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अधिक झुकने वालों से रहें सावधान : आचार्य श्री
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महरौनी। वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भयसागर महाराज ने कहा कि गुरु का आशीर्वाद ही उपदेश है। उन्होंने कहा कि पिता का संतान के प्रति वात्सल्य पूर्ण व्यवहार और आवश्यकताओं की पूर्ति करके उनका हाल-चाल पूछ लेना ही संतान के प्रति विनय है, विनय निस्वार्थ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नमन तो सभी करते हैं, लेकिन मोक्ष की प्राप्ति हेतु अपने प्रभु और गुरु के लिए नमन करना चाहिए।
आचार्य श्री ने कहा कि माता-पिता का नाम रोशन करना चाहिए। जो अपने मां-बाप की संपत्ति सुरक्षित रखे, लेकिन उसमें वृद्धि न कर पाए उसे अनुजात नाम का पुत्र कहते हैं। जो माता-पिता की संपत्ति आदि को निरंतर घटाता जाए, वह जाट नाम का पुत्र है और जो अपने माता-पिता की इज्जत धूमिल करे वह कुलांगर नाम का पुत्र है।
आचार्य श्री ने कहा कि पहले देखा जाता था कि चार बेटों का एक बुजुर्ग पिता लालन-पालन कर लेता था, लेकिन आज माता-पिता और दादा-दादी मिलकर एक संतान का पालन नहीं कर पा रहे हैं, इसी का नाम कलयुग है।
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आचार्य श्री ने कहा कि माता-पिता का नाम रोशन करना चाहिए। जो अपने मां-बाप की संपत्ति सुरक्षित रखे, लेकिन उसमें वृद्धि न कर पाए उसे अनुजात नाम का पुत्र कहते हैं। जो माता-पिता की संपत्ति आदि को निरंतर घटाता जाए, वह जाट नाम का पुत्र है और जो अपने माता-पिता की इज्जत धूमिल करे वह कुलांगर नाम का पुत्र है।
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आचार्य श्री ने कहा कि पहले देखा जाता था कि चार बेटों का एक बुजुर्ग पिता लालन-पालन कर लेता था, लेकिन आज माता-पिता और दादा-दादी मिलकर एक संतान का पालन नहीं कर पा रहे हैं, इसी का नाम कलयुग है।
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