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Lalitpur News: उपमंडियों में उगीं अनदेखी की झाड़ियां
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शैलेश गौतम
ललितपुर। सपा शासनकाल में बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत 95 करोड़ से बनाई गईं 23 उपमंडियों में से 22 में अधिकारियों की अनदेखी से झााड़ियां उग आई हैं। यहां कर्मी भी नहीं है। हालात यह है कि सिर्फ तालबेहट की तरगुवां उपमंडी में ही कारोबार होता है।
बुंदेलखंड पैकेज के तहत अमरपुर में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ 84.66 करोड़ से मंडी बनाई गई थी लेकिन यहां अभी तक कारोबारी नहीं पहुंचे हैं। 11 करोड़ से 22 उपमंडियों में ललितपुर मंडी समिति के अंतर्गत जखौरा के ग्राम नगवांस, राखपंचमपु़र, थनवारा, लखनपुरा, जाखलौन, तरगुवां, पूराकलां, खितवांस, बालाबेहट, पाली, बिरधा में कुल 11 उपमंडियां बनाई गईं। महरौनी मंडी के अंतर्गत बार, मर्रौली, कैलगुवां, बानपुर, कुम्हेड़ी, सिलावन, सैदपु़र, तिसगना, गौना, नाराहट, सौजना एवं बरौदाडांग में 12 उपमंडियां बनाई गई थीं। इनमें तरगुवां उपमंडी तो संचालित हो रही है, जहां व्यापारी व्यापार कर रहे हैं।
हालांकि महरौनी के अंतर्गत आने वाली बार, नाराहट और बानपुर की उपमंडियों में व्यापार के लिए व्यापारियों को शुरुआत में लाइसेंस भी दिए गए। व्यापारी उपमंडियों में व्यापार करने को राजी नहीं हुए और आज भी लाइसेंस होल्डर व्यापारी घरों या अन्य जगहों से व्यापार कर रहे हैं। किसानों को कई किमी दूर महरौनी या ललितपुर की गल्ला मंडी में उपज बेचने जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। (संवाद) ी
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ललितपुर। सपा शासनकाल में बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत 95 करोड़ से बनाई गईं 23 उपमंडियों में से 22 में अधिकारियों की अनदेखी से झााड़ियां उग आई हैं। यहां कर्मी भी नहीं है। हालात यह है कि सिर्फ तालबेहट की तरगुवां उपमंडी में ही कारोबार होता है।
बुंदेलखंड पैकेज के तहत अमरपुर में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ 84.66 करोड़ से मंडी बनाई गई थी लेकिन यहां अभी तक कारोबारी नहीं पहुंचे हैं। 11 करोड़ से 22 उपमंडियों में ललितपुर मंडी समिति के अंतर्गत जखौरा के ग्राम नगवांस, राखपंचमपु़र, थनवारा, लखनपुरा, जाखलौन, तरगुवां, पूराकलां, खितवांस, बालाबेहट, पाली, बिरधा में कुल 11 उपमंडियां बनाई गईं। महरौनी मंडी के अंतर्गत बार, मर्रौली, कैलगुवां, बानपुर, कुम्हेड़ी, सिलावन, सैदपु़र, तिसगना, गौना, नाराहट, सौजना एवं बरौदाडांग में 12 उपमंडियां बनाई गई थीं। इनमें तरगुवां उपमंडी तो संचालित हो रही है, जहां व्यापारी व्यापार कर रहे हैं।
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हालांकि महरौनी के अंतर्गत आने वाली बार, नाराहट और बानपुर की उपमंडियों में व्यापार के लिए व्यापारियों को शुरुआत में लाइसेंस भी दिए गए। व्यापारी उपमंडियों में व्यापार करने को राजी नहीं हुए और आज भी लाइसेंस होल्डर व्यापारी घरों या अन्य जगहों से व्यापार कर रहे हैं। किसानों को कई किमी दूर महरौनी या ललितपुर की गल्ला मंडी में उपज बेचने जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। (संवाद) ी
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