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जिले में नहीं है ब्लैक फंगस के उपचार की सुविधा
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ललितपुर। शासन ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किया गया है, लेकिन जनपद में इसके उपचार की सुविधाएं मुहैया नही हो सकी हैं। मरीज में लक्षण मिलने पर जांच के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी भेजा जाता है।
कोरोना वायरस संक्रमण के साथ ही बाद एक नई बीमारी ब्लैक फंगस भी आ गई है। इसे (म्यूकरमाइकोसिस) भी कहा जाता है। इसका समय से इलाज न मिलने पर बीमारी घातक हो जाती है। इसकी निगरानी व उपचार की सुविधा के लिए नोडल अधिकारी भी नामित किए गए हैं लेकिन जिले में अब तक न तो इसके उपचार की और न ही जांच सुविधा मुहैया हो सकी सकी है। संदिग्ध मरीज मिलने पर लक्षणों के आधार पर जांच को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी भेजा जाता है। जांच के दौरान ब्लैक फंगस की पुष्टि होने पर उपचार भी झांसी में ही मिलेगा। जानकारी के अभाव में और समय पर रोग की पहचान न होने पर बीमारी घातक हो सकती है। ऐसे में मरीज को परेशानी होने का खतरा बना हुआ है। नोडल अधिकारी ब्लैक फंगस, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. धीरेंद्र बिजौरिया ने बताया कि जिले में अब तक केवल एक ही ब्लैक फंगस का मरीज मिला था जो उपचार के दौरान सर्जरी से ठीक हो गया है। अब एक भी अब कोई ब्लैक फंगस का मरीज नहीं है।
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इन बीमारियों के मरीजों को लेता है चपेट में
ब्लैक फंगस अधिकांश उन लोगों को अपनी चपेट में लेता है, जो कोरोना संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती के दौरान वेंटिलेटर या ऑक्सीजन पर रखे गए हों। इसके साथ ही कोरोना संक्रमित होने के बाद शरीर कमजोर और इम्युनिटी कमजोर होने के साथ ही डायबिटीज और लंबे समय से गंभीर बीमारियों के मरीजों में ब्लैक फंगस होने का खतरा रहता है। समय से इलाज नहीं कराने पर यह घातक रूप ले सकता है।
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ब्लैक फंगस के लक्षण
ब्लैक फंगस के लक्षणों में ओरल टिशू, जीभ और मसूड़ों का डिस्कलरेशन शामिल है। इसके अलावा इसमें चेहरे पर सूजन, नाक से खून आना, आंखों के नीचे भारीपन, बेचैनी, बुखार, सिरदर्द और देखने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।
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बचाव
संक्रमित मरीज कोरोना से ठीक होने के बाद घर पर आराम करें। कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीजों को साफ सफाई पर ध्यान देने की जरूरत है। लक्षण होने पर तुरंत उपचार कराएं।
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ब्लैक फंगस के मरीजों को चिह्नित करने के लिए जिला अस्पताल में नाक, कान, गला और आंख की ओपीडी शुरू कर दी गई है। यहां मरीज आने पर लक्षणों के आधार पर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज झांसी भेजा जाएगा।
डॉ. डीके गर्ग मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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कोरोना वायरस संक्रमण के साथ ही बाद एक नई बीमारी ब्लैक फंगस भी आ गई है। इसे (म्यूकरमाइकोसिस) भी कहा जाता है। इसका समय से इलाज न मिलने पर बीमारी घातक हो जाती है। इसकी निगरानी व उपचार की सुविधा के लिए नोडल अधिकारी भी नामित किए गए हैं लेकिन जिले में अब तक न तो इसके उपचार की और न ही जांच सुविधा मुहैया हो सकी सकी है। संदिग्ध मरीज मिलने पर लक्षणों के आधार पर जांच को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी भेजा जाता है। जांच के दौरान ब्लैक फंगस की पुष्टि होने पर उपचार भी झांसी में ही मिलेगा। जानकारी के अभाव में और समय पर रोग की पहचान न होने पर बीमारी घातक हो सकती है। ऐसे में मरीज को परेशानी होने का खतरा बना हुआ है। नोडल अधिकारी ब्लैक फंगस, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. धीरेंद्र बिजौरिया ने बताया कि जिले में अब तक केवल एक ही ब्लैक फंगस का मरीज मिला था जो उपचार के दौरान सर्जरी से ठीक हो गया है। अब एक भी अब कोई ब्लैक फंगस का मरीज नहीं है।
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इन बीमारियों के मरीजों को लेता है चपेट में
ब्लैक फंगस अधिकांश उन लोगों को अपनी चपेट में लेता है, जो कोरोना संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती के दौरान वेंटिलेटर या ऑक्सीजन पर रखे गए हों। इसके साथ ही कोरोना संक्रमित होने के बाद शरीर कमजोर और इम्युनिटी कमजोर होने के साथ ही डायबिटीज और लंबे समय से गंभीर बीमारियों के मरीजों में ब्लैक फंगस होने का खतरा रहता है। समय से इलाज नहीं कराने पर यह घातक रूप ले सकता है।
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ब्लैक फंगस के लक्षण
ब्लैक फंगस के लक्षणों में ओरल टिशू, जीभ और मसूड़ों का डिस्कलरेशन शामिल है। इसके अलावा इसमें चेहरे पर सूजन, नाक से खून आना, आंखों के नीचे भारीपन, बेचैनी, बुखार, सिरदर्द और देखने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।
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बचाव
संक्रमित मरीज कोरोना से ठीक होने के बाद घर पर आराम करें। कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीजों को साफ सफाई पर ध्यान देने की जरूरत है। लक्षण होने पर तुरंत उपचार कराएं।
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ब्लैक फंगस के मरीजों को चिह्नित करने के लिए जिला अस्पताल में नाक, कान, गला और आंख की ओपीडी शुरू कर दी गई है। यहां मरीज आने पर लक्षणों के आधार पर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज झांसी भेजा जाएगा।
डॉ. डीके गर्ग मुख्य चिकित्सा अधिकारी।