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मधुमक्खी पालन से बढ़ेगा फसलों का उत्पादन
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कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण के बाद प्रमाणपत्र लिए प्रशिक्षणकर्ता।
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बांदा के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों और ग्रामीणों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया। इससे किसानों का उत्पादन बढ़ेगा।
सात दिन तक चले इस प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान मधुमक्खी का पालन कर फसलों का उत्पादन बढ़ा सकते हैं। वैज्ञानिक डा. नितिन यादव ने किसानों को मधुमक्खी पालन के बारे में बताया। किसानों व ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए आधुनिक तकनीक के बारे में बताया। देश भर में पाई जाने वाली मधुमक्खी की प्रजातियां, मधुमक्खी की पहचान, शहद एवं शाही जेली की औषधीय उपयोगिता, मौन ग्रहों का रखरखाव, शहद की प्रोसेसिंग, कीटों एवं प्राकृतिक शत्रुओं के बारे में बताया गया। मधुमक्खी पालन को किसान, महिला, ग्रामीण, युवा तथा युवतियां कर सकते हैं। अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं। मधुमक्खी पालन करके फसलों का उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है। मधुमक्खी परागण के कारण फल और सब्जियां, तिलहन, दलहन और दूसरी विभिन्न फसलों में दो से तीन हजार प्रतिशत तक पैदावार में वृद्धि संभव है।
प्रशिक्षण में उप निदेशक कृषि संतोष सविता ने प्रशिक्षणार्थी को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस मौके पर वैज्ञानिक डॉ. दिनेश तिवारी, डॉ. नितिन पाडेय, डॉ. सरिता देवी, डा. अर्चना दीक्षित, डा. मारूफ़ अहमद एवं 32 प्रशिक्षु किसानों व युवाओं ने प्रतिभाग किया।
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सात दिन तक चले इस प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान मधुमक्खी का पालन कर फसलों का उत्पादन बढ़ा सकते हैं। वैज्ञानिक डा. नितिन यादव ने किसानों को मधुमक्खी पालन के बारे में बताया। किसानों व ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए आधुनिक तकनीक के बारे में बताया। देश भर में पाई जाने वाली मधुमक्खी की प्रजातियां, मधुमक्खी की पहचान, शहद एवं शाही जेली की औषधीय उपयोगिता, मौन ग्रहों का रखरखाव, शहद की प्रोसेसिंग, कीटों एवं प्राकृतिक शत्रुओं के बारे में बताया गया। मधुमक्खी पालन को किसान, महिला, ग्रामीण, युवा तथा युवतियां कर सकते हैं। अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं। मधुमक्खी पालन करके फसलों का उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है। मधुमक्खी परागण के कारण फल और सब्जियां, तिलहन, दलहन और दूसरी विभिन्न फसलों में दो से तीन हजार प्रतिशत तक पैदावार में वृद्धि संभव है।
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प्रशिक्षण में उप निदेशक कृषि संतोष सविता ने प्रशिक्षणार्थी को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस मौके पर वैज्ञानिक डॉ. दिनेश तिवारी, डॉ. नितिन पाडेय, डॉ. सरिता देवी, डा. अर्चना दीक्षित, डा. मारूफ़ अहमद एवं 32 प्रशिक्षु किसानों व युवाओं ने प्रतिभाग किया।
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