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स्कूल जाने से डर रही हैं, पिटाई का शिकार छात्राएं
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अध्यापक की पिटाई से पैर में लगी चोट दिखाता बच्चा।
- फोटो : LALITPUR
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। दर्द से कराह रहीं छात्राओं ने रोते-रोते शिक्षक द्वारा पिटाई की दास्तां सुनाई। उन्होंने बताया कि होमवर्क पूरा न करने पर शिक्षक ने उन्हें डंडे से पीटा। पिटाई से पैरों पर आए चोट के निशान भी दिखाए। वे इस कदर डरी हुई हैं कि स्कूल जाने को राजी नहीं हैं। परिजन उन्हें ढांढस बांधते रहे।
ब्लॉक के एक विद्यालय में शिक्षक द्वारा छात्राओं को पीटने के मामले में शिकायत करना ग्रामीण को भारी पड़ रहा है। थाने में तहरीर देने वाले अरविंद के अनुसार जिन ग्रामीणों की बेटियों को पीटा गया है वे बहुत शिक्षित और संसाधन वाले नहीं हैं। उनके पास फोन तक नहीं हैं। शाम को परिजनों ने उन्हें बुलाकर शिक्षक द्वारा बेटियों को पीटने की जानकारी दी गई। यह भी कहा कि फोन से इसकी सूचना पुलिस को दे दूं। इस पर अरविंद ने डायल 112 पर पुलिस से शिकायत कर दी। पुलिस आई और जानकारी लेकर रविवार सुबह थाने आने को कहा। वे लोग थाने पहुंचते इससे पहले ही आरोपी शिक्षक के समर्थक पीड़ित छात्राओं के परिजनों और उन्हें धमकाने पहुंच गए। इसके बाद परिजन तो थाने नहीं गए। उन्होंने तहरीर दे दी। अरविंद पर भी शिकायत वापस लेने और राजीनामे का दबाव बनाया जा रहा है।
कड़ी कार्रवाई का है प्रावधान
अधिवक्ता हिमांशु हुंडैत के अनुसार स्कूलों में बच्चों के साथ मारपीट के मामले में अलग-अलग कानूनों का प्रावधान है। अभिभावक अधिनियम में यदि अध्यापक अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन नहीं करता है तो उसके उल्लंघन पर आईपीसी एक्ट में कार्रवाई का प्रावधान है। यदि मारपीट करने वाला सरकारी स्कूल से है तो लोक सेवक अधिनियम के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
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ब्लॉक के एक विद्यालय में शिक्षक द्वारा छात्राओं को पीटने के मामले में शिकायत करना ग्रामीण को भारी पड़ रहा है। थाने में तहरीर देने वाले अरविंद के अनुसार जिन ग्रामीणों की बेटियों को पीटा गया है वे बहुत शिक्षित और संसाधन वाले नहीं हैं। उनके पास फोन तक नहीं हैं। शाम को परिजनों ने उन्हें बुलाकर शिक्षक द्वारा बेटियों को पीटने की जानकारी दी गई। यह भी कहा कि फोन से इसकी सूचना पुलिस को दे दूं। इस पर अरविंद ने डायल 112 पर पुलिस से शिकायत कर दी। पुलिस आई और जानकारी लेकर रविवार सुबह थाने आने को कहा। वे लोग थाने पहुंचते इससे पहले ही आरोपी शिक्षक के समर्थक पीड़ित छात्राओं के परिजनों और उन्हें धमकाने पहुंच गए। इसके बाद परिजन तो थाने नहीं गए। उन्होंने तहरीर दे दी। अरविंद पर भी शिकायत वापस लेने और राजीनामे का दबाव बनाया जा रहा है।
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कड़ी कार्रवाई का है प्रावधान
अधिवक्ता हिमांशु हुंडैत के अनुसार स्कूलों में बच्चों के साथ मारपीट के मामले में अलग-अलग कानूनों का प्रावधान है। अभिभावक अधिनियम में यदि अध्यापक अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन नहीं करता है तो उसके उल्लंघन पर आईपीसी एक्ट में कार्रवाई का प्रावधान है। यदि मारपीट करने वाला सरकारी स्कूल से है तो लोक सेवक अधिनियम के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
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