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केंद्रीय दल ने राहत कार्यों की टटोली नब्ज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2016 01:16 AM IST
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servey team, lalitpur news
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर/तालबेहट। केंद्र से आए तीन सदस्यीय दल ने ललितपुर और विकास खंड तालबेहट के ग्रामों में जाकर सूखा राहत कार्यों की हकीकत परखी। इस दौरान उन्होंने तालाब के गहरीकरण, कूप, चेकडैम निर्माण के साथ सूखा राहत सामग्री वितरण की जानकारी प्राप्त की। साथ ही ग्रामीणों से भी सुझाव मांग। वह अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को सौंपेंगे।
प्रदेश सरकार ने ललितपुर जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके मद्देनजर तीन सदस्यीय केंद्रीय दल ने जिले में कराए जा रहे राहत कार्यों की नब्ज टटोलने के लिए भ्रमण किया। उन्होंने सबसे पहले निकटवर्ती ग्राम पटौरा कलां में सिंचाई विभाग के तालाब के गहरीकरण कार्य को देखा। यहां ग्रामीणों से उन्होंने समाजवादी सूखा राहत सामग्री वितरण की जानकारी प्राप्त की। यहां से लौटते समय शहर के मुहल्ला नेहरू नगर में पेयजल की सच्चाई जानी। उन्होंने खराब हैंडपंप व टैंकर जलापूर्ति की भी जानकारी प्राप्त की। इसके बाद भ्रमण दल ग्राम बीघाखेत पहुंचा। यहां उन्होंने तालाब का गहरीकरण देखा।
ग्राम भौंरसिल में मनरेगा के तहत तालाब के काम और रोजगार की सच्चाई जानी। तहसील तालबेहट अंतर्गत गांवों में चेकडैम, कूप व तालाब के कार्य देखे। भ्रमण दल में वित्त मंत्रालय के स्टेटिकल आफीसर आरबी कॉल, नीति आयोग के सीनियर रिसर्च आफीसर एग्रीकल्चर रामानंद व ग्रामीण मंत्रालय के इकोनोमिक आफीसर अमित कुमार शामिल थे। भ्रमण के समय अपर जिलाधिकारी एमके त्रिवेदी, उपायुक्त (श्रम व रोजगार) एनडी द्विवेदी, तहसीलदार सदर अवधेश निगम व ब्लाक से संबंधित अधिकारी साथ रहे।
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वहीं, केंद्रीय दल ने तालबेहट के ग्राम चन्द्रापुर में जाकर ग्रामीणों के सुझावों को सुना। मंगलवार को दोपहर में तालबेहट पहुंचे तीन सदस्य दल के सदस्यों ने सबसे पहले नगर की ऐतिहासिक मानसरोवर झील को देखा। उन्होंने वोट क्लब पर जाकर वोटों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इसके साथ ही झील को पर्यटन के रूप में विकसित करने की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद टीम ग्राम चंद्रापुर पहुंची। जहां एक कार्यदायी संस्था के निर्देशन में ग्रामीणों के समग्र प्रयास से गांव के हैंडपंपों में पानी के जल स्तर को बनाकर रखने के दावों को सुना।
क्षेत्रीय निवासी संजय सिंह, पुष्पा, लक्ष्मी, बृजेश शर्मा, भूपेंद्र कुमार ने बताया कि गांव के चैक डैम में पानी के संचय से प्रतिदिन आसपास के चार गांवों के पशु पालकों के पशुओं के अलावा मध्य प्रदेश से आए एक पशु पालक की सौ बकरियां प्रतिदिन पानी पी रही है। इसके बाद केन्द्रीय दल के प्रमुख डा. आर वी कौल ने कहा कि आप लोगों को केंद्र सरकार द्वारा वर्ष में दो बार जल परियोजना विकसित करने के लिए माह जून और अक्टूबर में हर वार पैसा आता है। उस पैसें का उपयोग जल संरक्षण पर करें।
टीम के सदस्य डा. रामानंद ने मिजोरम और राजस्थान में जल संरक्षण के बारे में जानकारी दी। इसके बाद टीम के सदस्य माताटीला बांध चले गए।
इस मौके पर केंद्रीय दल के सदस्य अमित कुमार, राज्य सरकार के प्रतिनिधि जीटी सिंह, अपर जिलाधिकारी एमके त्रिवेदी, उपजिलाधिकारी रत्नाकर मिश्र, तहसीलदार प्रीति जैन, खंड विकास अधिकारी अजय कुमार, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पंकज सोनी, अजय कुमार, लेखपाल सुरेंद्र सोनी मौजूद रहें।
योजनाएं बनते समय दे जानकारी: आर बी कौल
तालबेहट (ललितपुर)। चंद्रापुर के चैक डैम का निरीक्षण के दौरान पत्रकारों ने टीम के प्रभारी आरबी कौल से क्षेत्र में तालाब गहरीकरण में हो रही अनियमितताओं एवं सिल्ट सफाई के स्थान पर बाहर से मिट्टी लाकर डाले जाने की बात कही। इस पर उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाएं बनाते समय आप लोगों को विभागीय अधिकारियों को अवगत कराना चाहिए, जिससे सही योजनाएं बन सकें।
20-20 लाख रुपये से अधिक की कीमत से बने चैक डैंमों में एक बूंद पानी न होने और डेढ़ लाख रुपये खर्च करके बने चैक डैम में पर्याप्त पानी है, ,ऐसी स्थिति में सरकार बडे़ बडे़ चैक डैमों के स्थान पर क्यों पैसा खर्च करती है। इस पर वह हंस दिए, परंतु कुछ बोलें नहीं।
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प्रदेश सरकार ने ललितपुर जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके मद्देनजर तीन सदस्यीय केंद्रीय दल ने जिले में कराए जा रहे राहत कार्यों की नब्ज टटोलने के लिए भ्रमण किया। उन्होंने सबसे पहले निकटवर्ती ग्राम पटौरा कलां में सिंचाई विभाग के तालाब के गहरीकरण कार्य को देखा। यहां ग्रामीणों से उन्होंने समाजवादी सूखा राहत सामग्री वितरण की जानकारी प्राप्त की। यहां से लौटते समय शहर के मुहल्ला नेहरू नगर में पेयजल की सच्चाई जानी। उन्होंने खराब हैंडपंप व टैंकर जलापूर्ति की भी जानकारी प्राप्त की। इसके बाद भ्रमण दल ग्राम बीघाखेत पहुंचा। यहां उन्होंने तालाब का गहरीकरण देखा।
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ग्राम भौंरसिल में मनरेगा के तहत तालाब के काम और रोजगार की सच्चाई जानी। तहसील तालबेहट अंतर्गत गांवों में चेकडैम, कूप व तालाब के कार्य देखे। भ्रमण दल में वित्त मंत्रालय के स्टेटिकल आफीसर आरबी कॉल, नीति आयोग के सीनियर रिसर्च आफीसर एग्रीकल्चर रामानंद व ग्रामीण मंत्रालय के इकोनोमिक आफीसर अमित कुमार शामिल थे। भ्रमण के समय अपर जिलाधिकारी एमके त्रिवेदी, उपायुक्त (श्रम व रोजगार) एनडी द्विवेदी, तहसीलदार सदर अवधेश निगम व ब्लाक से संबंधित अधिकारी साथ रहे।
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वहीं, केंद्रीय दल ने तालबेहट के ग्राम चन्द्रापुर में जाकर ग्रामीणों के सुझावों को सुना। मंगलवार को दोपहर में तालबेहट पहुंचे तीन सदस्य दल के सदस्यों ने सबसे पहले नगर की ऐतिहासिक मानसरोवर झील को देखा। उन्होंने वोट क्लब पर जाकर वोटों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इसके साथ ही झील को पर्यटन के रूप में विकसित करने की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद टीम ग्राम चंद्रापुर पहुंची। जहां एक कार्यदायी संस्था के निर्देशन में ग्रामीणों के समग्र प्रयास से गांव के हैंडपंपों में पानी के जल स्तर को बनाकर रखने के दावों को सुना।
क्षेत्रीय निवासी संजय सिंह, पुष्पा, लक्ष्मी, बृजेश शर्मा, भूपेंद्र कुमार ने बताया कि गांव के चैक डैम में पानी के संचय से प्रतिदिन आसपास के चार गांवों के पशु पालकों के पशुओं के अलावा मध्य प्रदेश से आए एक पशु पालक की सौ बकरियां प्रतिदिन पानी पी रही है। इसके बाद केन्द्रीय दल के प्रमुख डा. आर वी कौल ने कहा कि आप लोगों को केंद्र सरकार द्वारा वर्ष में दो बार जल परियोजना विकसित करने के लिए माह जून और अक्टूबर में हर वार पैसा आता है। उस पैसें का उपयोग जल संरक्षण पर करें।
टीम के सदस्य डा. रामानंद ने मिजोरम और राजस्थान में जल संरक्षण के बारे में जानकारी दी। इसके बाद टीम के सदस्य माताटीला बांध चले गए।
इस मौके पर केंद्रीय दल के सदस्य अमित कुमार, राज्य सरकार के प्रतिनिधि जीटी सिंह, अपर जिलाधिकारी एमके त्रिवेदी, उपजिलाधिकारी रत्नाकर मिश्र, तहसीलदार प्रीति जैन, खंड विकास अधिकारी अजय कुमार, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पंकज सोनी, अजय कुमार, लेखपाल सुरेंद्र सोनी मौजूद रहें।
योजनाएं बनते समय दे जानकारी: आर बी कौल
तालबेहट (ललितपुर)। चंद्रापुर के चैक डैम का निरीक्षण के दौरान पत्रकारों ने टीम के प्रभारी आरबी कौल से क्षेत्र में तालाब गहरीकरण में हो रही अनियमितताओं एवं सिल्ट सफाई के स्थान पर बाहर से मिट्टी लाकर डाले जाने की बात कही। इस पर उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाएं बनाते समय आप लोगों को विभागीय अधिकारियों को अवगत कराना चाहिए, जिससे सही योजनाएं बन सकें।
20-20 लाख रुपये से अधिक की कीमत से बने चैक डैंमों में एक बूंद पानी न होने और डेढ़ लाख रुपये खर्च करके बने चैक डैम में पर्याप्त पानी है, ,ऐसी स्थिति में सरकार बडे़ बडे़ चैक डैमों के स्थान पर क्यों पैसा खर्च करती है। इस पर वह हंस दिए, परंतु कुछ बोलें नहीं।