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ऐतिहासिक है छपरादेवी शक्ति पीठ, प्रेतबाधा निवारण को आते श्रद्घालु
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मड़ावरा स्थित छपरा देवी मंदिर सिद्घपीठ
- फोटो : LALITPUR
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मड़ावरा / ललितपुर। तहसील मुख्यालय पर स्थित रोहिणी बांध की तलहटी में स्थित छपरा देवी शक्ति पीठ मंदिर प्रसिद्ध है। मंदिर में स्थापित देव मूर्तियां भी ऐतिहासिक हैं। माता का मंदिर मनोकामना व सुख शांति प्राप्ति के लिए आस्था का केंद्र बना है। मान्यता है कि छपरा देवी प्रेत बाधा निवारण के लिए अधिक लोग आते हैं। नवरात्र के साथ ही वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
मड़ावरा क्षेत्र में मंदिर का इतिहास अधिक पुराना है। मंदिर के प्रति क्षेत्रवासी ही नहीं दूर-दूर से भी श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के लिए आते हैं। कस्बा के पूर्व प्रधान व मंदिर व्यवस्थापक राकेश सोनी बताते हैं कि कई सौ साल पूर्व रोहिणी बांध के भराव में छपरा गांव हुआ करता था, जहां पर प्राचीन छपरा देवी शक्ति पीठ हुआ करती थी। 51 शक्तिपीठों में से एक छपरा शक्तिपीठ मंदिर में अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमा स्थापित थी। बताया जाता है कि कालांतर में किसी श्राप के चलते छपरा गांव धीरे-धीरे वीरान हो गया।
ग्रामीण अन्य स्थानों पर जाकर बस गए। गांव में मंदिर ही शेष बचा और लोग जब को आते तब ही मंदिर में भजन-कीर्तन होते व नवरात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा जवारे चढ़ाए जाते रहे। बाद में गांव की खाली जमीन पर रोहिणी बांध बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। तब वर्ष 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने बांध का शिलान्यास किया था। छपरामाता मंदिर डूब क्षेत्र में आने पर अराजक तत्वों ने कुछ प्रतिमाओं को खंडित कर दिया था और अष्टधातु की प्राचीन देवी प्रतिमा चोरी कर ले गए थे । बांध निर्माण के ठेकेदार राधामोहन दुबे द्वारा पानी में डूब रहे मंदिर से देव प्रतिमाओं व प्राचीन शिवलिंग आदि को बांध की तलहटी में छोटा सा मंदिर बनवा कर स्थापित करा दिया गया। मंदिर के प्रति लोगों में आस्था बढ़ती गई और कस्ब वासियों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया, जिसके बाद संगमरमर निर्मित अष्टभुजी सिंहसवार दुर्गा प्रतिमा स्थापना और सत्संग भवन का निर्माण कराया। मंदिर में श्रीराम दरबार, लक्ष्मीनारायण, श्री गनेश, वीर हनुमान, श्रीमहादेव की प्रतिमाओं की स्थापना कराई गई। अब छपरादेवी मंदिर पर देवा क्लब द्वारा प्रतिवर्ष विजयदशमी के दिन शतचंडी महायज्ञ व विशाल कन्याभोज और भंडारे का आयोजन किया जाता है।
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प्रेत बाधा से मिलती है मुक्ति
छपरा देवी शक्तिपीठ मंदिर के पुजारी हरिराम बताते हैं कि मंदिर के प्रति लोगों की असीम आस्था है। लोगों की तमाम मनोकामनाएं देवी की कृपा से पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि प्रेतबाधा से पीड़ित को मंदिर के अंदर पहुंचते ही राहत प्राप्त होती है। इससे वर्ष भर मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
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मड़ावरा क्षेत्र में मंदिर का इतिहास अधिक पुराना है। मंदिर के प्रति क्षेत्रवासी ही नहीं दूर-दूर से भी श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के लिए आते हैं। कस्बा के पूर्व प्रधान व मंदिर व्यवस्थापक राकेश सोनी बताते हैं कि कई सौ साल पूर्व रोहिणी बांध के भराव में छपरा गांव हुआ करता था, जहां पर प्राचीन छपरा देवी शक्ति पीठ हुआ करती थी। 51 शक्तिपीठों में से एक छपरा शक्तिपीठ मंदिर में अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमा स्थापित थी। बताया जाता है कि कालांतर में किसी श्राप के चलते छपरा गांव धीरे-धीरे वीरान हो गया।
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ग्रामीण अन्य स्थानों पर जाकर बस गए। गांव में मंदिर ही शेष बचा और लोग जब को आते तब ही मंदिर में भजन-कीर्तन होते व नवरात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा जवारे चढ़ाए जाते रहे। बाद में गांव की खाली जमीन पर रोहिणी बांध बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। तब वर्ष 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने बांध का शिलान्यास किया था। छपरामाता मंदिर डूब क्षेत्र में आने पर अराजक तत्वों ने कुछ प्रतिमाओं को खंडित कर दिया था और अष्टधातु की प्राचीन देवी प्रतिमा चोरी कर ले गए थे । बांध निर्माण के ठेकेदार राधामोहन दुबे द्वारा पानी में डूब रहे मंदिर से देव प्रतिमाओं व प्राचीन शिवलिंग आदि को बांध की तलहटी में छोटा सा मंदिर बनवा कर स्थापित करा दिया गया। मंदिर के प्रति लोगों में आस्था बढ़ती गई और कस्ब वासियों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया, जिसके बाद संगमरमर निर्मित अष्टभुजी सिंहसवार दुर्गा प्रतिमा स्थापना और सत्संग भवन का निर्माण कराया। मंदिर में श्रीराम दरबार, लक्ष्मीनारायण, श्री गनेश, वीर हनुमान, श्रीमहादेव की प्रतिमाओं की स्थापना कराई गई। अब छपरादेवी मंदिर पर देवा क्लब द्वारा प्रतिवर्ष विजयदशमी के दिन शतचंडी महायज्ञ व विशाल कन्याभोज और भंडारे का आयोजन किया जाता है।
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प्रेत बाधा से मिलती है मुक्ति
छपरा देवी शक्तिपीठ मंदिर के पुजारी हरिराम बताते हैं कि मंदिर के प्रति लोगों की असीम आस्था है। लोगों की तमाम मनोकामनाएं देवी की कृपा से पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि प्रेतबाधा से पीड़ित को मंदिर के अंदर पहुंचते ही राहत प्राप्त होती है। इससे वर्ष भर मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

छपरादेवी मंदिर में भगवान की प्रतिमाएं- फोटो : LALITPUR