्थियों ने सीधे बेसिक शिक्षा कार्यालय से नियुक्ति पत्र हासिल किए है। ऐसे शिक्षकों की सूची भी तैयार की जाएगी, उन्होंने नियुक्ति पत्र रजिस्टर्ड डाक की बजाय सीधे प्राप्त किए हैं और अपनी योगदान आख्या स्कूलों में दी है।

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इनका कहना है
वर्ष 2010 के बाद से हुई परिषदीय शिक्षकों की तैनाती का ब्योरा जुटाने के लिए सहायक पटल प्रभारी को निर्देशित कर दिया गया है। बाकी की जांच शासन के निर्देशन के क्रम में जिलाधिकारी की निगरानी में कराई जाएगी।
-मायाराम
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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