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ग्राम प्रधान के चुनाव की सरगर्मी बढ़ी
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Thu, 12 Nov 2015 12:26 AM IST
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जाखलौन (ललितपुर)। ग्राम प्रधान पद की चुनाव सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। चुनाव से पहले ही कुछ दावेदारों ने आवास, कृषि भूमि पट्टा और शौचालय के लाभार्थियों की सूची बनानी शुरू कर दी है।
कस्बा की दुकानों से लेकर चौराहों पर नेताओं की भीड़ नजर आने लगी है। इस बार जाखलौन से ग्राम प्रधान पद पर जिले के बहुत से कद्दावर नेताओं की नजर टिकी हुई है। वह मतदाताओं के पास जा रहे हैं। इस पर मतदाता भी उनकी गल्तियों का अहसास करा रहे हैं। लेकिन, समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिए जाने के कारण युवाओं में आक्रोश है और यही कारण है कि युवाओं ने परंपरागत राजनीतिज्ञों को नकारने का मन बना लिया है। गांव की बीपीएल सूची में बहुत से संपन्न परिवार के लोगों के नाम शामिल करने, वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग पेंशन और इंदिरा आवास के अपात्र लाभार्थियों का चयन मिल बांटकर कर लिए जाने से मतदाताओं में आक्रोश है। शिक्षित और जागरूक मतदाता हाल में ही संपन्न हुए जिला पंचायत चुनाव में मतदाताओं को शराब आदि बांटे जाने से नाराज हैं।
मतदाता सूची में कुछ प्रभावशाली लोगों ने बाहरी मतदाताओं के नाम अपने परिवार में दर्ज करा लिए हैं, जिनका विरोध हो रहा है। मतदाता क्रमांक 5496 में दर्ज व्यक्ति उज्जैन में निवास करते हैं, मतदाता क्रमांक 2291 से 2295 पर दर्ज मतदाता चंदेरी में रहते हैं। मतदाता क्रमांक 2299 में दर्ज मतदाता ललितपुर में रहते हैं तथा मतदाता क्रमांक 2321, 2340, 2349 व 2352 पर दर्ज लड़कियों की कई वर्ष पूर्व शादी हो चुकी है, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं। वहीं, बहुत से मतदाता ऐसे हैं जो गांव में रहते हैं, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है। चुनाव जीतने के लिए कुछ दावेदारों ने मतदाता सूची में अपने हिसाब से फेरबदल करा लिया है।
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वहीं, चुनाव लड़ने के कुछ दावेदारों द्वारा आमजन को आवास, कृषि भूमि का पट्टा और शौचालय की सुविधा मुहैया कराने के लिए उनकी गुपचुप सूची तैयार कर ली है। इससे गरीब वृद्धों, विकलांग और विधवा महिलाओं के साथ भावनात्मक खिलवाड़ किया जा रहा है। चुनाव में प्रभावशाली लोगों ने खुलकर दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है, जिससे विकास के मुद्दे हाशिए पर चले गए हैं। गांव के बेरोजगार और नशा करने वाले युवा प्रधान पद के दावेदारों के हाथ ही कठपुतली बने हुए हैं। ऐसे में प्रशासन के समक्ष शांतिपूर्ण निर्वाचन की चुनौती है।
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कस्बा की दुकानों से लेकर चौराहों पर नेताओं की भीड़ नजर आने लगी है। इस बार जाखलौन से ग्राम प्रधान पद पर जिले के बहुत से कद्दावर नेताओं की नजर टिकी हुई है। वह मतदाताओं के पास जा रहे हैं। इस पर मतदाता भी उनकी गल्तियों का अहसास करा रहे हैं। लेकिन, समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिए जाने के कारण युवाओं में आक्रोश है और यही कारण है कि युवाओं ने परंपरागत राजनीतिज्ञों को नकारने का मन बना लिया है। गांव की बीपीएल सूची में बहुत से संपन्न परिवार के लोगों के नाम शामिल करने, वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग पेंशन और इंदिरा आवास के अपात्र लाभार्थियों का चयन मिल बांटकर कर लिए जाने से मतदाताओं में आक्रोश है। शिक्षित और जागरूक मतदाता हाल में ही संपन्न हुए जिला पंचायत चुनाव में मतदाताओं को शराब आदि बांटे जाने से नाराज हैं।
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मतदाता सूची में कुछ प्रभावशाली लोगों ने बाहरी मतदाताओं के नाम अपने परिवार में दर्ज करा लिए हैं, जिनका विरोध हो रहा है। मतदाता क्रमांक 5496 में दर्ज व्यक्ति उज्जैन में निवास करते हैं, मतदाता क्रमांक 2291 से 2295 पर दर्ज मतदाता चंदेरी में रहते हैं। मतदाता क्रमांक 2299 में दर्ज मतदाता ललितपुर में रहते हैं तथा मतदाता क्रमांक 2321, 2340, 2349 व 2352 पर दर्ज लड़कियों की कई वर्ष पूर्व शादी हो चुकी है, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं। वहीं, बहुत से मतदाता ऐसे हैं जो गांव में रहते हैं, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है। चुनाव जीतने के लिए कुछ दावेदारों ने मतदाता सूची में अपने हिसाब से फेरबदल करा लिया है।
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वहीं, चुनाव लड़ने के कुछ दावेदारों द्वारा आमजन को आवास, कृषि भूमि का पट्टा और शौचालय की सुविधा मुहैया कराने के लिए उनकी गुपचुप सूची तैयार कर ली है। इससे गरीब वृद्धों, विकलांग और विधवा महिलाओं के साथ भावनात्मक खिलवाड़ किया जा रहा है। चुनाव में प्रभावशाली लोगों ने खुलकर दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है, जिससे विकास के मुद्दे हाशिए पर चले गए हैं। गांव के बेरोजगार और नशा करने वाले युवा प्रधान पद के दावेदारों के हाथ ही कठपुतली बने हुए हैं। ऐसे में प्रशासन के समक्ष शांतिपूर्ण निर्वाचन की चुनौती है।