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Lalitpur News: वेंटिलेटर पर सीसीयू...दवाइयों से लेकर उपकरण तक की कमी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। दिल के मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद भी जिला अस्पताल के एनसीडी सेल में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। आलम यह है कि यहां आठ वेंटिलेटर में चार कई माह से खराब पड़े हैं। दवाइयों से लेकर उपकरणों का टोटा बना हुआ है। ब्लड प्रेशर नापने वाली मैन्युअल मशीनें भी खराब पड़ी हैं। दिल का दौरा पड़ने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
जनपद में हार्ट के निजी या सरकारी डॉक्टर नहीं हैं। सामान्य फिजीशियन के सहारे ही हृदय रोगियों का उपचार किया जाता है। हालत बिगड़ने पर मरीज को सामान्यतया मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया जाता है। कई बार मरीजों की रास्ते में मौत हो चुकी है। इसके बाद भी जिला अस्पताल स्थित गहन हृदय चिकित्सा इकाई में व्यवस्थाओं को सुधारा नहीं जा रहा है। आलम यह है कि यहां लगे आठ वेंटिलेटरों में चार खराब पड़े हैं। इनवर्टर भी ठीक से कार्य नहीं कर रहा है। कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरा, प्रिंटर भी नहीं चल रहे हैं। सीमित मशीनों से कार्य किया जा रहा है। प्रकाश के लिए एलईडी बल्ब जैसी कमियां बनी हैं।
यूनिट में दवाइयों तक का टोटा है। मरीजों को बाहर से दवाइयां लानी पड़ती हैं। दिन में तो कुछ दवाइयां मिल जाती हैं, लेकिन रात में दिक्कत बढ़ जाती है। मरीजों के सामने रेफर मात्र ही विकल्प होता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन दो से तीन मरीज हार्ट के भर्ती होते हैं। इस तरह एक सप्ताह में 21 मरीज आते हैं, इसमें पांच से सात मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
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ललितपुर। दिल के मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद भी जिला अस्पताल के एनसीडी सेल में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। आलम यह है कि यहां आठ वेंटिलेटर में चार कई माह से खराब पड़े हैं। दवाइयों से लेकर उपकरणों का टोटा बना हुआ है। ब्लड प्रेशर नापने वाली मैन्युअल मशीनें भी खराब पड़ी हैं। दिल का दौरा पड़ने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
जनपद में हार्ट के निजी या सरकारी डॉक्टर नहीं हैं। सामान्य फिजीशियन के सहारे ही हृदय रोगियों का उपचार किया जाता है। हालत बिगड़ने पर मरीज को सामान्यतया मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया जाता है। कई बार मरीजों की रास्ते में मौत हो चुकी है। इसके बाद भी जिला अस्पताल स्थित गहन हृदय चिकित्सा इकाई में व्यवस्थाओं को सुधारा नहीं जा रहा है। आलम यह है कि यहां लगे आठ वेंटिलेटरों में चार खराब पड़े हैं। इनवर्टर भी ठीक से कार्य नहीं कर रहा है। कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरा, प्रिंटर भी नहीं चल रहे हैं। सीमित मशीनों से कार्य किया जा रहा है। प्रकाश के लिए एलईडी बल्ब जैसी कमियां बनी हैं।
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यूनिट में दवाइयों तक का टोटा है। मरीजों को बाहर से दवाइयां लानी पड़ती हैं। दिन में तो कुछ दवाइयां मिल जाती हैं, लेकिन रात में दिक्कत बढ़ जाती है। मरीजों के सामने रेफर मात्र ही विकल्प होता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन दो से तीन मरीज हार्ट के भर्ती होते हैं। इस तरह एक सप्ताह में 21 मरीज आते हैं, इसमें पांच से सात मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
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