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Lalitpur News: उपभोक्ता फोरम ने बिजली विभाग पर लगाया 10 हजार का जुर्माना
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कनेक्शन के बाद भी न तो प्रपत्र दिए न ही बिल उपलब्ध कराए, बाद में 4,47,957 दर्शाया
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। एक व्यक्ति को नलकूप संयोजन के प्रपत्र न देने और बिल जमा करने के बाद भी अत्यधिक राशि का बिल देने के मामले में उपभोक्ता फोरम की अदालत ने बिजली विभाग पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता को मानसिक कष्ट पहुंचाने पर अदालत ने यह निर्देश बिजली विभाग को दिए।
थाना बानपुर के ग्राम बिल्ला निवासी गंगुवा ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि 15 अप्रैल 2017 को नलकूप संयोजन के लिए आवेदन किया था। इस पर उसने एसडीओ से संपर्क किया। अधिकारी के कहने पर उसने ग्राम अजनौरा निवासी राजाबाबू एवं विनय मिश्रा से संपर्क किया। उनके कहने पर एक लाख रुपये की राशि उनके पास जमा की लेकिन उन्होंने उसकी कोई रसीद नहीं दी।
हालांकि उसका विद्युत संयोजन स्थापित कर दिया गया। इसके बाद उसे विद्युत बिल भी नहीं दिया गया। इस पर उसने विभाग में संपर्क किया तो उस पर 37,653 रुपये बकाया बताया गया। इस पर उसने 19 हजार रुपये जमा कर दिया। 30 सितंबर 2021 को बिल अदायगी के बाद भी उसे बिल नहीं दिया गया। इसके बाद उसने कार्यालय में संपर्क किया तो नेट के माध्यम से 16 मई 2022 को उस पर 3,36,580 रुपये का बिल उपलब्ध कराया गया।
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उसने बिल सही उपलब्ध कराने को कहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उस पर 30 जून 2021 से पांच जनवरी 2024 तक विद्युत बिल की देयता पाई जाती है लेकिन बिजली विभाग द्वारा पांच जनवरी 2024 को उसे 4,47,957 रुपये का बिल बकाया प्रदर्शित किया जा रहा है, जो अत्यधिक है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत ने इस मामले में निर्णय दिया कि 45 दिन के भीतर उपभोक्ता के बिजली संयोजन से संबंधित सभी प्रपत्र उसे उपलब्ध कराएं और मानक के अनुसार सही बिजली का बिल जारी किया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। एक व्यक्ति को नलकूप संयोजन के प्रपत्र न देने और बिल जमा करने के बाद भी अत्यधिक राशि का बिल देने के मामले में उपभोक्ता फोरम की अदालत ने बिजली विभाग पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता को मानसिक कष्ट पहुंचाने पर अदालत ने यह निर्देश बिजली विभाग को दिए।
थाना बानपुर के ग्राम बिल्ला निवासी गंगुवा ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि 15 अप्रैल 2017 को नलकूप संयोजन के लिए आवेदन किया था। इस पर उसने एसडीओ से संपर्क किया। अधिकारी के कहने पर उसने ग्राम अजनौरा निवासी राजाबाबू एवं विनय मिश्रा से संपर्क किया। उनके कहने पर एक लाख रुपये की राशि उनके पास जमा की लेकिन उन्होंने उसकी कोई रसीद नहीं दी।
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हालांकि उसका विद्युत संयोजन स्थापित कर दिया गया। इसके बाद उसे विद्युत बिल भी नहीं दिया गया। इस पर उसने विभाग में संपर्क किया तो उस पर 37,653 रुपये बकाया बताया गया। इस पर उसने 19 हजार रुपये जमा कर दिया। 30 सितंबर 2021 को बिल अदायगी के बाद भी उसे बिल नहीं दिया गया। इसके बाद उसने कार्यालय में संपर्क किया तो नेट के माध्यम से 16 मई 2022 को उस पर 3,36,580 रुपये का बिल उपलब्ध कराया गया।
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उसने बिल सही उपलब्ध कराने को कहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उस पर 30 जून 2021 से पांच जनवरी 2024 तक विद्युत बिल की देयता पाई जाती है लेकिन बिजली विभाग द्वारा पांच जनवरी 2024 को उसे 4,47,957 रुपये का बिल बकाया प्रदर्शित किया जा रहा है, जो अत्यधिक है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत ने इस मामले में निर्णय दिया कि 45 दिन के भीतर उपभोक्ता के बिजली संयोजन से संबंधित सभी प्रपत्र उसे उपलब्ध कराएं और मानक के अनुसार सही बिजली का बिल जारी किया जाए।