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ओवरलोडिंग से बिजली ठप, बिलबिलाए लोग
ललितपुर / ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2015 12:36 AM IST
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आसमान से बरसती आग के बीच ठीक दोपहर एक बजे 132 केवीए का विद्युत सर्किट ओवरलोडिंग के कारण ठप हो गया, जिससे पूरे जिले की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। इससे लोग गर्मी में पसीना- पसीना हो गए। पटरी से उतरी बिजली व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर के सबसे बड़े फीडर नंबर तीन को 36 घंटे में मात्र नौ घंटे ही बिजली मिल सकी।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट से 132 केवीए के दो सर्किट हंसारी पावर हाउस तक आते हैं। इसके बाद एक सर्किट झांसी तथा दूसरा सर्किट नेशनल हाइवे स्थित रौंड़ा के लिए आता है, जहां से ललितपुर को बिजली मिलती है। रौंड़ा में लगे बड़े ट्रांसफार्मर से बिजली 14 उप बिजली घरों के लिए निकल जाती है। इन 14 उप बिजलीघरों से कुल 46 फीडर निकले हैं, जिससे नगर के साथ ग्रामीण उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। गर्मी में करीब दो गुना खपत बढ़ने से विद्युत विभाग के सामने सुचारु आपूर्ति देने का संकट खड़ा हो जाता है। इससे जनपद के लोग भी जूझ रहे हैं। नगर में बंच केबल व अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगने के बाद भी राहत नहीं मिल पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों का तो और भी बुरा हाल है। विद्युत विभाग की आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है।
रविवार को आसमान से बरसती आग के बीच रौंड़ा व हंसारी के बीच हाइटेंशन तार टूट गए। हाइटेंशन लाइन ऊबड़- खाबड़ स्थानों से आने के कारण लाइनमैनों की टीम ने दोपहर में ही पेट्रोलिंग करनी शुरू कर दी, लेकिन अधिकारियों की मानें तो शाम 4.30 बजे तक कहीं कोई फाल्ट नहीं मिल सका था।
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मात्र नौ घंटे मिली बिजली
नगर के सबसे बड़े फीडर नंबर एक में 36 घंटे में से मात्र नौ घंटे बिजली मिल सकी। शुक्रवार की रात्रि कृषि उत्पादन नवीन गल्ला मंडी में तार टूट गए। इस कारण परेशानी बनी रही। शनिवार की सुबह इन तारों को बदलने का काम किया गया। दोपहर में काम पूर्ण कर लिया गया। इसके बाद बिजली चालू करते ही नदीपुरा में तार टूट गए। इस कारण पूरे दिन बिजली ठप रही। शनिवार की रात्रि मवेशी बाजार में तीन खंभों के हाइटेंशन तार टूट गए। इससे बंच को भी नुकसान हुआ। इस कारण रात्रि में तार बांधकर 11 बजे बिजली सुचारु कर दी गई। रविवार की सुबह 7.30 बजे मवेशी बाजार में तीन खंभे गाड़ने का काम किया गया। दोपहर दो बजे तक काम पूर्ण हो सका, लेकिन इससे पहले ही बिजली ब्रेक डाउन में चली गई। इस कारण शहर के कैलगुंवा तिराहा, मवेशी बाजार, नदीपुरा, रावतयाना, तालाबपुरा, बांध कालोनी, करीमनगर, लेड़ियापुरा, गांधीनगर, आजादपुरा प्रथम व द्वितीय के उपभोक्ता परेशान होते रहे।
इनवर्टरों ने छोड़ा साथ
फीडर नंबर तीन की बिजली लगातार प्रभावित होने से इनवर्टरों ने उपभोक्ताओं का साथ छोड़ दिया, जिससे गर्मी में लोगों को कहीं राहत नहीं मिल सकी। एक बजे से पूरे जनपद की बिजली ठप होते ही अन्य फीडरों के उपभोक्ता भी परेशान रहे। बिजली बंद होने से विद्युत अधिकारियों के नंबरों पर जमकर फोन घनघनाए। कई अधिकारियों ने तो अपने सीयूजी फोन बंद कर लिए।
हर वर्ग के लोग हुए प्रभावित
बिजली ठप होने से जनपद के हर वर्ग के लोग प्रभावित हुए। छोटे बच्चे व बीमार व्यक्तियों को तो खासी परेशानी हुई। वहीं, घरों में रहने वाली गृहणियां भी परेशान हो उठीं। मजबूरी में लोगों को हाथ के पंखे का सहारा लेना पड़ा। घरों के बाहर बैठकर उपभोक्ता बिजली का इंतजार करते नजर आए।
जलापूर्ति पर पड़ेगा असर
रविवार को बिजली गड़बड़ाने का असर सोमवार को जलापूर्ति पर पड़ेगा। जल संस्थान के अधिकारियों की मानें तो टंकियों को भरने के लिए 15 से 18 घंटे बिजली चाहिए। लेकिन, दोपहर एक बजे से बिजली गुल होने से जल संस्थान को भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल सकी। इस कारण सोमवार को नेहरू नगर सहित लोअर जोन के इलाकों में पेयजल संकट गहराने की संभावना है।
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट से 132 केवीए के दो सर्किट हंसारी पावर हाउस तक आते हैं। इसके बाद एक सर्किट झांसी तथा दूसरा सर्किट नेशनल हाइवे स्थित रौंड़ा के लिए आता है, जहां से ललितपुर को बिजली मिलती है। रौंड़ा में लगे बड़े ट्रांसफार्मर से बिजली 14 उप बिजली घरों के लिए निकल जाती है। इन 14 उप बिजलीघरों से कुल 46 फीडर निकले हैं, जिससे नगर के साथ ग्रामीण उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। गर्मी में करीब दो गुना खपत बढ़ने से विद्युत विभाग के सामने सुचारु आपूर्ति देने का संकट खड़ा हो जाता है। इससे जनपद के लोग भी जूझ रहे हैं। नगर में बंच केबल व अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगने के बाद भी राहत नहीं मिल पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों का तो और भी बुरा हाल है। विद्युत विभाग की आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है।
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रविवार को आसमान से बरसती आग के बीच रौंड़ा व हंसारी के बीच हाइटेंशन तार टूट गए। हाइटेंशन लाइन ऊबड़- खाबड़ स्थानों से आने के कारण लाइनमैनों की टीम ने दोपहर में ही पेट्रोलिंग करनी शुरू कर दी, लेकिन अधिकारियों की मानें तो शाम 4.30 बजे तक कहीं कोई फाल्ट नहीं मिल सका था।
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मात्र नौ घंटे मिली बिजली
नगर के सबसे बड़े फीडर नंबर एक में 36 घंटे में से मात्र नौ घंटे बिजली मिल सकी। शुक्रवार की रात्रि कृषि उत्पादन नवीन गल्ला मंडी में तार टूट गए। इस कारण परेशानी बनी रही। शनिवार की सुबह इन तारों को बदलने का काम किया गया। दोपहर में काम पूर्ण कर लिया गया। इसके बाद बिजली चालू करते ही नदीपुरा में तार टूट गए। इस कारण पूरे दिन बिजली ठप रही। शनिवार की रात्रि मवेशी बाजार में तीन खंभों के हाइटेंशन तार टूट गए। इससे बंच को भी नुकसान हुआ। इस कारण रात्रि में तार बांधकर 11 बजे बिजली सुचारु कर दी गई। रविवार की सुबह 7.30 बजे मवेशी बाजार में तीन खंभे गाड़ने का काम किया गया। दोपहर दो बजे तक काम पूर्ण हो सका, लेकिन इससे पहले ही बिजली ब्रेक डाउन में चली गई। इस कारण शहर के कैलगुंवा तिराहा, मवेशी बाजार, नदीपुरा, रावतयाना, तालाबपुरा, बांध कालोनी, करीमनगर, लेड़ियापुरा, गांधीनगर, आजादपुरा प्रथम व द्वितीय के उपभोक्ता परेशान होते रहे।
इनवर्टरों ने छोड़ा साथ
फीडर नंबर तीन की बिजली लगातार प्रभावित होने से इनवर्टरों ने उपभोक्ताओं का साथ छोड़ दिया, जिससे गर्मी में लोगों को कहीं राहत नहीं मिल सकी। एक बजे से पूरे जनपद की बिजली ठप होते ही अन्य फीडरों के उपभोक्ता भी परेशान रहे। बिजली बंद होने से विद्युत अधिकारियों के नंबरों पर जमकर फोन घनघनाए। कई अधिकारियों ने तो अपने सीयूजी फोन बंद कर लिए।
हर वर्ग के लोग हुए प्रभावित
बिजली ठप होने से जनपद के हर वर्ग के लोग प्रभावित हुए। छोटे बच्चे व बीमार व्यक्तियों को तो खासी परेशानी हुई। वहीं, घरों में रहने वाली गृहणियां भी परेशान हो उठीं। मजबूरी में लोगों को हाथ के पंखे का सहारा लेना पड़ा। घरों के बाहर बैठकर उपभोक्ता बिजली का इंतजार करते नजर आए।
जलापूर्ति पर पड़ेगा असर
रविवार को बिजली गड़बड़ाने का असर सोमवार को जलापूर्ति पर पड़ेगा। जल संस्थान के अधिकारियों की मानें तो टंकियों को भरने के लिए 15 से 18 घंटे बिजली चाहिए। लेकिन, दोपहर एक बजे से बिजली गुल होने से जल संस्थान को भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल सकी। इस कारण सोमवार को नेहरू नगर सहित लोअर जोन के इलाकों में पेयजल संकट गहराने की संभावना है।