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Lalitpur News: खरना की रस्म से की गई छठी माई की पूजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। यहां रह रहे बिहार व पूर्वांचल के लोगों ने बुधवार को दूसरे दिन खरना की रस्म के साथ छठी माई की विधि विधान से पूजा अर्चना की। महिलाओं ने छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत रखना शुरू किया। अब बृहस्पतिवार को सुम्मेरा तालाब पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होंगे।
विभिन्न विभागों में बिहार व पूर्वांचल के कर्मचारी एवं कामगारों ने छठ पूजा के दूसरे दिन बुधवार को विधि विधान से खरना की रस्म निभाई। उन्होंने केले के पत्ते पर केला, रोटी और खीर को रखा और उस पर रोली व फूल पत्ती चढ़ाते हुए अगरबत्ती से आरती की।
जल अर्पित करते हुए रात्रि के समय छठी माई की पूजा की और परंपरा अनुसार केले के पत्ते पर ही रखकर खीर रोटी खाई। इसके बाद महिलाओं ने निर्जला व्रत शुरू किया जो छत्तीस घंटे तक चलेगा।
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यह व्रत वह शुक्रवार सुबह खोलेंगी। जबकि, तीसरे दिन बृहस्पतिवार की शाम को लोग फल, गन्ना एवं ठेकुआ आदि को दउरा में सजाकर छठ पूजा के लिए शहर के सुम्मेरा तालाब पर जाएंगे और वहां सूप में फल सजाकर पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करके डूबते सूर्य भगवान को दूध से अर्घ्य देंगे। शुक्रवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन करेंगे।म
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ललितपुर। यहां रह रहे बिहार व पूर्वांचल के लोगों ने बुधवार को दूसरे दिन खरना की रस्म के साथ छठी माई की विधि विधान से पूजा अर्चना की। महिलाओं ने छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत रखना शुरू किया। अब बृहस्पतिवार को सुम्मेरा तालाब पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होंगे।
विभिन्न विभागों में बिहार व पूर्वांचल के कर्मचारी एवं कामगारों ने छठ पूजा के दूसरे दिन बुधवार को विधि विधान से खरना की रस्म निभाई। उन्होंने केले के पत्ते पर केला, रोटी और खीर को रखा और उस पर रोली व फूल पत्ती चढ़ाते हुए अगरबत्ती से आरती की।
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जल अर्पित करते हुए रात्रि के समय छठी माई की पूजा की और परंपरा अनुसार केले के पत्ते पर ही रखकर खीर रोटी खाई। इसके बाद महिलाओं ने निर्जला व्रत शुरू किया जो छत्तीस घंटे तक चलेगा।
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यह व्रत वह शुक्रवार सुबह खोलेंगी। जबकि, तीसरे दिन बृहस्पतिवार की शाम को लोग फल, गन्ना एवं ठेकुआ आदि को दउरा में सजाकर छठ पूजा के लिए शहर के सुम्मेरा तालाब पर जाएंगे और वहां सूप में फल सजाकर पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करके डूबते सूर्य भगवान को दूध से अर्घ्य देंगे। शुक्रवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन करेंगे।म