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पहले ट्रैक्टर खरीदो, फिर मिलेगा मुआवजा

Fri, 28 Oct 2016 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 28 Oct 2016 12:28 AM IST
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Buy first tractor, then the compensation will
farmer, lalitpur news - फोटो : amar ujala, lalitpur news
मड़ावरा (ललितपुर)। बंडई बांध किसानों के हित के लिए बनाया जा रहा है। लेकिन दलालों और विभागीय कर्मचारियों की गलत नियत के कारण किसानों को मुआवजा पाने के लिए ट्रैक्टर खरीदने का दबाव बनाया गया है। ऐसे में मजबूरन उन किसानों को भी ट्रैक्टर खरीदने पड़े जिनके पास जमीन ही नहीं बची। दलालों और विभागीय कर्मचारियों के शोषण से परेशान किसानों ने उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। 
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मड़ावरा तहसील में धौरीसागर गांव के पास बन रहे बंडई बांध में जिन किसानों की जमीनें गईं हैं, उनमें से दर्जनों लोगों को विभाग की बजाय दलालों के सहारे मुआवजा मिला। दलालों ने पहले ट्रैक्टर खरीदने व फिर मुआवजा दिलाने की शर्त रखी। बेहाल किसानों पर विभागीय कर्मियों का भी दबाब रहा, इससे उन किसानों को भी ट्रैक्टर खरीदना पड़ा, जिनके पास जमीन ही नहीं बची है। वहीं, कुछ किसान ऐसे हैं, जिनके पास केवल नाममात्र ही जमीन बची है। ऐसे में ट्रैक्टर से खेती करने का कोई औचित्य ही नहीं है। किसानों के साथ केवल ट्रैक्टर के नाम पर ही खेल नहीं हुआ है, बल्कि बांध निर्माण के पूर्व ही कई भूमाफियाओं ने किसानों से सस्ते दामों में जमीन खरीद ली और फिर विभाग से उन्हें मुआवजे में अधिक राशि मिली।
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 सकरा गांव के सहरिया परिवारों को ट्रैक्टर थमा दिया और फिर पूरे रुपये न मिलने पर वापस भी ले लिया गया। सकरा गांव के मंटी सहरिया ने बताया कि उसे ट्रैक्टर खरीदने के लिए मजबूर किया गया। इसके लिए एक लाख अस्सी हजार रुपये जमा किए। जब वह बाकी धनराशि नहीं जमा कर पाया तो एजेंसी के लोग उससे ट्रैक्टर वापस ले गये। मुन्ना सहरिया ने बताया कि उसने ट्रैक्टर लिया, जिसके लिए दो लाख रुपये जमा किये। आगे की किस्त न जमा कर पाने उससे ट्रैक्टर वापस ले लिया गया। दोनों सहरिया परिवारों को ट्रैक्टर एजेंसी ने जमा धनराशि में से कुछ भी रुपये वापिस नहीं दी है।
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ग्राम सकरा के निवासी वीरन यादव के पास साढ़े तीन एकड़ जमीन थी, जो कि पूरी डूब क्षेत्र में चली गई। लेकिन मुआवजा पाने के लिए इन्हें ट्रैक्टर लेना पड़ा। ऐसा ही मामला रुपा यादव, चिंत सहारिया, रमन्न सहारिया, भदई सहारिया, जानकी सहारिया, कमलेश का है। इन लोगों की पूरी जमीनें बांध के डूब क्षेत्र में चलीं गई हैं। इनके पास जमीन नहीं है, लेकिन मुआवजा के फेर में ट्रैक्टर लेेना पड़ा। मुआवजा मिलने पर ऐसे भी सहरिया परिवारों को ट्रैक्टर थमा दिए गए। जिनके
पास जोत के लिए या तो जमीन ही नहीं बची है और बची भी है तो नाम मात्र के लिए।
 सकरा गांव के मीरा सहरिया, जानकी सहरिया, ग्यासी सहरिया, बदईं सहरिया, चिंता सहरिया, रमला सहरिया, आशा सहरिया, हल्लू सहरिया, बीरन यादव, बिन्द्रावन, रतीराम, गोविंदी, राजाराम यादव, मूरत यादव आदि ये ऐसे परिवार हैं, जिनमें से कुछ के पास तो जोत के लिए कुछ भी भूमि नहीं है कुछ के पास न के बराबर भूमि है।

कोर्ट की शरण में पहुंचे किसान
केन्द्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण बिल एक जनवरी 2014 को पास किया गया था, जिसको राज्य सरकारों ने 19 मार्च 2015 से लागू कर दिया था। इस बिल के अनुसार किसानों को 7 लाख 34 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा मिलना था। लेकिन एक जनवरी 2016 के पूर्व में जो रजिस्ट्री हुईं हैं, उन किसानों को 4 लाख 34 हजार के हिसाब से मुआवजा दिया गया। इसी बात को लेकर पिसनारी गांव के लगभग 40 किसानों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में किसानों ने कहा है कि उन्हें गुमराह किया गया है तथा किसानों के खेतों बंधी, बोर, पेड़ नहीं दर्शाये गये तथा ग्राम पिसनारी के सहरिया परिवारों को पुनर्वास भी नहीं दिया गया। याचिकाकर्त्ता मजबूत सिंह, सुजान सिंह, भल्लन सहरिया, सिल्ला सहरिया, हंदू सहरिया, रामा सहरिया, सरजू, परम, गनेश हरनाम ने कहा है कि हम लोगों को बढ़ा हुआ मुआवजा मिले तथा पुनर्वास की व्यवस्था भी दी जाए।




विभाग द्वारा नियम मुताबिक मुआवजा वितरित किया गया है। मुआवजा पाने के बाद किसान उसका क्या उपयोग करता है, इसके लिए विभाग की जिम्मेदारी नहीं है।  नरेंद्र कुमार जाड़िया अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड प्रथम
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