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बुंदेलखंड की संस्कृति पूरे विश्व की जननी:हरगोविंद

Thu, 26 Nov 2020 01:12 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 26 Nov 2020 01:12 AM IST
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bundelkhand cultural is rich
विश्व धरोहर सप्ताह के समापन पर बोलते राज्यमंत्री हरगोविंद कुशवाहा - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। उप्र पुरातत्व विभाग झांसी एवं इंटैक ललितपुर, झांसी चैप्टर द्वारा आयोजित विश्व धरोहर सप्ताह के समापन पर प्रदेश शासन के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि बुंदेलखंड की पावन भूमि है। यहां की संस्कृति पूरे विश्व की जननी है। ललितपुर का इतिहास 45 करोड़ वर्ष पुराना है।
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मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन संस्कृति, धर्म, आध्यात्म और धरोहरें सभी में बुंदेलखंड बेजोड़ है। ललितपुर का इतिहास 45 करोड़ वर्ष पुराना है। वाल्मीकि रामायण, गोस्वामी तुलसीदास की श्री रामचरित मानस, वेद, पुराण, उपनिषद और महाभारत सहित अनेक ग्रंथों की रचना बुंदेली धरा पर हुई। इसी भूमि पर भगवान श्रीराम ने 12 वर्ष वनवास के बिताए। कालिंजर के किले में भगवान शिव ने विषपान कर विष का शमन किया, उनका गला नीला पड़ गया और वह नीलकंठ कहलाए। आज तक कालिंजर का किला अजेय है। वहीं, एरच हिरण्यकश्यप की राजधानी रही है।
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पुरातत्व अधिकारी डा. एस के दुबे तथा झांसी इंटैक के संयोजक राजीव शर्मा ने कहा कि झांसी और ललितपुर जिलों में बहुमूल्य विरासत मौजूद है। अध्यक्षता इंटैक संयोजक संतोष कुमार शर्मा ने की। इस मौके पर डा. एस.पी. पाठक, ब्रजकिशोर सिंह, रमाकांत तिवारी, डा दीपक चौबे, फिरोज इकबाल, विनोद त्रिपाठी, रविशंकर तिवारी, ब्रजेश चतुर्वेदी, अमित तिवारी, हरविंदर सलूजा आदि ने सुझाव दिए। संचालन मनमोहन जड़िया ने किया।
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