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Lalitpur News: कॉक्लियर इंप्लांट से मूकबधिर बच्ची की जिंदगी बदली
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले की एक जन्मजात मूकबधिर बच्ची को कॉक्लियर इंप्लांट के जरिए नई जिंदगी मिली है। वर्ष 2023 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम ने बच्ची को चिह्नित किया था। इसके बाद दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की पहल पर जांच कराई गई और कॉक्लियर इंप्लांट कराया गया। लगातार दो वर्ष की थैरेपी के बाद बच्ची अब सुनने और बोलने लगी है।
ब्लॉक तालबेहट के ग्राम बिजरौठा के मजरा दिगारा निवासी अरविंद की पुत्री इच्छा का जन्म वर्ष 2020 में हुआ था। एक वर्ष की आयु तक बच्ची न तो बोल पा रही थी और न ही सुन रही थी। परिजनों ने कुछ समय तक सुधार की उम्मीद की, लेकिन वर्ष 2023 में आरबीएसके टीम की स्क्रीनिंग के दौरान बच्ची को जन्मजात मूकबधिर पाया गया।
टीम ने आवश्यक दस्तावेज तैयार कर बच्ची को परिजनों के साथ एनएचएम के अनुबंधित अस्पताल, कानपुर भेजा। वहां बीईआरए (बेरा) जांच में बच्ची में गंभीर श्रवण बाधिता की पुष्टि हुई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कॉक्लियर इंप्लांट की सलाह दी, जिस पर परिजनों की सहमति के बाद फरवरी 2024 में ऑपरेशन कराया गया। इंप्लांट के बाद एक वर्ष तक कानपुर में नियमित थैरेपी कराई गई। वर्ष 2025 से नई तहसील स्थित सिद्धि विनायक हॉस्पिटल में बच्ची की थैरेपी जारी है। उपचार और लगातार प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप अब बच्ची सुनने और बोलने लगी है तथा सामान्य बच्चों की तरह विद्यालय में अध्ययन कर रही है।
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दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार थैरेपी अभी जारी है और आगे बच्ची में और अधिक सुधार की संभावना है।
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दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने दिलाया योजना का लाभ
कानपुर में स्क्रीनिंग के बाद कॉक्लियर इंप्लांट की सलाह मिलने पर आरबीएसके टीम ने मामले की जानकारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को दी। विभाग ने बच्ची का पंजीकरण कर कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के तहत प्रक्रिया शुरू कराई। उपचार के लिए करीब छह लाख रुपये की राशि एनएचएम से अनुबंधित कंपनी को उपलब्ध कराई गई। योजना के सहयोग से कराए गए उपचार का ही परिणाम है कि बच्ची अब सुनने और बोलने में सक्षम हो सकी है।
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कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत जन्मजात विकृतियों से प्रभावित बच्चों का उपचार कराया जाता है। उपचार पर आने वाला खर्च योजना के तहत वहन किया जाता है।
शुभांशु सोनकर, दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी
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-आरबीएसके की टीम बच्चों का चिह्नीकरण कर जन्मजात विकृतियों से प्रभावित बच्चों को उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराती है।
— डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ
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ललितपुर। जिले की एक जन्मजात मूकबधिर बच्ची को कॉक्लियर इंप्लांट के जरिए नई जिंदगी मिली है। वर्ष 2023 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम ने बच्ची को चिह्नित किया था। इसके बाद दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की पहल पर जांच कराई गई और कॉक्लियर इंप्लांट कराया गया। लगातार दो वर्ष की थैरेपी के बाद बच्ची अब सुनने और बोलने लगी है।
ब्लॉक तालबेहट के ग्राम बिजरौठा के मजरा दिगारा निवासी अरविंद की पुत्री इच्छा का जन्म वर्ष 2020 में हुआ था। एक वर्ष की आयु तक बच्ची न तो बोल पा रही थी और न ही सुन रही थी। परिजनों ने कुछ समय तक सुधार की उम्मीद की, लेकिन वर्ष 2023 में आरबीएसके टीम की स्क्रीनिंग के दौरान बच्ची को जन्मजात मूकबधिर पाया गया।
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टीम ने आवश्यक दस्तावेज तैयार कर बच्ची को परिजनों के साथ एनएचएम के अनुबंधित अस्पताल, कानपुर भेजा। वहां बीईआरए (बेरा) जांच में बच्ची में गंभीर श्रवण बाधिता की पुष्टि हुई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कॉक्लियर इंप्लांट की सलाह दी, जिस पर परिजनों की सहमति के बाद फरवरी 2024 में ऑपरेशन कराया गया। इंप्लांट के बाद एक वर्ष तक कानपुर में नियमित थैरेपी कराई गई। वर्ष 2025 से नई तहसील स्थित सिद्धि विनायक हॉस्पिटल में बच्ची की थैरेपी जारी है। उपचार और लगातार प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप अब बच्ची सुनने और बोलने लगी है तथा सामान्य बच्चों की तरह विद्यालय में अध्ययन कर रही है।
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दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार थैरेपी अभी जारी है और आगे बच्ची में और अधिक सुधार की संभावना है।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने दिलाया योजना का लाभ
कानपुर में स्क्रीनिंग के बाद कॉक्लियर इंप्लांट की सलाह मिलने पर आरबीएसके टीम ने मामले की जानकारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को दी। विभाग ने बच्ची का पंजीकरण कर कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के तहत प्रक्रिया शुरू कराई। उपचार के लिए करीब छह लाख रुपये की राशि एनएचएम से अनुबंधित कंपनी को उपलब्ध कराई गई। योजना के सहयोग से कराए गए उपचार का ही परिणाम है कि बच्ची अब सुनने और बोलने में सक्षम हो सकी है।
कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत जन्मजात विकृतियों से प्रभावित बच्चों का उपचार कराया जाता है। उपचार पर आने वाला खर्च योजना के तहत वहन किया जाता है।
शुभांशु सोनकर, दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी
-आरबीएसके की टीम बच्चों का चिह्नीकरण कर जन्मजात विकृतियों से प्रभावित बच्चों को उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराती है।
— डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ